क्या डायबिटीज़ के मरीज़ खुद को अचानक होनेवाले heart attack से बचा सकते हैं?

अगर आप डायबीटिक हैं तो यह आर्टिकल पढ़ें और हार्ट अटैक से बचें।

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Written By: Editorial Team | Published : October 17, 2017 11:16 AM IST

यह तो आपने भी सुना ही होगा कि डायबिटीज़, किडनी, फेफड़े, लीवर और यहां तक कि आपके दिल जैसे शरीर के सभी प्रमुख अंगों को प्रभावित करता है । डायबिटीज़ के ज्यादातर मरीज़ों, को अपनी ज़िंदगी में दिल की किसी न किसी बीमारी का सामना करना ही पड़ता है। टाइप 1 और टाइप 2, दोनों प्रकार के डायबिटीज़ के मरीज़ों में इन बीमारियों का ख़तरा एक जैसा ही होता है, और क़िस्मत किसी पर कोई रहम नहीं करती।

अनियंत्रित डायबिटीज़ के कारण ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जो दिल को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। यह कोरोनरी हृदय रोग का कारण बनता है, जो एक ऐसी स्थिति है जहां दिल को ऑक्सीजन से भरपूर से रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में प्लैक बनने लगता है। इससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और खून का दौरा आसानी से नहीं हो पाता। ऐसे में रक्त का प्रवाह करने के लिए आपके दिल को बहुत अधिक पम्प करना पड़ सकता है। हो सकता है कि कुछ समय बाद धमनियों में प्लैक की वजह से खून के थक्के या ब्लड क्लॉट बनने शुरु हो जाएं। इससे दिल को मिलने वाले खून की सप्लाई कम हो सकती है या पूरी तरह बंद हो सकती है। यह एक ख़तरनाक स्थिति है और इसके चलते दिल का दौरा भी पड़ सकता है। हालांकि, दिल का दौरा पड़ने से पहले शरीर में कुछ लक्षण और संकेत दिखाई पड़ते हैं। सीने में दर्द, दिल की धड़कन में बदलाव  सबसे आम लक्षण हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ करने से ज़ोरदार हार्ट अटैक पड़ सकता है, जो कि जानलेवा भी हो सकता है।

लेकिन कभी-कभी किसी व्यक्ति को यह पता भी नहीं लग सकता कि उसे दिल का दौरा पड़ सकता है। इस स्थिति को साइलेंट हार्ट अटैक (silent heart attack) कहा जाता है।

जब दिल का दौरा पड़ता है तो दिल के किसी एक हिस्से में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है,जिससे दिल की मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं और काम नहीं करती। इसकी वजह से मरीज़ को छाती में दर्द और तेज़ सांस की शिकायत होती है।

लेकिन कभी-कभी पीड़ित व्यक्ति इन प्रमुख लक्षणों को महसूस नहीं कर पाता है और उसे हार्ट अटैक का भी अंदाज़ा नहीं लगता। अक्सर डायबिटीज़ के मरीज़ों के साथ ऐसा ही होता है 'डायबीटिक्स न्यूरोपैथिक समस्याओं से पीड़ित होते हैं, जो उनके दर्द महसूस करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। इसीलिए हो सकता है कि जब उन्हें दिल का दौरा पड़े तो दर्द महसूस ना होने के कारण शायद उन्हें हार्ट अटैक का भी पता ना चल सके।

ऐसे मरीज़ उस समय सांस लेने में दिक्कत या थकान महसूस कर सकते हैं और इसे तनाव, चिंता या बहुत अधिक काम से जोड़कर देख सकते हैं। धीरे-धीरे, दिल ठीक हो जाता है और वह अपने नियमित काम साधारण तरीके से कर सकते हैं। ‘लेकिन दिल के दौरे की ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति के दिल की कुछ मांसपेशियां पूरी तरह खत्म हो सकती हैं, जो एक बहुत बड़ा नुकसान है’, यह कहना है, फोर्टिस हॉस्पिटल, कनिंघम रोड के कंसल्टेंट कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जन डॉ. बी.एस. संजय का। डॉ. संजय के मुताबिक अगर ऐसा अक्सर होता है और आपका दिल साइलेंट हार्ट के साथ कमजोर होता रहे, तो यह जानलेवा हो सकता है और इससे पहले कि आपको पता चले अचानक दिल का दौरा पड़ सकता है और स्थिति बिगड़कर एक मेडिकल इमरजेंसी में बदल सकता है।

'अगर आपको मधुमेह या डायबिटीज़ है तो आपको अपने दिल की खास देखभाल करनी चाहिए। याद रखें, दिल में कभी दर्द नहीं होता, इसलिए अगर आपको छाती में किसी भी प्रकार का दर्द और सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें और एक ईसीजी (ECG) कराएं। डॉ. संजय बताते हैं, "हो सकता है कि आपका डॉक्टर दिल का दौरा पड़ने से आपके दिल के जिस हिस्से को नुकसान हुआ हो उसे दोबारा ठीक न कर सके। लेकिन दिल को कुछ इस तरीके से संभालने की कोशिश की जा सकती है कि आप एक साधारण ज़िंदगी जी सके’। यही कारण है कि जब दिल की सेहत की बात आती है तो डायबीटिक्स को सतर्क रहना जरूरी है। मुश्किल तकलीफों से बचने के लिए कम से कम साल में एक बार (या ज़्यादा, अगर आपका डॉक्टर कहे तो) दिल की सेहत जानने के लिए जांच कराएं। डॉ. संजय यह भी कहते हैं कि डायबीटिक्स जो साइलेंट हार्ट अटैक से पीड़ित हैं, वे अपने  दिल की अच्छी देखभाल करने के बाद भी मैराथन में दौड़ने जैसी कठिन फिजिकल एक्टिविटीज़ में हिस्सा नहीं ले सकते हैं, लेकिन वह अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के छोटे-मोटे काम आसानी से कर सकते हैं और उनकी ज़िंदगी भी लंबी हो सकती है।

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अनुवादक: Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत : Shutterstock Images.

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