
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : June 11, 2026 4:57 PM IST
Medically Verified By: Dr. Praveen Gupta
ब्रेन ट्यूमर
जिसे देखो वो सोते-जागते, खाते-पीते और ट्रेवर करते, बस फोन ही इस्तेमाल करता रहता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि फोन आजकल हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं। काम, पढ़ाई, मनोरंजन और सोशल मीडिया के लिए लोग घंटों मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कई लोगों की गर्दन में दर्द और न जाने कितनी समस्याएं भी पैदा हो जाती हैं। जिनमें से एक बीमारी को लेकर तो लोगों के मन में डर बैठा हुआ है। जी हां, कई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या लंबे समय कर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों में ब्रेन ट्यूमर का खतरा अधिक होता है?
यह जानने के लिए हमने मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS) के चेयरमैन डॉक्टर प्रवीण गुप्ता से बात की। वह बताते हैं कि “अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों में मोबाइल फोन के उपयोग और ब्रेन ट्यूमर के बीच कोई क्लीयर और डायरेक्ट संबंध स्थापित नहीं हुआ है। मोबाइल फोन रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों का उपयोग करते हैं, जो नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन की श्रेणी में आती हैं। यह एक्स-रे या गामा किरणों की तरह डीएनए को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाती।” डॉक्टर ने और क्या जानकारी दी, आइए विस्तार से जानते हैं।
डॉक्टर गुप्ता कहते हैं कि "मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडियोफ्रीक्वेंसी सिग्नल को लेकर सालों से रीसर्च हो रही हैं। अभी तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि सामान्य रूप से मोबाइल फोन का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर का कारण बन सकता है। हालांकि किसी भी नई तकनीक की तरह इस विषय पर लगातार अध्ययन जारी हैं और वैज्ञानिक समुदाय इसके लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों पर नजर रखे हुए है।"
एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना ब्रेन ट्यूमर का बड़ा कारण होता, तो पिछले 20-25 सालों में मोबाइल यूज करने वालों की संख्या बढ़ने के साथ ब्रेन ट्यूमर के मामलों में भी बढ़ोतरी दिखाई देती। लेकिन विश्व स्तर पर ऐसा कोई स्पष्ट तथ्य नहीं मिलता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग पूरी तरह सेफ है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में तनाव, नींद की समस्या, गर्दन और कंधे में दर्द, मानसिक तनाव और फोकस करने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए मोबाइल का कम इस्तेमाल करें।
डॉक्टर गुप्ता कहते हैं कि "लोग अक्सर सिरदर्द या चक्कर आने जैसी समस्याओं को मोबाइल रेडिएशन से जोड़कर देखने गलते हैं। लेकिन इन लक्षणों के पीछे तनाव, अधूरी नींद, माइग्रेन, आंखों पर दबाव या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर किसी व्यक्ति को लगातार सिरदर्द, दौरे पड़ना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में कठिनाई या देखने में समस्या जैसी शिकायतें हों तो उसे एक्सपर्ट से परामर्श लेना चाहिए।"
मोबाइल उपयोग के दौरान कुछ सावधानियां अपनाई जा सकती हैं। जैसे लंबे समय तक लगातार फोन पर बात करने के बजाय स्पीकर या ईयरफोन का इस्तेमाल करना, बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रखना, सोने से पहले फोन का कम इस्तेमाल करना और जरूरी न होने पर स्क्रीन एक्सपोजर से बचना।
डॉक्टर गुप्ता के अनुसार "आज की तारीख में लोगों को मोबाइल फोन से ब्रेन ट्यूमर होने के डर से ज्यादा अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देने की जरूरत है। पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्ट्रेस कंट्रोल दिमाग की हेल्ध के लिए बहुत जरूरी है।
डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट कहते हैं कि मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच संबंध को लेकर डर की बजाय जागरूकता की जरूरत है। अभी इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं है और डॉक्टर भी नकारते हैं। लेकिन फोन का अधिक उपयोग आपकी बॉडी पॉस्चर और आई हेल्थ को खराब कर सकता है।