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The risk of animals spreading COVID-19 to people is considered to be low, according to the CDC.। © Shutterstock.
इबोला के बाद अब दुनिया भर में कांगो बुखार की दहशत फैल गई है। भारत में भी इसे लेकर लोग घबराए हुए हैं। अभी हाल ही में राजस्थान में दो व्यक्तियों की मौत हो जाने के बाद से लोग इस बुखार के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं। तो आइए आपको बताते हैं कांगो बुखार, उसके लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से।
असल में सबसे पहले कांगो में इसका मरीज आने के कारण इसका नाम कांगो बुखार रख दिया गया है। जबकि इसका पूरा नाम Crimean–Congo hemorrhagic fever है। यानी शॉर्ट में आप इसे सीसीएचएफ कह सकते हैं। यह पालतू पशुओं में पाए जाने वाले परजीवी हिमोरल के कारण फैलता है। इसलिए इस बुखार से बचने के लिए जरूरी है कि अपने पेट्स को इन परजीवियों से बचा कर रखा जाए।
इसकी शुरूआत पशुओं से होती है। यह छोटे-छोटे परजीवी पशुओं की चमड़ी से चिपके रहते हैं। और उनका खून चूसते रहते हैं। इसके साथ ही संक्रमण उनके शरीर में भी प्रवेश कर जाता है। जो लोग पालतू पशु जैसे गाय, कुत्ता, भेड़ आदि रखते हैं, उनके संपर्क में आने से उनमें भी इस वायरस के चपेट में आने का जोखिम बढ़ जाता है।
इसके शुरूआती लक्षण बहुत सामान्य बुखार की तरह ही होते हैं । पर साथ ही इसमें सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी या मतली आना, आंखों और सीने में जलन की शिकायत भी बढ़ जाती है। इसमें शरीर के विभिन्न अंगों से खून बहने लगता है। © Shutterstock.
इसके शुरूआती लक्षण बहुत सामान्य बुखार की तरह ही होते हैं । पर साथ ही इसमें सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी या मतली आना, आंखों और सीने में जलन की शिकायत भी बढ़ जाती है। इसमें शरीर के विभिन्न अंगों से खून बहने लगता है। इसलिए इसे रक्तस्रावी बुखार भी कहा जाता है। यह शरीर के कई आंतरिक अंगों के एक साथ खराब हो जाने के कारण होता है। यह बुखार इतना ज्यादा खतरनाक है कि इसके 80 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि इससे बचकर रहा जाए।