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क्या लंबे समय से हार्मोनल इंबैलेंस गर्भाशय कैंसर का कारण बन सकता है? क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

हार्मोन इंबैलेंस आज के समय में एक आम समस्या बनती जा रही है, लेकिन इसे सामान्य समझने की गलती नहीं की जानी चाहिए। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हार्मोन असंतुलन कई अलग-अलग स्थितियों में गर्भाशय व ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : July 9, 2026 7:35 PM IST

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Medically Verified By: Dr Meera V V Ragavan

हार्मोनल असंतुलन महिलाओं में कई तरह के कैंसर के बढ़ने का कारण बन सकता है, जिसमें एंडोमेट्रियल कैंसर (गर्भाशय कैंसर) के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर आदि भी शामिल है। खासतौर पर जिन महिलाओं का वजन ज्यादा बढ़ा हुआ है या फिर उनका मेनोपॉज हो चुका है, उसके बाद उनके शरीर में मौजूद फैट टिश्यू से जो जरूरत से ज्यादा एस्ट्रोजन बनता है, उससे एंडोमेट्रियल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और यूटेराइन कैंसर जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। डॉ. मीरा वी. वी. राघवन, कंसल्टेंट यूरो-गाइनेकोलॉजिस्ट एंड रोबोटिक, अपोलो हॉस्पिटल चेन्नई के अनुसार, ऐसा इसलिए क्योंकि यह अतिरिक्त एस्ट्रोजन उन ऊतकों को लगातार उत्तेजित करता रहता है जो एस्ट्रोजन के प्रति संवेदनशील होते हैं। परिणामस्वरूप, इन ऊतकों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और समय के साथ कैंसर का रूप ले सकती हैं।

पीसीओएस से बढ़ता कैंसर का खतरा

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से पीड़ित महिलाओं में भी एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस स्थिति में लंबे समय तक नियमित मासिक धर्म नहीं होते हैं, जिससे गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) पर एस्ट्रोजन असंतुलित होकर प्रभाव बनाता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ने के साथ-साथ कई बार लंबे समय तक इनफर्टिलिटी की समस्या भी बढ़ने लगती है। इसलिए, PCOS केवल अनियमित पीरियड्स की समस्या नहीं है। यह इस बात का भी संकेत है कि बढ़ता हुआ वजन भविष्य में कई मेटाबॉलिक समस्याओं का कारण बन सकता है और स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम में डाल सकता है।

खानपान से जुड़ी चीजें भी बढ़ा सकती है खतरा

इसके अलावा एनिमल प्रोटीन, माइक्रोप्लास्टिक्स और एंडोक्राइन-डिसरप्टिव केमिकल्स भी शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। ये केमिकल प्लास्टिक के स्टोरेज कंटेनर्स, कुछ डेयरी उत्पादों और समुद्री खाद्य पदार्थों में पाए जा सकते हैं। ये शरीर में उपलब्ध एस्ट्रोजन की मात्रा को बढ़ा सकते हैं, जिससे लंबे समय में एंडोमेट्रियल या गर्भाशय कैंसर होने का जोखिम बढ़ सकता है। तो यदि सवाल यह है कि क्या हार्मोनल असंतुलन एंडोमेट्रियल कैंसर का कारण बन सकता है, तो इसका जवाब होगा हां।

कुछ प्रकार की दवाएं व ट्रीटमेंट

टेमोक्सीफेन (Tamoxifen) जैसी कुछ प्रकार की दवाओं के इस्तेमाल से भी कैंसर के खतरे जुड़े हो सकते हैं। टेमोक्सीफेन का इस्तेमाल हार्मोन असंतुलन से जुड़े ब्रेस्ट कैंसर कैंसर के इलाज में किया जाता है, लेकिन इसका गर्भाशय की अंदरूनी परत पर हल्का उत्तेजक प्रभाव भी होता है। यदि इस दवा का सेवन करने वाली किसी महिला को रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव (पोस्टमेनोपॉजल ब्लीडिंग) होने लगे, तो सबसे पहले एंडोमेट्रियल कैंसर की संभावना की जांच की जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हार्मोनल असंतुलन वास्तव में गर्भाशय या एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है।

लंबे समय तक हार्मोन असंतुलन रहना कितना खतरनाक

डॉ. मधुप्रिया आर. जी. एस., सीनियर कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, अपोलो स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वनगरम, चेन्नई के अनुसार लंबे समय तक हार्मोनल असंतुलन, विशेष रूप से जब शरीर में लंबे समय तक एस्ट्रोजन हार्मोन हाई लेवल में रहता है और उसे संतुलित करने के लिए पर्याप्त प्रोजेस्टेरोन नहीं भी नहीं होता तो यह गर्भाशय यह एंडोमेट्रियल कैंसर का जोखिम कारक बन सकता है।

