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क्या घर पर स्किन कैंसर का जल्दी पता लग सकते हैं? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

कैंसर के कई प्रकार होत हैं, जिनका पता स्क्रीनिंग से लगाया जाता है। लेकिन स्किन कैंसर उन कैंसर में से एक है जो त्वचा के ऊपर होता है और काफी हद तक इसका पता आप घर पर भी लगा सकते हैं।

Written By Vidya Sharma
Updated : July 18, 2026 11:00 AM IST

skin cancer

ज्यादातर कैंसर शरीर के अंदर चुपचाप बढ़ते हैं। जब तक कैंसर काफी बढ़ नहीं जाता, तब तक उसे न देखा जा सकता है और न ही महसूस किया जा सकता है। स्किन कैंसर अलग होता है। यह उन बहुत कम कैंसरों में से एक है जो आपको दिखने वाली चेतावनी देते हैं। यह ऊपर की तरफ से बढ़ता है, जो दिखने वाला होता है। इसका मतलब आपके पास इसे जल्दी पता लगाने का मौका है- कभी-कभी घर पर भी। लेकिन इसमें एक दिक्कत है। सिर्फ इसलिए कि आप इसे देख सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसे पहचान लेंगे।

जी हां, एसएसओ कैंसर हॉस्पिटल के ऑन्कोसर्जन डॉक्टर चेतन अंचन कहते हैं “जब हम स्किन कैंसर का नाम सुनते हैं, तो ज्यादातर लोग सिर्फ मेलेनोमा के बारे में सोचते हैं। लेकिन स्किन कैंसर के 3 मुख्य प्रकार होते हैं और तीनों के लक्षण और बढ़ने का तरीका अलग-अलग होता है।” आइए स्किन कैंसर के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

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पहले जानें मैलिग्नेंट मेलेनोमा क्या है

डॉक्टर बताते हैं, “स्किन कैंसर के प्रकारों में मैलिग्नेंट मेलेनोमा सबसे खतरनाक है। यह त्वचा में रंग बनाने वाली कोशिकाओं (मेलानोसाइट्स) से विकसित होता है। यह भले ही कम पाया जाता है, लेकिन बहुत तेजी से बढ़ता है। मेलेनोमा की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि यह तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।

ये लिम्फ नोड्स के अलावा फेफड़े, लीवर और दिमाग जैसे जरूरी अंगों तक पहुंच सकता है। ये किसी साधारण तिल से भी शुरू हो सकता है जो शुरुआत में सामान्य दिखाई देता है। इसलिए इसका जल्दी पता चलना बहुत जरूरी है।”

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कैंसर पता लगाने का ABCDE नियम

डॉक्टर ने तिल की जांच का एक आसान तरीका बताया है। अपने तिल को चेक करने के लिए ABCDE नियमयाद रखें।

A- Asymmetry यानी तिल के दो हिस्से एक जैसे न हों  

B- Border यानी किनारे टेढ़े-मेढ़े हों  

C- Color यानी रंग अलग-अलग हो या बदल रहा हो

D- Diameter यानी साइज 6mm से बड़ा हो, एक पेंसिल के रबर जितना

E- Evolution यानी सबसे जरूरी- तिल का साइज, शेप या रंग बदल रहा हो  

यदि किसी तिल का आकार, रंग या रूप बदल रहा है, तो उसकी जांच करवानी चाहिए। एक जैसा दिखने वाला तिल से ज्यादा बदलते हुए तिल पर ध्यान देना चाहिए।

बेसल सेल कार्सिनोमा कैंसर का कैसे पता करें?

बता दें कि ये स्किन कैंसर का सबसे आम प्रकार है। डॉक्टर बताते हैं कि ये धीरे-धीरे बढ़ता है और शरीर में बहुत कम फैलता है। लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह आसपास के हिस्सों को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। यह चमकदार या मोती जैसा उभार, ऐसा घाव जो ठीक न हो, या चपटा पैच जैसा दिख सकता है। इसमें दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इसे अक्सर इग्नोर कर देते हैं।

स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा कैंसर का कैसे पता करें?

स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, बेसल सेल कार्सिनोमा की तुलना में अधिक आक्रामक हो सकता है। अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है। यह खुरदरा, पपड़ी वाला पैच, सख्त लाल गांठ, या ऐसा घाव हो सकता है जिससे खून निकलता है और पपड़ी जम जाती है।

स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का एक जरूरी और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला रूप मार्जोलिन अल्सर है, जो पुराने जले हुए निशान, लंबे समय से चले आ रहे घाव या लंबे समय से बने साइनस ट्रैक्ट में होता है। ये हिस्से कैंसर में बदलने से पहले सालों या दशकों तक वैसे ही रह सकते हैं।

मार्जोलिन अल्सर के लक्षण

मार्जोलिन अल्सर तेजी से फैलता है और अक्सर इसका पता देर से चलता है क्योंकि यह उन जगहों पर होता है जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। इसकी चेतावनी के संकेतों में शामिल हैं- लंबे समय से बना घाव जो ठीक नहीं हो रहा है, आकार में बढ़ना, उभरे हुए या टेढ़े-मेढ़े किनारे, खून बहना, बदबूदार स्राव, या पहले से दर्द-रहित निशान में नया दर्द शुरू होना। अगर किसी पुराने घाव का रूप बदलता है, तो बिना देरी किए उसकी जाँच करवानी चाहिए।

जल्दी पता लगना क्यों जरूरी है?

