
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : April 24, 2026 1:51 PM IST
Medically Verified By: Dr. Sunil Rana
Image credits by: AI से हेल्थ एडवाइज
Health Advice Ke Liye AI Par Trust: क्योंकि ए.आई आ गया है इसलिए हम अपने मन में आने वाले हर सवाल का जवाब पाने के लिए किसी व्यक्ति को नहीं खोजते हैं। बल्कि सीधा ऐआई के पास जाते हैं और सारी उलझनें सुलझा लेते हैं। अन्य एडवाइज लेना तो ठीक है, लेकिन क्या हेल्थ एडवाइज के लिए चैट जीपीटी और जैमिनी जैसे ए.आई चैटबॉट का भरोसा करना सही है? हम यह बात यूं ही नहीं कह रहे हैं, बल्कि डिजिटल दौर में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए लोग तेजी से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और चैटबॉट्स की ओर रुख कर रहे हैं।
कुछ सेकंड में लक्षण डालते ही जवाब मिल जाना आसान जरूर है, लेकिन क्या यह भरोसेमंद भी है? यही सवाल हमने एशियन हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर एवं हेड, इंटरनल मेडिसिन, (यूनिट III) डॉक्टर सुनील राणा से पूछा। उन्होंने बताया कि ‘चैटबॉट्स और डिजिटल टूल्स शुरुआती जानकारी देने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें अंतिम सलाह या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।’ आइए हम इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
डॉक्टर सुनील राणा का कहना है कि ‘चैटबॉट्स बड़ी मात्रा में डेटा के आधार पर जवाब देते हैं, लेकिन हर मरीज की स्थिति अलग होती है। किसी भी बीमारी का सही निदान मरीज की पूरी हिस्ट्री, जांच और क्लिनिकल एग्जामिनेशन के बिना संभव नहीं है। इसलिए चैटबॉट्स को केवल एक गाइड के तौर पर देखें, न कि डॉक्टर का विकल्प।’
वे आगे कहते हैं कि कई बार लोग इंटरनेट पर पढ़ी जानकारी के आधार पर खुद ही दवा लेना शुरू कर देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। ‘सेल्फ-मेडिकेशन से साइड इफेक्ट्स, गलत इलाज और बीमारी के बढ़ने का खतरा रहता है।’
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि चैटबॉट्स कभी-कभी सामान्य लक्षणों को गंभीर बीमारी से जोड़ सकते हैं या गंभीर लक्षणों को हल्का बता कर भ्रम पैदा कर सकते हैं। डॉ. बताते हैं, ‘इमरजेंसी के मामलों में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर कोई व्यक्ति केवल चैटबॉट की सलाह पर भरोसा करके अस्पताल आने में देरी करता है, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। जैसे कि छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या अचानक कमजोरी- इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क जरूरी है।’
एक्सपर्ट मानते हैं कि कुछ स्थितियों में चैटबॉट्स उपयोगी साबित हो सकते हैं। जैसे- सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में, लाइफस्टाइल और डाइट से जुड़े सामान्य सुझाव देने में और किसी बीमारी के बारे में बेसिक जानकारी समझाने में, लेकिन यह तभी तक सीमित होना चाहिए, जब तक बात सामान्य जानकारी की हो।
हेल्थ चैटबॉट्स का इस्तेमाल करते समय मरीज अपनी निजी स्वास्थ्य जानकारी साझा करते हैं। ऐसे में डेटा की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर प्लेटफॉर्म सुरक्षित नहीं होता, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है।
डॉक्टर कहते हैं कि ‘डिजिटल टूल्स सहायक हैं, लेकिन अंतिम निर्णय डॉक्टर का ही होना चाहिए।’ वह आगे कहते हैं कि ‘हम डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी के खिलाफ नहीं हैं। यह जागरूकता बढ़ाने और लोगों को सही दिशा दिखाने में मदद करती है। लेकिन जब बात इलाज की आती है, तो व्यक्तिगत जांच और डॉक्टर की सलाह ही सबसे महत्वपूर्ण होती है।’
तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में हेल्थ चैटबॉट्स ने जानकारी को आसान और सुलभ बना दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों की साफ राय है कि इन पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं है। स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी गंभीर या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और सही विकल्प है। इसलिए, अगली बार जब आप ऑनलाइन किसी चैटबॉट से हेल्थ सलाह लें, तो उसे केवल एक शुरुआती गाइड मानें- अंतिम फैसला हमेशा विशेषज्ञ की राय के आधार पर ही करें।
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