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Glaucoma Treatment: आंखें हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। लेकिन, आंखों से जुड़ी कई बीमारियां ऐसी हैं, जो धीरे-धीरे दृष्टि को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है ग्लूकोमा। इसे दुनियाभर में अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। चिंता की बात यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, इसलिए कई लोगों को इसके बारे में पता ही तब चल पाता है, जब आंखों को काफी नुकसान हो चुका होता है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या ग्लूकोमा को रिवर्स किया जा सकता है? क्या ग्लूकोमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है। इन सवालों के जवाब हमने विश्व ग्लूकोमा वीक (World Glaucoma Week) के मौके पर हुए AbbVie मीडिया कॉन्क्लेव के दौरान Dr. Shroff's Charity Eye Hospital, नई दिल्ली की एसोसिएट मेडिकल डायरेक्टर और हेड ऑफ ग्लूकोमा सर्विस डॉ. सुनीता दुबे से बातचीत की-
आपको बता दें कि विश्व ग्लूकोमा वीक हर साल 8 से 14 मार्च तक मनाया जाता है। आपको बता दें कि ग्लूकोमा आंखों से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें आंख के अंदर दबाव बढ़ने लगता है। इस दबाव की वजह से आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है। जब यह नस धीरे-धीरे खराब होने लगती है, तो देखने की क्षमता कम होने लगती है। अगर समय पर इलाज न मिल पाए तो अंधापन तक हो सकता है।
डॉ. सुनीता दुबे बताती हैं, "ग्लूकोमा से आंखों को हुए नुकसान को पूरी तरह रिवर्स कर पाना संभव नहीं है। लेकिन अगर समय पर इसका निदान कर लिया जाए, तो बीमारी को रोकने में मदद मिल सकती है। इससे आंखों को ज्यादा नुकसान पहुंचने से बचाया जा सकता है। अगर इस बीमारी की वजह से ऑप्टिक नर्व को नुकसान हो चुका है या नजर कम हो गई है, तो उसे पूरी तरह वापस नहीं लाया जा सकता है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि समय पर इलाज शुरू करके बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है और बची हुई आंखों की दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए ग्लूकोमा की जल्दी पहचान बहुत जरूरी है।"
वैसे तो शुरुआत में ग्लूकोमा बिना किसी लक्षण के विकसित होता है। लेकिन, कुछ ऐसे संकेत हैं जो ग्लूकोमा के मरीजों में देखने को मिल सकते हैं।
अगर, इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक महसूस हो तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
ग्लूकोमा का इलाज कई तरह से किया जाता है। इसमें शामिल हैं-
ग्लूकोमा का शुरुआत में इलाज आई ड्रॉप्स की मदद से किया जाता है। डॉक्टर शुरुआत में आई ड्रॉप्स लिखते हैं, इसी की मदद से इसे रोकने में मदद मिल सकती है। आई ड्रॉप्स आंखों के दबाव को कम करने में मदद करते हैं। इससे ऑप्टिक नर्व को नुकसान होने से बचाव होता है।
कुछ मामलों में डॉक्टर आई ड्रॉप्स के साथ दवाइयां भी लिखते हैं। इससे आंख के अंदर बनने वाले फ्लूइड को कम करने में मदद मिलती है। इससे ग्लूकोमा को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है।
ग्लूकोमा का इलाज करने के लिए कुछ डॉक्टर लेजर ट्रीटमेंट करवाने की सलाह भी देते हैं। लेजर ट्रीटमेंट की मदद से आंखों के अंदर के फ्लूइड के बहव को बेहतर करने में मदद मिलती है। इससे आंखों में प्रेशर कम हो जाता है।
जब दवाइयों और लेजर की मदद से कोई फायदा नहीं मिल पाता है, तो इस स्थिति में डॉक्टर सर्जरी करवाने की सलाह देते हैं। सर्जरी की मदद से आंखों के दबाव को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
ग्लूकोमा को साइलेंट विजन चोर भी कहा जाता है। यह बीमारी बिना किसी लक्षण के विकसित होती है और धीरे-धीरे आंखों को नुकसान पहुंचाती है। अगर समय पर इसकी पहचान हो जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए, तो अंधेपन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।