डॉक्टर बताते हैं कि अगर स्किन कैंसर शुरू में ही पकड़ में आ जाए तो इलाज बहुत आसान होता है। कई बार तो यह छोटी सर्जरी से ही निकल जाता है। लेकिन अगर देर हो जाए तो कैंसर गहराई तक पहुंच जाता है, आसपास के हिस्से में फैलता है और लिम्फ नोड्स या दूसरे अंगों तक पहुंच सकता है। ऐसे में इलाज में बड़ी सर्जरी, रेडिएशन या दवाओं का सहारा लेना पड़ सकता है। खासकर मेलेनोमा में, जल्दी पता लगना जान बचा सकता है।

घर पर खुद कैसे चेक करें?

डॉक्टर कहते हैं कि अच्छी बात यह है कि आप घर पर ही अपनी त्वचा की जांच कर सकते हैं। इसका मकसद बीमारी का पता लगाना नहीं, बल्कि बदलावों को जल्दी पहचानना है। महीने में एक बार खुद से जांच करना, जिसमें सिर्फ पांच से दस मिनट लगते हैं, बहुत फायदेमंद हो सकता है।

अच्छी रोशनी में खड़े हों, मुश्किल से दिखने वाली जगहों को देखने के लिए शीशों का इस्तेमाल करें और अपने पूरे शरीर की जांच करें। जिसमें सिर की त्वचा, नाखून और पैरों की उंगलियों के बीच की जगहें भी शामिल हैं। जरूरी नहीं कि एकदम परफेक्ट चेक हो, बस अपनी स्किन को पहचानें कि नॉर्मल क्या है।

अग्ली डकलिंग नियम

एक मददगार तरीका अग्ली डकलिंग नियम है। आपके ज्यादातर तिल एक जैसे दिखेंगे। अगर कोई घाव या निशान बाकी से अलग दिखता है, तो उस पर ध्यान देना चाहिए। अक्सर उसी अजीब दिखने वाले निशान में शुरुआती मेलेनोमा छिपा होता है।

डॉक्टर को कब दिखाएं

यह जानना जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए। डॉक्टर कहते हैं कि जब तिल में बदलाव, ऐसा घाव जो ठीक नहीं हो रहा हो, नया या बढ़ता हुआ घाव हो, या निशान या पुराने घाव में कोई भी बदलाव हो, तब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जांच में देरी स्किन कैंसर का देर से पता चलने के सबसे आम कारणों में से एक है।

इलाज कैसे होता है?

स्किन कैंसर का इलाज उसके प्रकार और चरण पर निर्भर करता है। शुरुआती घावों का इलाज आमतौर पर साधारण सर्जरी से किया जाता है और इसके नतीजे बहुत अच्छे होते हैं। ज्यादा गंभीर मामलों में, खासकर मेलेनोमा के मामले में, अतिरिक्त प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ सकती है, जैसे लिम्फ नोड निकालना, रेडिएशन थेरेपी, या इम्यूनोथेरेपी जैसे नए इलाज। जितनी जल्दी बीमारी का पता चलता है, इलाज उतना ही आसान और असरदार होता है।

किसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए?

जो लोग बहुत धूप में रहते हैं, जिनकी स्किन गोरी है, जिनके बहुत तिल हैं, जिनके परिवार में स्किन कैंसर हुआ है, जिन्हें बार-बार सनबर्न होता है, या जिनके जिनके पुराने घाव लंबे समय से ठीक नहीं हो रहे हैं- उन्हें ज्यादा सावधान रहना चाहिए। लेकिन अब सांवली स्किन वालों में भी स्किन कैंसर देखा जा रहा है। इसलिए सभी को जागरूक रहना जरूरी है।

 डिस्क्लेमर: स्किन कैंसर उन कुछ कैंसरों में से एक है, जिसके शुरुआती संकेत त्वचा पर दिखाई दे सकते हैं। सवाल ये नहीं है कि हम इसे जल्दी पकड़ सकते हैं या नहीं - हम पकड़ सकते हैं। सवाल ये है कि क्या हम अपनी स्किन की बात सुन रहे हैं।