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क्या हेपेटाइटिस सी से लीवर कैंसर का खतरा बढ़ता है?

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : September 25, 2018 8:07 AM IST

हेपेटाइटिस सी हेपेटाइटिस सी वायरस के कारण होने वाली लीवर की बीमारी है। यह दोनों एक्यूट और क्रोनिक हेपेटाइटिस को जन्म दे सकती है। इससे आप कुछ हफ़्तों या आजीवन पीड़ित रह सकते हैं। यह वायरस ब्लड में होता है और बाद में इन्फेक्शन का कारण बनता है।

लीवर सिरोसिस को विकसित होने में 20 या और ज्यादा समय लग सकता है इस दौरान लीवर कि हेल्थी सेल्स स्कार टिश्यू के साथ बदल सकती हैं। इन स्कार के विकसित होने के दौरान लाइव नई सेल्स को बनाने की कोशिश करता है। हालांकि, नई सेल्स को बनाने की इस प्रक्रिया में लीवर कैंसर की संभावना बढ़ सकती है क्योंकि सेल्स की संख्या अधिक हो जाती है, इससे म्यूटेशन की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर ट्यूमर के पीछे यही कारण है। यह इस बीमारी का एक और कमजोर पक्ष है। वो यह है कि जिन लोगों में क्रोनिक एचसीवी इन्फेक्शन विकसित होता है, ऐसी स्थिति में इन्फेक्शन के बाद भी कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं। हालांकि बाद में ही इसके लक्षण नजर आते हैं, तब तक स्थिति ख़राब हो चुकी होती है और लीवर कैंसर का खतरा होता है। एचसीवी का समय 2 हफ्ते से 6 महीने तक का होता है। जब लक्षण नजर आने लगते हैं, तो व्यक्ति को बुखार, थकान, भूख, मतली, उल्टी, पेट दर्द, गहरा मूत्र, ग्रे रंग का मल, जोड़ों में दर्द, और पीलिया आदि कि समस्या होने लगती है।

एक बार जब क्रोनिक हेपेटाइटिस सी इन्फेक्शन के निदान की पुष्टि हो जाती है, तो व्यक्ति को लीवर डैमेज (फाइब्रोसिस और सिरोसिस) की स्थिति का भी मूल्यांकन करना चाहिए। हेपेटाइटिस सी तनाव के जीनोटाइप को पहचानने के लिए एक लैब टेस्ट भी किया जा सकता है। इस रोग का उपचार और बचाव लीवर डैमेज और वायरस जीनोटाइप की डिग्री पर आधारित है।

आंकड़ों की माने तो भारत में लगभग 52 लाख लोग वायरल हैपेटाइटिस से प्रभावित हैं। इस संख्या में 6 से 12 मिलियन लोग केवल हेपेटाइटिस सी से पीड़ित हैं। यह लीवर से जुड़ी बीमारी है जिसका सही समय पर इलाज नहीं कराने से लीवर कैंसर का खतरा होता है। अध्ययनों के अनुसार, एचसीवी वाले हर 100 लोगों में 1 से 5 लोग लीवर सिरोसिस या लीवर कैंसर से मर जाते हैं।