क्‍या कुत्‍तों से भी फैल सकता है कांगो बुखार ? जानें लक्षण और बचाव के उपाय

कांगो बुखार पशुओं की चमड़ी पर चिपके परजीवियों के कारण होता है। इसलिए सबसे ज्‍यादा जरूरी है कि अपने पशुओं को इन टिक्‍स यानी पिस्‍सुओं से बचाकर रखा जाए।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 13, 2019 2:48 PM IST

इबोला के बाद अब दुनिया भर में कांगो बुखार की दहशत फैल गई है। भारत में भी इसे लेकर लोग घबराए हुए हैं। अभी हाल ही में राजस्‍थान में दो व्‍यक्तियों की मौत हो जाने के बाद से लोग इस बुखार के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानना चाहते हैं। तो आइए आपको बताते हैं कांगो बुखार, उसके लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में विस्‍तार से।

क्‍या है कांगो बुखार

असल में सबसे पहले कांगो में इसका मरीज आने के कारण इसका नाम कांगो बुखार रख दिया गया है। जबकि इसका पूरा नाम Crimean–Congo hemorrhagic fever है। यानी शॉर्ट में आप इसे सीसीएचएफ कह सकते हैं। यह पालतू पशुओं में पाए जाने वाले परजीवी हिमोरल के कारण फैलता है। इसलिए इस बुखार से बचने के लिए जरूरी है कि अपने पेट्स को इन परजीवियों से बचा कर रखा जाए।

पशुओं से फैलता है यह वायरस

इसकी शुरूआत पशुओं से होती है। यह छोटे-छोटे परजीवी पशुओं की चमड़ी से चिपके रहते हैं। और उनका खून चूसते रहते हैं। इसके साथ ही संक्रमण उनके शरीर में भी प्रवेश कर जाता है। जो लोग पालतू पशु जैसे गाय, कुत्‍ता, भेड़ आदि रखते हैं, उनके संपर्क में आने से उनमें भी इस वायरस के चपेट में आने का जोखिम बढ़ जाता है।

Tips to avoid congo fever, what is congo fever, congo fever symptoms, congo fever treatment, Crimean–Congo hemorrhagic fever. इसके शुरूआती लक्षण बहुत सामान्‍य बुखार की तरह ही होते हैं । पर साथ ही इसमें सिर दर्द, चक्‍कर आना, उल्‍टी या मतली आना, आंखों और सीने में जलन की शिकायत भी बढ़ जाती है। इसमें शरीर के विभिन्‍न अंगों से खून बहने लगता है। © Shutterstock.

कांगो बुखार के लक्षण

इसके शुरूआती लक्षण बहुत सामान्‍य बुखार की तरह ही होते हैं । पर साथ ही इसमें सिर दर्द, चक्‍कर आना, उल्‍टी या मतली आना, आंखों और सीने में जलन की शिकायत भी बढ़ जाती है। इसमें शरीर के विभिन्‍न अंगों से खून बहने लगता है। इसलिए इसे रक्‍तस्रावी बुखार भी कहा जाता है। यह शरीर के कई आंतरिक अंगों के एक साथ खराब हो जाने के कारण होता है। यह बुखार इतना ज्‍यादा खतरनाक है कि इसके 80 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि इससे बचकर रहा जाए।

कांगो बुखार से बचाव के उपाय

  • कांगो बुखार पशुओं की चमड़ी पर चिपके परजीवियों के कारण होता है। इसलिए सबसे ज्‍यादा जरूरी है कि अपने पशुओं को इन टिक्‍स यानी पिस्‍सुओं से बचाकर रखा जाए।
  • ये अमूमन पशुओं के कान, गले और बट एरिया में छुपे रहते हैं और उनके खून पर जिंदा रहते हैं। इसलिए पशुओं के इन एरिया की सफाई बहुत ज्‍यादा जरूरी है।
  • इस मौसम में क्‍योंकि यह वायरस फैलने लगा है इसलिए जरूरी है कि पशुओं और उनके स्‍थान की साफ-सफाई पर विशेष ध्‍यान दिया जाए। इसके लिए अच्‍छे पिस्‍सू रोधी साबुन से उन्‍हें नहलाया जाए।
  • नहलाने के बाद कंघी की सहायता से मरे हुए पिस्‍सुओं को निकालना चाहिए। कुत्‍ते और बिल्लियों के शरीर में बाल बहुत होते हैं। इसलिए उनकी सफाई में और ज्‍यादा सावधानी बरतनी चाहिए।
  • घर के कालीन, सोफों के कोनों पर नमक का छिड़काव कर सकते हैं। पिस्‍सू यहां भी छुपते हैं और नमक के संपर्क में आते ही मर जाते हैं।
  • पशुओं को इससे बचाने के लिए केप्स्टर यानी पिस्‍सू रोधी गोली खिलानी चाहिए। इससे आप पशुओं के खाने में मिलाकर दे सकते हैं। जिससे स्‍वाद में भी फर्क नहीं आता।