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World Thyroid Day 2022: थायराइड (Thyroid) आपकी गर्दन में एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है। ग्रंथि एक अंग है जो एक पदार्थ बनाता है, जिसे हार्मोन (hormones) कहते हैं। ये हार्मोन आपके शरीर को काम करने में मदद करता है। जैसे कि,हार्मोन आपकी हृदय गति यानी कि आपका दिल कितनी तेजी से धड़कता है और आपके चयापचय यानी कि आपका शरीर कितनी अच्छी तरह और तेजी से आपके खाने और पीने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है इन सब कामों में एक बड़ी भूमिका निभाता है। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है जब ये थायराइड ग्रंथि कुछ हार्मोन का बहुत अधिक या बहुत कम बनाती है। जब ऐसा होता है, तो आपको थायराइड डिसऑर्डर (Thyroid Disease) होता है। महिलाओं में जब थायराइड की समस्या होती है तो ये गर्भावस्था को भी प्रभावित करने लगता है। कैसे? आइए डॉक्टर से जानते हैं।
लखनऊ अपोलो क्लीनिक की डॉ. श्वेता शर्मा (MBBS, MD, Gynecologist) कहती हैं कि महिलाओं में खराब लाइफस्टाइल के कारण आज कल थायराइड की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में प्रेगनेंसी की बात करें तो ये दो तरीके से होता है। जिन महिलाओं में पहले से ही थायराइट की समस्या होती है उनमें ये प्रेगेनेंसी के दौरान कई समस्याओं का कारण बनता है। दूसरा कई बार प्रेगनेंसी के बाद महिलाओं में यह समस्या हो जाती है। इसके अलावा हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) यानी कि थायराइड का बढ़ना और हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) यानी कि थायराइड का कम होना, महिलाओं को और प्रेगनेंसी की स्थिति को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है।
डॉ. श्वेता की मानें तो, हाइपरथायरायडिज्म बांझपन और गर्भावस्था के नुकसान से जुड़ा है। थायराइड हार्मोनका ज्यादा प्रोडक्शन कुछ हार्मोनल गड़बड़िया पैदा करने के साथ कई ऐसी स्थितियां का कारण बनता है जिससे गर्भपात का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा भी प्रेगनेंसी में थायराइड के कई नुकसान हो सकते हैं।
प्रीक्लेम्पसिया तब होता है जब प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है। ये 20वें सप्ताह के बाद या जन्म देने के बाद हो सकती है। इसके कारण कई बार गुर्दे और लिवर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाते और इसका असर पेट में पल रहे बच्चे पर होता है। साथ ही यह मां के दिल पर दबाव डाल सकता है और गर्भावस्था के दौरान समस्याएं पैदा कर सकता है।
यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें जन्म से पहले प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है। प्लेसेंटा आपके गर्भाशय में बढ़ता है और गर्भनाल के माध्यम से बच्चे को भोजन और ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है।
प्रेगनेंसी में थायराइड की समस्या होने पर कई बार समय से पहले जन्म (Premature birth) की समस्या हो जाती है। साथ ही ऐसे बच्चों में घेंघा रोग (goiter) होने की संभावना भी ज्यादा होती है।
पलमोनरी हाइपरटेंशन वो हाई ब्लड प्रेशर है जो आपके फेफड़ों में और आपके दिल के दाहिनी ओर धमनियों में होता है। ये प्रेगनेंसी के दौरान थायराइड की समस्या होने पर होने लगता है और मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।
ग्रेव्स रोग का कारण बनने वाले एंटीबॉडी गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा को पार कर जाते हैं। अगर आपको गर्भावस्था के दौरान ग्रेव्स रोग है, तो आपके बच्चे को जन्म के दौरान और बाद में थायराइड की स्थिति होने का खतरा है।
प्रेगनेंसी में थायराइड की समस्या होने पर कई बार बच्चों में छोटी हाइट और कम वेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे बच्चे अंडरवेट हो सकते हैं या सामान्स से भी कम इनकी हाइट हो सकती है।
तो, जरूरी ये है कि महिलाएं थायराइड से बचावकी कोशिश करें। इसके लिए डाइट और लाइफस्टाइल को सही करें। एक्सरसाइज करें, वेट सही रखें और स्ट्रेस कम लें। इसके अलावा प्रेगनेंसी में अगर आपको थायराइड की समस्या है तो, डॉक्टर के कंसलेट के साथ अपना खास ध्यान रखें।