
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Medically Verified By: Dr. Vivek Barun
mobile and brain tumor (image-AI)
Mobile and Brain Tumor: क्या आपके मम्मी-पापा या घर के बड़े सदस्य हर छोटी-मोटी समस्या के लिए फोन को जिम्मेदार समझते हैं? अगर हां, तो ऐसा ज्यादातर लोगों के साथ होता है। दरअसल, मोबाइल फोन जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। लोग चाहकर भी इससे खुद को दूर नहीं कर पाते हैं। आजकल मोबाइल फोन की मदद से ही ऑफिस मीटिंग, पढ़ाई और मनोरंजन हो रहा है। यानी हर उम्र के लोग अपने दिन का ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने ही बिताते हैं। मोबाइल फोन ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसे कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है। इसलिए लोगों के मन में मोबाइल फोन से जुड़े कई सवाल होते हैं। इसमें से एक है- क्या मोबाइल चलाने से ब्रेन ट्यूमर होता है? तो आइए, ब्रेन ट्यूमर दिवस (हर साल जून को मनाया जाता है) के मौके पर Artemis Hospitals के न्यूरोलॉजी एंड एपिलेप्सी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विवेक बरुन से जानते हैं इसके बारे में-
डॉ. विवेक बरुन बताते हैं, "मोबाइल चलाने से ब्रेन ट्यूमर नहीं होता है। मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच कोई संबंध नहीं है। मोबाइल से हानिकारक रेज निकलती है, जो आंखों और दिमाग पर असर डाल सकता है। लेकिन, इसका ब्रेन ट्यूमर से कोई संबंध नहीं है। लेकिन, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप लंबे समय तक स्क्रीन देख सकते हैं। स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से कई दूसरी समस्याएं हो सकती हैं।"
डॉ. विवेक आगे बताते हैं, "ब्रेन ट्यूमर तब होता है, जब मस्तिष्क या उसके आस-पास की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होने लगती है। ये कोशिकाएं गांठ बनाती हैं, जिसे ट्यूमर कहा जाता है।"
Disclaimer: ज्यादा देर तक फोन चलाने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। इससे ब्रेन हेल्थ और मेंटल हेल्थ प्रभावित हो सकता है। अगर आपका स्क्रीन से जुड़ा काम रहता है, तो हर 20 से 30 मिनट में आंखों को आराम दें। सोने से एक घंटा पहले मोबाइल बंद करके रख दें।