
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : June 8, 2026 11:44 AM IST
Medically Verified By: Dr Diwakar Kumar
हार्ट अटैक और धूल-मिट्टी
दिल्ली व अन्य राज्यों में हर दूसरे दिन बदलता मौसम वैसे तो बड़ा ही सुहावना लग रहा है, लेकिन सेहत के मामले में यह थोड़ा दिक्कतें पैदा करने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि कई हिस्सों में आजकल आंधी-तूफान, तेज हवाएं और तेज मौसम बदलाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा अचानक और तेज मौसम केवल आम लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि हार्ट पेशेंट के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
एशियन हॉस्पिटल के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर दिवाकर कुमार का कहना है कि एटमॉस्फेरिक प्रेशर, तापमान और नमी में अचानक बदलाव के प्रभाव के कारण हार्ट और ब्लड वैसल्स में अचानक बदलाव हो सकता है, जिसके कारण हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव की समस्या और सीने में दर्द आदि हो सकता है। यह दिल को और कैसे नुकसान पहुंचाता है, आइए डॉक्टर से विस्तार से जानते हैं।
डॉक्टर के अनुसार जब मौसम अचानक बदल जाता है तो शरीर खुद को नई परिस्थितियों के अनुसार ढालने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है और इस दौरान दिल को नॉर्मल से ज्यादा काम करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में बुजुर्गों, हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट फेल्योर से पीड़ित मरीजों में असर और ज्यादा दिखेगा।
हार्ट अटैक से जुड़ी जानकारी
विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवाओं और धूल भरे तूफान के दौरान हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा भी बढ़ सकती है। ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सूजन (इन्फ्लेमेशन) को बढ़ा सकते हैं, जिससे हृदय रोगियों में जटिलताएं पैदा होने का खतरा रहता है। कई शोधों में भी पाया गया है कि अत्यधिक मौसमीय घटनाओं के दौरान हार्ट अटैक और कार्डियोवैस्कुलर इमरजेंसी के मामलों में वृद्धि देखी जाती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, आंधी-तूफान के मौसम में हो रहे मेंटल स्ट्रेस की वजह से हार्ट पर भी नकारात्मक असर होता है। ज्यादातर लोगों में बिजली गिरने, तेज हवा और ठंडे मौसम की आशंका से चिंता और तनाव में वृद्धि हो जाती है, जिसके कारण शरीर में तनाव में रहने वाले हार्मोन एड्रेनालिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर पर असर पड़ सकता है। साथ ही डॉक्टर कहते हैं कि “हार्ट मरीजों को मौसम खराब होने पर बाहर नहीं जाना चाहिए। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो मौसम की पूर्व जानकारी लेकर ही बाहर जाना चाहिए। इसके साथ ही दवाएं समय पर लेनी चाहिए और कोई भी अनोखा लक्षण होने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”
इस विषय पर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना, चक्कर अनुभव करना, दिल की धड़कन का तेज महसूस होना व अचानक कमजोरी अधिक होता है तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। यह लक्षण अक्सर मरीज सामान्य थकान व मौसम के कारण समझकर इन्हें अनदेखा कर देते हैं।
National Library of Medicine में प्रकाशित स्टडी “Climatic influences on cardiovascular diseases” के अनुसार स्टडी ठंड, गर्मी और लू (हीट वेव) के संपर्क में आने से एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम का खतरा बढ़ सकता है। मौसम से जुड़े अन्य कारकों, जैसे कि नमी, वायुमंडलीय दबाव, धूप के घंटे, हवा की गति और दिशा, और बारिश या बर्फबारी का संबंध जानलेवा और गैर-जानलेवा हृदय रोगों के मामलों से होने का अनुमान लगाया गया है।
एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि मौसम का बिगड़ता हुआ प्रकोप होने पर ज्यादा पानी पिएं, संतुलित खानपान अपनाएं और शरीर को अत्यधिक गर्मी और ठंड से बचाए। हाई ब्लड प्रेशन और हार्ट डिजीज वाले रोगियों को नियमित तौर पर अपना ब्लड प्रेशर चेक कराते रहिये। जिनके पहले हार्ट अटैक हो चुका हो या फिर बाईपास या एंजियोप्लास्टी करवा चुके हो, उन्हें अधिक सतर्क रहना चाहिए। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती मौसम की चरम घटनाओं में, हार्ट पेशेंट को मौसम की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सावधानी बरतनी चाहिए। सही समय पर जागरूकता और उचित देखभाल से मौसम से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: आंधी-तूफान और अचानक मौसम बदलाव सिर्फ कभी-कभी असुविधा का ही कारण नहीं होते हुए भी हार्ट पेशेंट के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जोखिम बना सकते हैं। ऐसे में मौसम संबंधित चेतावनियों को गंभीरता से लेना और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। आप भी इस सलाह को अपनाएं।