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हाइपरटेंशन, हाई ब्लड प्रेशर के लिए प्रयोग होने वाली मेडिकल टर्म है। इसका मतलब है आपका ब्लड प्रेशर 140/90 mm hg या इससे ज्यादा रहता है। हाइपरटेंशन की स्टेज एक तब आती है जब सिस्टॉलिक बीपी 140 से 159 mm hg के बीच और डायस्टॉलिक बीपी 90 से 99 mm hg के बीच रहता है। इसकी दूसरी स्टेज तब आती है जब सिस्टॉलिक बीपी 160 mm hg से ऊपर और डायस्टॉलिक बीपी 100 mm hg से ऊपर चला जाता है। जब ब्लड प्रेशर 130/85 से कम हो तो उसे सामान्य माना जाता है। जब यह सिस्टॉलिक बीपी 130/139 और डायस्टॉलिक बीपी 85/90 mm hg के बीच हो तो इसे हाई नॉर्मल माना जाता है। आज के समय में बढ़ता हुआ ब्लड प्रेशर एक चिंता का विषय है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है ब्लड प्रेशर के बढ़ने से हम घिर जाते हैं। 60 से 69 साल के लोगों में इसका रिस्क 50% ज्यादा तो 70/75 साल के लोगों में इसका रिस्क 75% ज्यादा बढ़ जाता है। जो लोग 55 या 60 साल तक की उम्र में हाइपरटेंसिव नहीं रहे हैं उनका बाद में इस रोग से पीड़ित होने का रिस्क 90% रहता है।
जब बिना कारण के ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है तो इसे सिस्टेमेटिक हाइपरटेंशन कहते हैं और जब कारण का पता होता है तो उसे सेकेंडरी हाइपरटेंशन कहा जाता है। लगभग 90% केस प्राइमरी हाईपरटेंशन के मिलते हैं जहां इसका कारण अज्ञात होता है। इसके उम्र और जेनेटिक जैसे कारण भी हो सकते हैं जिस पर हमारा कोई वश नहीं चलता। कुछ अन्य रिस्क फैक्टर में धूम्रपान, मोटापा, शारीरिक गतिविधि न करना, स्ट्रेस, ज्यादा शराब पीना आदि होते हैं।
प्राइमरी हाईपरटेंशन का कोई इलाज नहीं है। हालांकि आपका लाइफस्टाइल और ब्लड प्रेशर को कम करने की दवाइयां इसे नॉर्मल रहने में मदद कर सकती हैं। हाइपरटेंशन में दवाइयों का सेवन करना जरूरी होता है। लाइफस्टाइल में बदलाव करना भी बेहद जरूरी होता है। अगर लाइफस्टाइल पर ध्यान न दिया जाए तो दवाइयों का असर भी देखने को नहीं मिलने वाला।
आप अपनी लाइफस्टाइल में यह बदलाव कर सकते हैं:
अगर हाइपर टेंशन को ठीक नहीं किया जाए तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे साइलेंट किलर के नाम से जाना जाता है। यह शरीर के कई ऑर्गन को डेमेज कर सकता है जैसे किडनी, आंख, लिवर आदि। हाइपरटैंसिव इमरजेंसी एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें सिस्टॉलिक बीपी 180 mm hg से ज्यादा हो जाता है और डायस्टॉलिक बीपी 120 mm hg से ज्यादा बढ़ जाता है। यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है और एक्यूट हार्ट फेलियर जैसी स्थिति भी इसके कारण देखने को मिल सकती है। अगर लाइफस्टाइल को मेंटेन करके रखें तो हाइपर टेंशन के साथ भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है।
एंजायटी से लंबे समय तक हाइपरटेंशन देखने को मिल सकता है। एंजायटी के बार बार दोहराव आपके ब्लड प्रेशर में और ज्यादा बढ़ाव ला सकते हैं। इन दोहराव से ब्लड वेसल, हार्ट और किडनी डेमेज भी हो सकते हैं। जो लोग ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं वह अन हेल्दी आदतों जैसे धूम्रपान, शराब का सेवन करना और ज्यादा जंक फूड खाना जैसी आदतों में शामिल हो सकते हैं।
13 साल से कम उम्र के बच्चों का ब्लड प्रेशर तब नॉर्मल माना जाता है जब सिस्टॉलिक और डायस्टॉलिक ब्लड प्रेशर उसी उम्र के बच्चों से 90% कम हो। जब एक उम्र, जेंडर और हाइट के बच्चों से बच्चे का सिस्टॉलिक और डायस्टॉलिक ब्लड प्रेशर 95% ज्यादा हो तो उसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है। छोटे बच्चों के लिए 98/52 के बीपी को नॉर्मल माना जाता है। 3 से 5 साल की उम्र के बच्चों का प्रेशर जब 100/55 से ज्यादा हो और 6 से 12 साल की उम्र के बच्चों का बीपी जब 105/66 या इससे ज्यादा हो।
(Inputs By: Dr. Santosh Kumar Dora, Senior Cardiologist, Asian Heart Institute, Mumbai)