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क्या प्रेग्नेंसी के दौरान भ्रूण के आनुवंशिक रोगों का पता लगाया जा सकता है? जानिए डॉक्टर से

Genetic Disorders Detection In Pregnancy: अक्सर नए पेरेंट्स के मन में यह सवाल उठता है कि क्या प्रेग्नेंसी के दौरान भ्रूण में आनुवंशिक रोगों का पता लगाया जा सकता है? आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

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Written By: priya mishra | Published : August 16, 2025 3:02 PM IST

Can Genetic Disorders In A Fetus Be Detected During Pregnancy: गर्भावस्था न केवल एक महिला, बल्कि उसके पूरे परिवार के लिए एक बेहद खास और संवेदनशील समय होता है। इस दौरान मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। हर महिला की यह इच्छा होती है कि उसका बच्चा बिल्कुल स्वस्थ पैदा हो। लेकिन कई बार माता-पिता से बच्चे में कुछ आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारियां आ जाती हैं। ऐसे में, अक्सर पेरेंट्स के मन में यह सवाल उठता है कि क्या बच्चे में कोई जेनेटिक बीमारी तो नहीं है? और क्या इन बीमारियों का पता बच्चे के पैदा होने से पहले लगाया जा सकता है? ऐसे में, आज इस लेख में डॉ विनीता पांडे और डॉ प्रमिला मेनन  - बाल चिकित्सा प्रोफेसर डीपीयू सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, पिंपरी, पुणे से जानते हैं कि क्या प्रेग्नेंसी के दौरान भ्रूण में आनुवंशिक विकारों का पता लगाया जा सकता है?

आनुवंशिक विकार क्या होते हैं?

आनुवंशिक विकार वे बीमारियां या असामान्यताएं होती हैं जो गुणसूत्र (Chromosomes) या जीन (Genes) में बदलाव के कारण होती हैं। ये बदलाव माता-पिता से बच्चे में स्थानांतरित हो सकते हैं या भ्रूण के विकास के दौरान अचानक उत्पन्न हो सकते हैं। कुछ आनुवंशिक विकार हल्के होते हैं, जिनका प्रभाव जीवन की गुणवत्ता पर कम पड़ता है, लेकिन कुछ गंभीर हो सकते हैं, जो बच्चे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित करते हैं। इसलिए गर्भावस्था में इनका समय रहते पता लगाना बेहद जरूरी हो जाता है।

भ्रूण में आनुवंशिक विकारों की पहचान के लिए प्रसवपूर्व जांच

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण में आनुवंशिक विकारों का पता विभिन्न प्रसवपूर्व (Prenatal) जांचों के माध्यम से लगाया जा सकता है। ये जांचें गुणसूत्र और आनुवंशिक असामान्यताओं की शुरुआती पहचान के लिए की जाती हैं, ताकि माता-पिता और चिकित्सक समय रहते सही निर्णय ले सकें और आगे की तैयारी कर सकें। प्रसवपूर्व जांच में भ्रूण के डीएनए का विश्लेषण किया जाता है, जो सीधे भ्रूण से या माँ के खून से प्राप्त किया जाता है। इसके लिए कई तरह की स्थापित जांच विधियाँ उपलब्ध हैं, जिनकी अपनी प्रक्रिया और लाभ होते हैं।

आनुवंशिक विकारों का पता लगाने के प्रमुख प्रसवपूर्व परीक्षण

1. एम्नियोसेंटेसिस (Amniocentesis)

एम्नियोसेंटेसिस एक डायग्नोस्टिक प्रक्रिया है जिसमें गर्भाशय से एम्नियोटिक द्रव का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है। इस द्रव में भ्रूण का डीएनए मौजूद होता है, जिसका विश्लेषण कर कई प्रकार की आनुवंशिक असामान्यताओं का पता लगाया जा सकता है। यह जांच आमतौर पर गर्भावस्था के 15वें से 20वें सप्ताह के बीच की जाती है। यह अत्यंत सटीक है, लेकिन एक आक्रामक (invasive) प्रक्रिया है, इसलिए इसे आमतौर पर तभी किया जाता है जब आनुवंशिक विकार का जोखिम अधिक हो।

2. कोरियोनिक विलस सैम्पलिंग (CVS)