लंबे समय तक हाई एस्ट्रोजन रहना खतरनाक

जब लंबे समय तक एस्ट्रोजन का स्तर अधिक बना रहता है और उसे संतुलित करने के लिए पर्याप्त प्रोजेस्टेरोन हार्मोन भी नहीं होता तो इस स्थिति को "अनऑपोज़्ड एस्ट्रोजन" कहा जाता है। यह स्थिति गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) की कोशिकाएं अत्यधिक बढ़ने लगती हैं। इससे एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया नामक एक प्रीकैंसरस अवस्था विकसित हो सकती है। यदि समय पर इसका पता न चले और समय रहते इलाज शुरू न किया जाए, तो आगे चलकर यह एंडोमेट्रियल कैंसर का रूप ले सकती है।

कैसे विकसित होती है अनअपोज्ड एस्ट्रोजन कंडीशन

शरीर का वजन बहुत ज्यादा बढ़ जाना यानी मोटापा (ओबेसिटी) इसका एक मुख्य कारण माना जाता है। शरीर में मौजूद फैट टिश्यू अन्य हार्मोनों को एस्ट्रोजन में परिवर्तित कर देता है, जिससे लंबे समय तक एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ा रहता है। यह विशेष रूप से रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद अधिक देखा जाता है, क्योंकि उस समय अंडाशय (ओवरी) प्रोजेस्टेरोन बनाना बंद कर देता है। वहीं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में भी अक्सर ओव्यूलेशन नियमित रूप से नहीं होता या बिल्कुल नहीं होता। यही कारण है कि शरीर में प्रोजेस्टेरोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता है और शरीर लंबे समय तक अनअपोज्ड एस्ट्रोजन के प्रभाव में रहता है।

कुछ अन्य कारक भी हैं जो प्रभावित कर सकते हैं

इसके अलावा, कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होना (अर्ली मेनार्के) या मेनोपॉज़ देरी से शुरू होना आदि भी जोखिम बढ़ाते हैं, क्योंकि इससे शरीर लंबे समय तक मासिक चक्र और एस्ट्रोजन के प्रभाव में रहता है। ऐसी महिला जिसने कभी गर्भधारण न किया हो (नलिपैरिटी), यह भी कुछ मामलों में एंडोमेट्रियल कैंसर का एक जोखिम कारक बन सकता है।

एस्ट्रोजन से जुड़ी हार्मोन थेरेपी

केवल एस्ट्रोजन आधारित हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Estrogen-only Hormone Replacement Therapy) भी जोखिम बढ़ा सकती है, हालांकि, आजकल इसका उपयोग बहुत कम किया जाता है। ठीक इसी तरह जैसे ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा टेमोक्सीफेन गर्भाशय की अंदरूनी परत पर एस्ट्रोजन जैसा प्रभाव डालती है। इसलिए इससे भी एंडोमेट्रियल कैंसर का जोखिम कुछ हद तक बढ़ सकता है। हालांकि, जिन मरीजों को यह दवा दी जाती है, उनकी नियमित रूप से डॉक्टरों द्वारा निगरानी की जाती है और आवश्यक सावधानियां बरती जाती हैं।

एंडोमेट्रियम की परत को समझना जरूरी

डॉ. निवेथा भारती, सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट, अपोलो स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वानगरम, चेन्नई ने बताया कि गर्भाशय की अंदरूनी परत को एंडोमेट्रियम कहा जाता है, जो हार्मोनों के प्रति बहुत संवेदनशील होती है। हर महिला के शरीर में मुख्य रूप से दो सेक्स हार्मोन होते हैं जिन्हें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के नाम से जाना जाता है। एस्ट्रोजन वह हार्मोन है जो एंडोमेट्रियम की परत को बढ़ने में मदद करता है, जबकि प्रोजेस्टेरोन उस वृद्धि को नियंत्रित रखने का काम करता है।

सरल शब्दों में समझें तो जब लंबे समय तक एस्ट्रोजन अकेले काम करता रहता है और उसे संतुलित करने के लिए पर्याप्त प्रोजेस्टेरोन नहीं होता, तो गर्भाशय की अंदरूनी परत जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगती है। इस स्थिति को एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया कहा जाता है, जिसका अर्थ है एंडोमेट्रियम की असामान्य या अत्यधिक वृद्धि। इस अवस्था में समय पर पर्याप्त मात्रा में प्रोजेस्टेरोन देकर उपचार करना आवश्यक होता है। यदि उचित उपचार न मिले, तो आगे चलकर यह एंडोमेट्रियल कैंसर में बदल सकता है।

सामान्य कंडीशन जो एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम बढ़ाती हैं

मोटापा (ओबेसिटी), पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), अनियमित मासिक धर्म और मेनोपॉज के बाद केवल एस्ट्रोजन आधारित हार्मोन थेरेपी शामिल हैं। इसलिए, यदि किसी महिला को पेरिमेनोपॉज या पोस्ट मेनोपॉज के दौरान असामान्य रक्तस्राव (एबनॉर्मल ब्लीडिंग) हो, तो उसे बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। हार्मोनल संतुलन बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, और समय पर पहचान तथा उपचार से जीवन बचाया जा सकता है।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य गर्भाशय कैंसर के खतरों के बारे में जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।