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Written By: Editorial Team | Published : August 21, 2018 10:45 AM IST
मानसून के दिनों में मच्छर से होने वाली कई बीमारियों जैसे मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू के होने का खतरा बढ़ जाता है। इन सभी बीमारियों के बारे में तो जानते ही हैं, लेकिन कुछ लोगों के मन में यह भी सवाल रहता है कि मच्छर काटने से एचआईवी बीमारी भी हो सकती है, पर ऐसा नहीं होता। जानते हैं क्या वाकई मच्छरों के काटने से एचआईवी रोग से लोग पीड़ित हो सकते हैं? ऐसे ही कई सवाल और उनके जवाब, जो मच्छरों के काटने से होने वाली परेशानियों से जुड़े हुए हैं।
मच्छरों के काटने से फैलता है एचआईवी?
जब हम एचआईवी जैसे जानलेवा रोग से बचने के लिए इंफेक्टेड इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं करते, तो फिर मच्छरों के काटने से भी तो एचआईवी से पीड़ित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छरों के काटने से एचआईवी नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि मच्छर के भीतर हर तरह के वायरस सरवाइव नहीं कर पाते। एड्स का वायरस मच्छरों के पेट में जिंदा नहीं रह पाता। मच्छर के पेट में खून के साथ ही एचआईवी वायरस भी डाइजेस्ट हो जाते हैं और वह पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। अगर मच्छर किसी एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति को काटता है और फिर किसी स्वस्थ व्यक्ति को भी काट लेता है, तो भी वह स्वस्थ व्यक्ति इस रोग से संक्रमित नहीं हो सकता है।
मच्छर काटते हैं तो होती है खुजली
आपने गौर किया होगा कि जब मच्छर काटते हैं, तो उस जगह पर खुजली होने लगती है। आखिर ऐसा क्यों होता है? दरअसल, मादा मच्छर जब खून पीने के लिए अपना डंक शरीर में चुभाती है तो त्वचा की ऊपरी पर्त पर छेद हो जाता है। शरीर में कहीं भी छेद या खरोंच लगने पर खून का थक्का जम जाता है। थक्का जमने पर मच्छर खून नहीं पी पाते इसलिए मच्छर अपने डंक से एक ऐसा रसायन छोड़ते हैं, जिससे खून का थक्का नहीं बनता, लेकिन इसके रिएक्शन से त्वचा पर खुजली होने लगती है और उस जगह पर लाल निशान बन जाता है।
मच्छरों को कौन सा ब्लड ग्रुप होता है पसंद
कई शोधों में यह बात सामने आई है कि मच्छर हर ब्लड ग्रुप को नहीं पचा सकते। ऐसे में वह उन्हीं लोगों को अधिक काटते हैं, जिनके खून में शर्करा की मात्रा अधिक होती है। यही वजह है कि मच्छर O ब्लड ग्रुप के लोगों को ज्यादा काटते हैं, क्योंकि उनके खून में शर्करा की मात्रा ज्यादा होती है।
पसीने से भी होते हैं आकर्षित
शोध के अनुसार, मच्छरों को पसीने की गंध भी अच्छी लगती है। पसीने की गंध पाकर वे जल्दी किसी व्यक्ति के शरीर पर काटने के लिए हमला बोलते हैं। यदि आपको पसीना अधिक आता है, तो फिर मच्छरों से संभल कर ही रहिए। जिन्हें पसीना ज्यादा आता है, मच्छर उन्हें ज्यादा काटते हैं। पसीने में लैक्टिक एसिड, यूरिक एसिड तथा अमोनिया जैसे तत्व होते हैं जो मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करते हैं।
मच्छर सिर्फ शाम में ही काटते हैं
ऐसा नहीं है कि मच्छर सिर्फ शाम के समय ही काटते हैं। ये सुबह और शाम ज्यादा सक्रिय रहते हैं। हां, कुछ मच्छर ऐसे भी होते हैं, जो दिन के समय अधिक काटते हैं। ऐसे में लापरवाही बरतनी ठीक नहीं है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.
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