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Kya Kala Motiyabind se Hone wale Andhepan ko roka jaa sakta hai: सोचिए एक दिन आप सुबह उठें और महसूस करें कि आपको चीज़ें पहले जैसी साफ दिखाई नहीं दे रहीं। खिड़की के ऊपर रखी हुई चीज जो रात को साफ दिख रही थी, सुबह धुंधली लगने लगें या किनारों से दिखाई देना कम हो जाए। यह सुनने में डरावना लगता है, लेकिन यही हकीकत है ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) की।
काला मोतियाबिंद को आंखों की दुनिया में “Silent Thief of Sight” यानी नजर चुराने वाला चोर कहा जाता है। क्योंकि यह धीरे-धीरे आपकी आंखों की रोशनी छीनता है और शुरुआत में कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देता। जब तक व्यक्ति को पता चलता है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। राहत की बात ये है कि काला मोतियाबिंद के लक्षणों को शुरुआत में रोक लिया जाए तो इससे होने वाले अंधेपन से बचा जा सकता है।
नेत्र आई सेंटर की आई सर्जन डॉ. प्रियंका सिंह (Dr Priyanka Singh, Consultant & Eye Surgeon, Neytra Eye Centre) बताती हैं कि काला मोतियाबिंद की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह चुपचाप आपकी आंखों को नुकसान पहुंचाता है। जब मरीज को लगता है कि अब देखने में परेशानी है, तब तक 60- 70% तक आंखों की नसों को नुकसान हो चुका होता है।
डॉ. प्रियंका के अनुसार, इस सवाल का सीधा सा जवाब है हां। काला मोतिया से हुए नुकसान को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन अगर समय रहते इसका पता चल जाए तो आगे होने वाले नुकसान को धीरे- धीरे रोका जा सकता है। उदाहरण के लिए किसी घर में पाइप से पानी रिसने लगे और समय पर ठीक कर लिया जाए, तो पूरा घर खराब होने से बच जाता है। ठीक वैसे ही शुरुआती स्टेज में काला मोतिया पकड़ में आ जाए तो इलाज से रोशनी बचाई जा सकती है।
काला मोतिया का इलाज करने के लिए डॉक्टर विभिन्न प्रकार के तरीकों को अपनाते हैं।
इन सबमें जरूरी है आंखों की समय पर जांच होना। अगर किसी व्यक्ति की आंखों की जांच हो जाती है तो काला मोतिया का इलाज पूरी तरह से संभव है। इलाज सही समय पर शुरू होने से काला मोतिया से होने वाले अंधेपन को पूरी तरह से रोका जा सकता है।
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Glaucoma[/caption]
डॉ. प्रियंका कहती हैं कि काला मोतिया के लक्षण शुरुआती और मध्यम चरण में नहीं दिखते है। जब किसी व्यक्ति की आंखों की नसों को 60 फीसदी तक नुकसान पहुंच चुका होता है तब वो डॉक्टर के पास जाते हैं। ऐसे में रूटीन आई एग्जाम से डॉक्टर आंखों का दबाव, ऑप्टिक नर्व और विजन फील्ड की जांच करके काला मोतिया को शुरुआती स्टेज में पता किया जा सकता है। यही कारण है कि रेगुलर बेसिस पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार आंखों की जांच बहुत ज्यादा जरूरी है।
आपको काला मोतिया जैसी आंखों की बीमारी है या नहीं इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर कई प्रकार के मेडिकल टेस्ट करवाते हैं। इन टेस्ट में शामिल हैं
खास बात ये है कि काला मोतिया का पता लगाने के लिए जो भी मेडिकल टेस्ट होते हैं वो पूरी तरह से पेनलेस यानी की बिना दर्द के होते हैं। इसलिए हर किसी को साल में एक बार ये टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
डॉ. प्रियंका सिंह के अनुसार, काला मोतिया की सबसे बड़ी दवा है समय पर जांच। जितना जल्दी पकड़ में आएगा, इलाज उतना आसान होगा।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।