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क्या 2047 मेंटली और फिजिकली फिट बन पाएगा भारत? किन-किन बातों का रखना होगा ध्यान?

भारत को विकसित देश बनने से पहले एक फिट और स्वस्थ देश बनना होगा, क्योंकि जब भारत का युवा फिट और हेल्दी होगा तभी भारत 2047 तक फिट कंट्री कैसे बन पाएगा। कुछ रिसर्चों को आधार बनाकर इस लेख में हम इसी बारे में चर्चा करेंगे।

Written By Mukesh Sharma
Published : June 16, 2026 9:12 PM IST

fit india 2047 (AI generated image)

हम भारतीय का सपना अपने देश को एक विकसित देश के रूप में देखने का है और उसी सपने को पूरा करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 2047 तक एक विकसित देश बनाने का रखा है। लेकिन अक्सर मन में यह सवाल आता है, कि भारत 2047 तक एक विकसित देश तो बन जाएगा लेकिन क्या एक फिट और हेल्दी देश भी बना पाएगा? भारतीयों में हेल्थ को लेकर अभी भी बहुत परेशानियां हैं और बहुत ही कम लोग उसे समझ पा रहे हैं। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि भारत में एक तरह का हेल्थ क्राइसिस चल रहा है और भारत को डायिटीज कैपिटल के नाम से तो जाना ही जाता है। अगर आज के युवाओं का स्वास्थ्य कम उम्र में ही खराब होने लगा है, तो देश को आगे कौन बढ़ाएगा? क्योंकि एक बीमार व्यक्ति सिर्फ देश के हेल्थ सिस्टम पर बोझ बन सकता है, उसकी कभी मदद नहीं कर सकता। लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत 2047 तक फिट और स्वस्थ देश नहीं बन ही नहीं पाएगा, बस हमें कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा।

सिर्फ फिजिकली फिट नहीं बल्कि मेंटली फिट भारत

किसी भी देश को आगे बढ़ाने और उसकी इकोनॉमी को उठाने में सबसे ज्यादा हाथ उस देश के युवाओं का होता है। लेकिन अगर युवा ही बीमार पड़ जाएंगे तो देश किसी भी विकासशील देश के लिए एक विकसित देश बनना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। Pubmed की एक स्टडी के अनुसार कम उम्र के भारतीयों में खराब लाइफस्टाइल के कारण हाई बीपी के मामले काफी बढ़ रहे हैं। Pubmed की ही एक और दूसरी स्टडी के अनुसार भारत में कम उम्र के लोगों में मोटापा और उससे होने वाली बीमारियां बढ़ रही हैं। वहीं Springer Natural Link की एक स्टडी अनुसार भारतीयों में हार्ट से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ रहा है।

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2047 तक कैसे एक फिट कंट्री बनेगा भारत

हम भारतीयों को किसी काम को करने के जुनून के के लिए जाना जाता है और अब वही जुनून हर भारतीय को अपनी हेल्थ के लिए भी रखना है और भारत को एक फिट और हेल्दी देश बनाने के लिए हर किसी को अपना योगदान देना है।

मानसिक और फिजिकल दोनों हेल्थ जरूरी - भारतीयों को समझना होगा कि जिस प्रकार शरीर की बीमारियों को गंभीरता से लेना होता है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य की बीमारियों को गंभीरता से लेना भी बहुत जरूरी है। Pubmed की वेबसाइट पर पब्लिश की गई एक स्टडी के अनुसार मानसिक तनाव शरीर के अंदर इन्फ्लेमेशन को बढ़ाता है, जिससे कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ता है। इसलिए भारतीयों को सिर्फ फिजिकल हेल्थ नहीं बल्कि मेंटल हेल्थ का ध्यान भी रखना होगा।

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डाइट से कभी भी समझौता न करें - हम भारतीयों को यह लगता है कि हमारा खाना दुनिया में सबसे बेस्ट है, लेकिन क्या यह सच है? स्वाद में? हां और न्यूट्रिश्न में? नहीं। Pubmed की वेबसाइट पर पब्लिश की गई रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अपने प्रोटीन का लगभग 60% प्रतिशत हिस्सा अनाज आदि से लेते हैं, जिसकी न तो क्वालिटी अच्छी होती है और न ही व अच्छे से पचता है। इसलिए भारतीयों को अपनी डाइट का भी खासतौर पर ध्यान रखना होगा।

नींद की कुर्बानी देना आज ही बंद करें - यह मैसेज सीधा युवा भारतीयों के लिए है, जो रात को देर-देर तक जागते हैं। नींद हमारे लिए सबसे कम महत्वपूर्ण चीज बनती जा रही है, जबकि नींद ही आपकी बॉडी का एक रिसेट बटन होता है। साइंस डायरेक्ट की एक स्टडी के अनुसार भारतीयों के लगातार खराब हो रहे लाइफस्टाइल का असर उनकी नींद पर भी पड़ रहा है, जिससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

डिजीटल स्क्रीन है युवा पीढ़ी की बड़ी दुश्मन

बाकी देशों की तरह भारत में भी बच्चों और युवा जनरेशन के लिए डिजीटल स्क्रीन एक जेल बनती जा रही है, लेकिन भारत में यह दिक्कत है कि पेरेंट्स ध्यान नहीं दे रहे हैं। Springer Nature Linkकी एक स्टडी के अुसार भारतीयों में फोन का इस्तेमाल काफी बढ़ रहा है, जिसका असर उनकी स्लीप क्वालिटी पर पड़ रहा है। लगातार खराब हो रही स्लीप क्वालिटी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई बीमारियां पैदा कर सकती है।

2047 में भारत कैसा होगा यह आज के युवा के हाथ में है, आज का युवा जब अपने स्वास्थ्य के लिए जागरूक होगा तभी कल को वह अपने देश और अपने परिवार की सेवा कर पाएगा।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल भारतीयों में स्वास्थ्य से लेकर बढ़ रही बीमारियों से जुड़ी जानकारी देना है और इसमें प्रमुख जानकारियां स्टडी पर निर्भर करती है। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं किया जाना चाहिए। बल्कि इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।