
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
एक अंगदाता कई लोगों की जान बचा सकता है। (Imge Credit: Chatgpt)
कल्पना कीजिए कि किसी अस्पताल में एक पिता अपनी बेटी के लिए नई किडनी का इंतजार कर रहा है। दूसरे वार्ड में एक मां लिवर ट्रांसप्लांट की उम्मीद में है। कहीं एक छोटा बच्चा दिल मिलने का इंतजार कर रहा है ताकि वह फिर से अपने दोस्तों की तरह दौड़-भाग सके। इन सभी लोगों की जिंदगी एक ऐसे फैसले पर निर्भर हो सकती है, जिसके बारे में हममें से ज्यादातर लोग कभी गंभीरता से सोचते ही नहीं हैं, वो है अंगदान। बहुत से लोग मानते हैं कि एक अंगदाता सिर्फ एक व्यक्ति की मदद करता है। लेकिन सच यह है कि एक अंगदाता कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। organdonor.gov की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च बताती है कि अगर कोई व्यक्ति मृत्यु के मौत के बाद अपने अंगों को दान करता है, तो इससे 1-2 नहीं बल्कि 8 लोगों की जान बच सकती है। इतना ही नहीं मृतक के शरीर के टिश्यू के दान से भी दर्जनों लोगों की लाइफ बेहतर हो सकती है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी बताती है कि जब किसी व्यक्ति का अंगदान होता है, तो उसकी दोनों किडनियां 2 अलग-अलग लोगों को नई लाइफ दे सकती हैं। लिवर किसी गंभीर मरीज को बचा सकता है, दिल किसी धड़कती उम्मीद को फिर से शुरू कर सकता है और फेफड़े किसी ऐसे व्यक्ति को नई सांसें दे सकते हैं जो हर दिन ऑक्सीजन के लिए संघर्ष कर रहा हो। इतना ही नहीं, आंखों का कॉर्निया किसी की खोई हुई रोशनी वापस ला सकता है। त्वचा, हड्डियां और अन्य ऊतक भी कई मरीजों के इलाज में मदद कर सकते हैं।
जीवित व्यक्ति 1 किडनी ट्रांसप्लांट कर सकता है।
कुछ लोगों को लगता है कि सिर्फ मृत लोग ही अंगदान कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। जिंदा रहते हुए भी व्यक्ति कई बार अपने कुछ अंगों को दान कर सकता है। आइए आगे जानते हैं इसके बारे में-
जीवित अंगदान वो होता है, जिसमें एक हेल्दी इंसान अपने लिवर का एक हिस्सा या फिर 1 किडनी को अपनी इच्छा से अपने परिवार के किसी जरूरतमंद सदस्य या दोस्त को डोनेट कर सकता है। कई लोगों को डर लगता है कि अंगदान के बाद उनकी जिंदगी डगमगा जाएगी। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। सीडीसी, WHO की रिसर्च में यह बात सामने आ चुका है कि सही जांच और देखभाल के बाद सही देखभाल से अंगदाता एक नॉर्मल लाइफ जी सकता है।
यह वो स्थिति है, जब किसी व्यक्ति को डॉक्टर द्वारा ब्रेन डेड घोषित कर दिया जाता है। ब्रेन डेड का अर्थ आसान भाषा में होता है कि व्यक्ति का दिमाग हमेशा के लिए काम करना बंद हो चुका है और वो अब दोबारा से ठीक नहीं हो सकता है। ऐसे समय में यदि परिवार अंगदान की इजाजत देता है, तो उस व्यक्ति के अंग कई जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच सकते हैं। इस स्थिति में एक परिवार अपने सबसे कठिन पल में भी कई अनजान लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है।
अंगदान का महत्व बीमारी से जूझने वाले व्यक्ति के लिए कई गुणा ज्यादा है।
डॉ. नीरव गोयल, सीनियर कंसल्टेंट (लिवर ट्रांसप्लांट और HPB सर्जरी), प्रेसिडेंट-इलेक्ट (LTSI), इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली कहते हैं- बहुत से लोग सोचते हैं कि अधिक उम्र होने पर वे अंगदान नहीं कर सकते हैं। लेकिन डॉक्टर उम्र नहीं, बल्कि अंगों की स्थिति और स्वास्थ्य को देखते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि अंगदान से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। जब किसी व्यक्ति के शरीर से अंगों को निकाला जाता है, तो उसका पूरा सम्मान भी किया जाता है। अंगों को निकालने के बाद शरीर को परिवार को मृत शरीर सही तरीके से दिया जाता है, ताकि वह उसका अंतिम संस्कार पारंपरिक तरीके से कर सकें।
डॉक्टर कहते हैं कि अंगदान सिर्फ अंग देने का नाम नहीं है, यह किसी की अधूरी कहानी को नया अध्याय देने का मौका है। एक परिवार का साहसिक फैसला कई घरों में खुशियां लौटा सकता है। और यही वजह है कि अंगदान को मानवता की सबसे खूबसूरत और निस्वार्थ सेवाओं में से एक माना जाता है।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है। अंगदान (Organ Donation) से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले डॉक्टर, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ या स्वास्थ्य संस्थान से बातचीत करें। अंगदान की पात्रता, प्रक्रिया और कानूनी नियम व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति एवं स्थानीय कानूनों के अनुसार अलग हो सकते हैं।