इस जांच में प्लेसेंटा (नाल) के ऊतक का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है और भ्रूण के डीएनए की जांच की जाती है। इसे एम्नियोसेंटेसिस से पहले, आमतौर पर गर्भावस्था के 10वें से 13वें सप्ताह के बीच किया जा सकता है। CVS से शुरुआती अवस्था में ही महत्वपूर्ण आनुवंशिक जानकारी मिल जाती है। यह भी एक आक्रामक प्रक्रिया है और इसमें थोड़े जोखिम होते हैं, इसलिए इसे भी आमतौर पर उच्च जोखिम वाली परिस्थितियों में ही किया जाता है।

3. नॉन-इनवेसिव प्रीनेटल टेस्टिंग (NIPT)

यह एक साधारण रक्त परीक्षण है जो माँ के खून पर किया जाता है। इसमें माँ के खून में मौजूद भ्रूण के सेल-फ्री डीएनए का विश्लेषण किया जाता है। NIPT पूरी तरह सुरक्षित है और भ्रूण के लिए किसी प्रकार का जोखिम नहीं है। इसे गर्भावस्था के 10वें सप्ताह से किया जा सकता है। हालांकि यह एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, न कि डायग्नोस्टिक, लेकिन यह कुछ गुणसूत्र असामान्यताओं का पता लगाने में काफी प्रभावी है और यह तय करने में मदद करता है कि आगे और जांच की आवश्यकता है या नहीं।

गर्भावस्था के दौरान आनुवंशिक विकारों का पता लगाने के फायदे

शुरुआती पहचान

प्रसवपूर्व आनुवंशिक जांच का सबसे बड़ा लाभ शुरुआती पहचान है। गर्भावस्था में ही विकार का पता लगने से माता-पिता को स्थिति को समझने, उपचार या हस्तक्षेप के विकल्पों की खोज करने और भावनात्मक व व्यावहारिक तैयारी करने का समय मिलता है।

जोखिम मूल्यांकन

ये जांचें आनुवंशिक विकारों की संभावना का आकलन करने में मदद करती हैं, जिससे चिकित्सक बेहतर प्रसवपूर्व देखभाल की योजना बना सकते हैं। जिन परिवारों में कुछ विकारों का इतिहास है, उनके लिए यह जानकारी विशेष रूप से लाभकारी होती है।

तैयारी और योजना

यदि गर्भावस्था में किसी आनुवंशिक विकार का पता चलता है, तो माता-पिता बच्चे की विशेष जरूरतों के लिए पहले से तैयारी कर सकते हैं। इसमें जन्म के समय विशेष चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था, जीवनशैली में बदलाव, और परामर्श व सहायता सेवाएं लेना शामिल है।

गर्भावस्था में पहचाने जाने वाले सामान्य आनुवंशिक विकार

1. डाउन सिंड्रोम

डाउन सिंड्रोम एक गुणसूत्र विकार है जो 21वें गुणसूत्र की अतिरिक्त प्रति के कारण होता है। यह बौद्धिक अक्षमता और कुछ विशेष शारीरिक लक्षणों का कारण बन सकता है। जल्दी पता चलने से माता-पिता चिकित्सा और विकास संबंधी जरूरतों की बेहतर तैयारी कर सकते हैं।

2. सिस्टिक फाइब्रोसिस

सिस्टिक फाइब्रोसिस एक वंशानुगत रोग है जो श्वसन और पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। यह CFTR जीन में परिवर्तन के कारण होता है। गर्भावस्था में इसका पता लगने से समय रहते प्रबंधन और उपचार की तैयारी की जा सकती है।

3. सिकल सेल रोग

सिकल सेल रोग लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन के निर्माण को प्रभावित करता है, जिससे एनीमिया, दर्द के दौरे और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। प्रसवपूर्व पहचान से जन्म से ही विशेष देखभाल की योजना बनाई जा सकती है।

प्रसवपूर्व आनुवंशिक जांच न केवल गर्भावस्था के प्रबंधन में मदद करती है, बल्कि आनुवंशिक विकारों से ग्रस्त बच्चों को जन्म के क्षण से ही सर्वोत्तम देखभाल सुनिश्चित करती है। यह माता-पिता और चिकित्सकों के लिए यह जानकारी सही निर्णय लेने, उचित तैयारी करने और आवश्यक चिकित्सा व भावनात्मक सहायता प्रदान करने में सहायक होती है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।