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क्या अगरबत्ती के धुंए से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है? जानिए क्या कहती है रिसर्च और डॉक्टर की राय

पूजा के समय ज्यादातर भारतीय घरों मं अगरबत्ती जलती है। ऐसे में अक्सर लोग सवाल करते हैं कि क्या लंबे समय तक अगरबत्ती के धुएं के संपर्क में रहने से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है?

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Written By: Ashu Kumar Das | Updated : June 30, 2026 10:39 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Naveen Sanchety

हमारे देश में अगरबत्ती जलाना परंपरा का हिस्सा रहा है। पूजा-पाठ, ध्यान और पॉजिटिव माहौल बनाने की जब बात आती है तो अक्सर लोग अगरबत्ती का इस्तेमाल करते हैं। अगरबत्ती बेशक से पूजा- पाठ की परंपरा का हिस्सा हो, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह सवाल बार-बार उठने लगा है कि क्या अगरबत्ती का धुआं फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है? और घरों में रोजाना अगरबत्ती जलाने से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है? आज इस आर्टिकल में जानेंगे अगरबत्ती के धुएं से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है इस पर रिसर्च का क्या पहलू है और डॉक्टर क्या कहते हैं?

क्या अगरबत्ती के धुंए से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है?

फरीदाबाद के सेक्टर- 8 स्थित सर्वोदय अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. नवीन संचेती बताते हैं कि इस सवाल का जवाब सीधा "हां" या "नहीं" में देना आसान नहीं है। अब तक हुई रिसर्च बताती है कि अगरबत्ती के धुएं में कुछ ऐसे केमिकल्स निकलते हैं, जो लंबे समय तक सांस के जरिए शरीर के अंदर जाए तो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। National Center for Biotechnology Information (NCBI) की रिसर्च का हवाला देते हुए डॉक्टर बताते हैं- जब पूजा या कमरे में खुशबू लाने के लिए आप अगरबत्ती का इस्तेमाल करते हैं तो इससे सिर्फ खुशबू ही नहीं निकलती, बल्कि कई तरह के छोटे- छोटे कण और गैस भी हवा में निकलती हैं। इन छोटे कणों में मुख्य रूप से PM2.5 और PM10, कार्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन, फॉर्मल्डिहाइड शामिल होता है। इन छोटे-छोटे कणों के संपर्क में लंबे समय तक रहा जाए तो इससे सांस की बीमारी होने का खतरा रहता है। पर यह कहना है कि सिर्फ अगरबत्ती या धूपबत्ती से निकलने वाले धुएं से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है तो यह बात पूरी तरह से गलत है।

अगरबत्ती के धुएं से कैंसर पर क्या कहती है रिसर्च?

IARC द्वारा की गई रिसर्च बताती है कि घर के अंदर अगरबत्ती जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। खासकर बंद कमरे में लगातार अगरबत्ती जलाने से PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों का स्तर तेजी से बढ़ता है। इससे छोटे- छोटे फेफड़ों के अंदर तक जा सकते हैं। रिसर्च में यह बात सामने आई है कि लंबे समय तक अगरबत्ती के धुएं के संपर्क में रहने से सांस की बीमारी हो सकती है। हालांकि इसका कैंसर से कोई सीधा कनेक्शन नहीं पाया गया है।

अगरबत्ती जलाते समय किन्हें ध्यान रखना चाहिए?

डॉ. नवीन संचेती कहते हैं कि घर के अंदर अगरबत्ती जलाना परंपरा का हिस्सा है, लेकिन कुछ लोगों को अगरबत्ती जलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं-

  1. अस्थमा का मरीज है
  2. COPD की समस्या है
  3. छोटे बच्चे हैं
  4. प्रेग्नेंट महिलाएं

रिसर्च और डॉक्टर के साथ बातचीत के आधार पर यानी फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अगरबत्ती जलाने से सीधे फेफड़ों का कैंसर हो जाता है, लेकिन लंबे समय तक खराब वेंटिलेशन वाले कमरे में लगातार धुएं के संपर्क को सुरक्षित भी नहीं माना जा सकता है। किसी व्यक्ति को फेफड़ों के कैंसर होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इसमें वायु प्रदूषण, सिगरेट जैसी चीजें भी शामिल हैं।