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Diabetic Mother करा सकती हैं बच्चे को फीड? एक्सपर्ट से जानें बच्चों को स्तनपान कराने के दौरान बरती जाने वाली सावधनियां
Can babies get diabetes from mothers : मां का दूध ही बच्चे का सबसे पहला और पौष्टिक आहार माना जाता है। स्तनपान कराने से जितना फायदा शिशु को होता है उतना ही मां को होता है। मां का दूध शिशु को स्वस्थ रखता है। बच्चे को स्तनपान कराना मां के लिए भी खास अनुभव होता है। पर कई बार देखा जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद कई मां में डायबिटीज की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में उनके व अन्य के मन में भी यही सवाल उठता है कि क्या डायबिटीज के दौरान बच्चे को स्तनपान कराना ठीक है या फिर नहीं? कई महिलाओं में इसको लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। कुछ लोग इसे नुकसानदायक मानते हैं तो कुछ फायदेमंद, कई रिसर्चों में अलग-अलग महिलाओं व अलग-अलग परिस्थितियों में इसके विभिन्न परिणाम सामने आए हैं।
दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट की यूनिट हेड, सीनियर कंसल्टेंट, गायनाकोलॉजी डॉक्टर रूबी सहरा का कहना है कि अगर मां को टाइप-2 डायबिटीज है, तो कई केस में बच्चे को स्तनपान कराना नुकसानदायक भी होता है। दरअसल टाइप-2 डायबिटीज में शरीर पर्य़ाप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है। इसके अलावा यह इंसुलिन का विरोध भी करता है। इस वजह से शुगर का लेवल भी बढ़ता है और यह कई हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है। जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज है ज्यादातर डॉक्टर उन्हें न्यूट्रिशन से भरपूर भोजन लेने के लिए कहते हैं, उन्हें नियमित व्यायाम करने की भी सलाह दी जाती है जिससे डायबिटीज बढ़ने की संभावना कम हो जाती है, यह बच्चे और माँ दोनों के लिए है।
उन्होंने कहा कि रिसर्च के अनुसार स्तनपान कराने वाली महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने की संभावना 15% तक कम हुई है। यह फायदा अंतिम बच्चे के बाद लगभग 15 सालों तक भी रहता है। बच्चे के लिए टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा लगभग 40% तक कम होता है। यह भी सच है कि जो बच्चे स्तनपान करते हैं उन्हें आगे मोटापे की समस्या नहीं होती है।
डायबिटीज के दौरान महिला का स्तनपान कराना काफी फायदेमंद होता है क्योंकि महिलाओं में स्तनपान के समय हर बार 500 कैलोरी घटती है जिससे महिलाओं में स्वास्थ्य बेहतर होता है, एक सर्वे के अनुसार पता लगाया गया कि 2 महीने तक स्तनपान कराने से महिलाओं में डायबिटीज होने की संभावना 50 प्रतिशत कम होती है और 5 महीने तक स्तनपान कराने वाली महिलाएं डायबिटीज से काफी हद तक बचकर आगे निकल जाती है। इसके पीछे की वजह ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान घटने वाले वजन की मात्रा को भी माना जाता है।
• डॉक्टर हमेशा मां को बच्चे की त्वचा के संपर्क में रहने की सलाह देते हैं। इससे शरीर मातृत्व के चरण का अनुभव करता है जो आंतरिक प्रोसेस को भी प्रभावित करने में सक्षम है और इससे मां का दूध उत्पन्न होना शुरू हो जाता है।
• अगर डिलीवरी के बाद आपको ब्रेस्ट में तुरंत दूध आता है तो बच्चे को बिना देर किए इसे पिलाएं। पहले और फ्रेश दूध में सबसे ज्यादा न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो बच्चे के लिए बहुत जरूरी हैं।
• आप नियमित रूप से ब्लड शुगर के स्तरकी जांच करें। इस बात का ध्यान रखें कि आप इन्सुलिन लेवल के अनुसार सही मात्रा में लेती हैं जो ब्रेस्टफीडिंग शुरू होने के बाद कम ज्यादा हो सकती है।
• स्तनपान कराने से महिलाओं के शरीर में ग्लूकोज का स्तर कम हो जाता है। जिसकी वजह से जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी ग्लूकोज का लेवल बढ़ाने की जरूरत पड़ती है ताकि मां के दूध की आपूर्ति लगातार होती रहे। यह आप बच्चे को दूध पिलाने से पहले बिस्किट आदि कुछ स्नैक्स खाकर भी कर पूरा सकती हैं या फिर ग्लूकोज का घोल पी सकती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि स्नैक्स में भरपूर प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट होना जरूरी है।
• बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव लेना सही नहीं है। आप बच्चे को दूध पिलाने का आनंद लें और रिलैक्स करें।