क्या सोलर स्टॉर्म का इंसानों की सेहत, नींद या माइग्रेन पर कोई असर पड़ता है?
पिछले कुछ दिन पहले मीडिया में एक खबर सामने आई थी, जिसमें बताया गया कि पृथ्वी की ओर सोलर स्टॉर्म बढ़ रहे हैं। इसे लेकर कुछ लोगों का कहना है कि इससे सिर में दर्द और माइग्रेन की परेशानी हो सकती है। आइए जानते हैं-
हाल ही में पृथ्वी की ओर बढ़ रहे सोलर स्टॉर्म को लेकर कई खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि सोलर स्टॉर्म की वजह से सिरदर्द, माइग्रेन, नींद की समस्या और मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है। लेकिन क्या वाकई सोलर स्टॉर्म इंसानों की सेहत को प्रभावित करता है या यह सिर्फ एक मिथक है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स में सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और PDMDRC (पार्किंसंस रोग और मूवमेंट डिसऑर्डर रिसर्च सेंटर) की क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. रुक्मिणी मृदुला से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से विस्तार से समझते हैं-
क्या होता है सोलर स्टॉर्म?
सोलर स्टॉर्म सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा और आवेशित कणों का एक शक्तिशाली विस्फोट होता है। जब ये कण पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकराते हैं, तो जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म पैदा हो सकता है।
इसका असर मुख्य रूप से सैटेलाइट, जीपीएस, रेडियो कम्युनिकेशन और पावर ग्रिड जैसी टेक्नीकल प्रोसेस पर पड़ता है। हालांकि, कई लोग मानते हैं कि इसका असर इंसानों के शरीर पर भी दिखाई देता है।
क्या माइग्रेन और नींद की समस्या बढ़ सकती है?
डॉ. रुक्मिणी मृदुला का कहना है कि अधिकांश लोगों में सोलर स्टॉर्म और माइग्रेन, नींद की समस्या या अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। कुछ लोगों के व्यक्तिगत अनुभव अलग हो सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक स्तर पर इसके ठोस प्रमाण नहीं हैं।
डॉक्टर बताती हैं कि कुछ पुराने रिसर्च में यह सुझाव दिया गया था कि जियोमैग्नेटिक एक्टिविटी संवेदनशील लोगों में सिरदर्द की तीव्रता को थोड़ा प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर हुई रिसर्च में ऐसा कोई मजबूत संबंध नहीं मिला।
रिसर्च क्या कहती है?
2016 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लगभग 6.3 करोड़ (63 Million) ट्वीट्स का विश्लेषण किया। अध्ययन का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या सौर गतिविधि और सिरदर्द या माइग्रेन के बीच कोई संबंध है। शोधकर्ताओं को ऐसा कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।
इसके अलावा कई वैज्ञानिक समीक्षाओं में भी यह निष्कर्ष सामने आया कि माइग्रेन के प्रमुख कारणों में तनाव, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन, हार्मोनल बदलाव और स्क्रीन एक्सपोजर शामिल हैं, न कि सोलर स्टॉर्म।
फिर लोगों को ऐसा क्यों लगता है?
डॉक्टर का कहना है कि जब सोलर स्टॉर्म जैसी बड़ी खगोलीय घटनाएं चर्चा में आती हैं, तो लोग अपने सामान्य सिरदर्द, थकान या नींद की परेशानी को उससे जोड़ने लगते हैं। लेकिन माइग्रेन और नींद की समस्याओं के पीछे कई स्थापित कारण हो सकते हैं, जैसे-
- तनाव और चिंता
- पर्याप्त नींद न लेना
- शरीर में पानी की कमी
- लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल
- कैफीन या भोजन की आदतों में बदलाव
- मौसम में बदलाव
पृथ्वी हमें कैसे सुरक्षित रखती है?
डॉ. रुक्मिणी मृदुला बताती हैं कि पृथ्वी का मैग्नेटिक फील्ड और वायुमंडल हमें सूर्य से आने वाले अधिकांश हानिकारक विकिरणों से बचाता है। यही वजह है कि सोलर स्टॉर्म का सीधा प्रभाव आम लोगों के स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता।
अगर माइग्रेन है, तो क्या करें?
अगर आपको माइग्रेन की समस्या है, तो सोलर स्टॉर्म को जिम्मेदार मानने के बजाय अपने ट्रिगर्स पर नजर रखें। एक माइग्रेन डायरी बनाएं और नोट करें कि सिरदर्द कब और किन परिस्थितियों में बढ़ता है।
इसके साथ ही कुछ उपायों को अपनाएं जिससे माइग्रेन की समस्या कम हो सके, जैसे-
- पर्याप्त पानी पिएं
- नियमित नींद लें
- तनाव कम करें
- स्क्रीन टाइम नियंत्रित रखें
- जरूरत पड़ने पर न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें
Disclaimer: फिलहाल उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इस दावे का समर्थन नहीं करते। कुछ लोगों के व्यक्तिगत अनुभव हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश लोगों के लिए सोलर स्टॉर्म और माइग्रेन या नींद की समस्या के बीच कोई स्पष्ट और प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं हुआ है। सोलर स्टॉर्म का असर मुख्य रूप से तकनीकी प्रणालियों पर पड़ता है, न कि मानव स्वास्थ्य पर।