
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
सिगरेट छोड़ने के बाद शरीर में कई प्रकार के बदलाव आते हैं।
साहब एक आखिरी पैकेट और फिर कल से पक्का छोड़ दूंगा। ये लाइन हर स्मोकर ने अपनी लाइफ में कम से कम सप्ताह में 10 बार जरूर बोली होगी। लेकिन जिस दिन आप आखिरी सिगरेट बुझाकर डिब्बा फेंक देते हैं, उस रात दिमाग में सिर्फ एक सवाल घूमता है: अब तक जो नुकसान कर दिया, क्या वो ठीक होगा? इस सवाल का जवाब जानने से पहले एक बात समझ लीजिए। आपके फेफड़े दीवार नहीं हैं कि एक बार दरार पड़ गई तो बस पड़ गई। वो जिंदा अंग हैं। और जिंदा चीजों में खुद को ठीक करने की ताकत होती है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि दिल्ली के द्वारका स्थित मैक्योर हॉस्पिटल के कंसलटेंट मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रतीक कादिया का कहना है। 1 अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे मनाया जाने वाला है तब हम आपको बताने जा रहे हैं सिगरेट छोड़ने के बाद लंग्स पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं या नहीं।
डॉ. प्रतीक कादिया बताते हैं कि जब आप सिगरेट या बीड़ी का धुआं अंदर लेते हैं तो 7000 से ज्यादा केमिकल आपके फेफड़ों पर हमला करते हैं। टार जमा हो जाता है, सिलिया नाम के छोटे-छोटे बाल मर जाते हैं और सूजन शुरू हो जाती है। लेकिन हमारे शरीर की खास बात यह है कि जैसे ही आप पूरी तरह से सिगरेट पीना छोड़ देते हैं, शरीर फिर से खुद को रिपेयर करने लगता है।
सिगरेट छोड़ना मुश्किल काम होता है।
सिगरेट छोड़ने के सिर्फ 20 मिनट के अंदर ही आपका शरीर खुद को रिपेयर करने का काम शुरू कर देता है। आपका हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर नॉर्मल होने लगता है। हाथ-पैर में खून का फ्लो बेहतर होने लगता है।
डॉक्टर कहते हैं कि सिगरेट छोड़ने के 12 घंटे के बाद खून में कार्बन मोनोऑक्साइड का लेवल नॉर्मल होने लगता है। इसका मतलब आपके खून में ऑक्सीजन कैरी करने की क्षमता बढ़ गई है। 12 घंटे के बाद आपको शरीर की थकान कम महसूस होने लगेगी।
सिगरेट छोड़ने के बाद शरीर पर इसका असली असर 2 सप्ताह से 3 महीने के बीच ही नजर आता है। इस रिकवरी फेज में फेफड़ों की सिलिया फिर से उगने लगती हैं। ये बालों की तरह होते हैं जो धूल, धुआं और बैक्टीरिया को बाहर धकेलते हैं। सिगरेट छोड़ने के 2 सप्ताह के बाद व्यक्ति की खांसी धीरे- धीरे कम होने लगती है, बलगम कम हो जाएगा, सांस लेने में आसानी भी होने लगेगी। इसके साथ ही व्यक्ति का चलने पर हांफना भी कम होगा।
इस सवाल के जवाब में डॉक्टर कहते हैं सिगरेट छोड़ने के 9 महीने के बाद व्यक्ति में फेफड़ों का इन्फेक्शन, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया का खतरा आधा हो जाता है। सुबह वाली स्मोकर्स कफ लगभग खत्म हो सकती है। इसके साथ ही कोरोनरी हार्ट डिजीज का रिस्क भी आधा हो जाता है। साथ ही स्ट्रोक, मुंह, गले, ब्लैडर और लंग कैंसर का रिस्क लगातार गिरता है। 10-15 साल में लंग कैंसर का रिस्क नॉन-स्मोकर के लगभग बराबर ही रह जाता है।
डॉ. प्रतीक कादिया कहते हैं कि सिगरेट पीने वाले किसी व्यक्ति को अगर कभी COPD, एम्फायसेमा या फेफड़ों में फाइब्रोसिस नहीं हुआ है, तो लंग्स काफी हद तक रिकवर कर लेते हैं। लेकिन अगर स्कार टिश्यू बन चुका है तो वो पूरी तरह नहीं जाएगा। पर अच्छी खबर ये है कि आगे का नुकसान रुक जाता है और बचा हुआ लंग टिश्यू ज्यादा मेहनत से काम करने लगता है।
सिगरेट छोड़ने पर AIIMS की रिसर्च कहती है कि जो लोग योग करते हैं उनके तंबाकू छोड़ने की संभावना 50% तक बढ़ जाती है। रिसर्च में यह बात सामने आई है कि रोजाना योग करने से मेंटल वेल-बीइंग, स्ट्रेस लेवल और स्लीप क्वालिटी बेहतर होती है, जिससे सिगरेट पीने की क्रेविंग धीरे- धीरे कम होने लगती है। आइए आगे जानते हैं योग कैसे सिगरेट छोड़ने में आपकी मदद कर सकती है?
AIIMS के डॉक्टरों का मानना है कि सिर्फ निकोटिन पैच या दवा काफी नहीं। अगर उसके साथ रोज 30 मिनट योग जोड़ दिया जाए तो सक्सेस रेट दोगुना हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं- देखिए, आपने जितने साल सिगरेट पी, उतने साल में लंग्स डैमेज हुए। तो उन्हें ठीक होने में भी समय लगेगा। लेकिन हर सांस के साथ आपके फेफड़े आपको थैंक्यू बोल रहे हैं। 10 साल बाद आपका लंग कैंसर का रिस्क नॉन-स्मोकर जितना हो सकता है। 1 साल बाद आप सीढ़ी बिना रुके चढ़ जाएंगे। 3 महीने बाद आपकी खांसी बंद हो जाएगी।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आपक सिगरेट छोड़ना चाहते हैं तो इस पर न सिर्फ खुद काम करें बल्कि इस बारे में अपने डॉक्टर से भी बात करें।