
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 22, 2018 11:37 AM IST
बच्चों में हार्ट अटैक अनुवांशिक ग़बड़ियों की वजह से होता है। © Shutterstock
छोटे बच्चों को भी हार्ट अटैक हो सकता है। हालांकि, यह बहुत दुर्लभ है। बड़ों में जहांअनहेल्दी डायट और एक्सरसाइज़ की कमी हार्ट अटैक के मुख्य कारण होते हैं। वहीं बच्चों में हार्ट अटैक जन्मजात गड़बड़ियों का भी संकेत हो सकता है, इसका मतलब है कि जन्म के समय ही यह गड़बड़ी बच्चे के शरीर में मौजूद होती है। यह दिल या धमनियों में संरचनात्मक विषमता भी हो सकती है। बहुत से मामलों में संरचनात्मक गड़बड़ी को बच्चों को हार्ट अटैक की संभावना के पहले संकेत के तौर पर देखा जाता है।
तो वहीं जिन बच्चों में अनुवांशिक गड़बड़ी या बहुत अधिक उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी गड़बड़ियां भी हो सकती है। ऐसे मामलों में बच्चे (भले ही वह पतले हो या दुबले) के शरीर में अधिक कोलेस्ट्रॉल उत्पन्न होता है और अनुवांशिक कारणों की वजह से शरीर में अधिक कोलेस्ट्रॉल जमा होता है। समय बीतने के साथ धमनियों में ब्लॉकेज होने लगता है और बच्चों में हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। यह समस्या आमतौर पर परिवार में ज़्यादातर लोगों को होती है। यही नहीं, परिवार में पहले ही अगर किसी को हार्ट अटैक की समस्या रही हो तो, ऐसे में बच्चे में हाई कोलेस्ट्रॉल की यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि आपके बच्चे को हार्ट अटैक का कितना खतरा है।
हालांकि बच्चों में मोटापे की समस्या काफी आम है, जो बढ़ते हुए बच्चे या वयस्कों में हार्ट अटैक का एक बहुत अहम कारण बन सकता है। हालांकि, अगर आपके बच्चे को सीने में दर्द या सांस फूलने की शिकायत हो तो यह दिल की किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। इसी तरह बच्चे आजकल ज़्यादातर समय घर में बैठे रहने और जंक फूड खाते रहने का काम करते हैं। इसलिए बच्चे को हार्ट अटैक के खतरे से बचाने के लिए माता-पिता को चाहिए कि बच्चों में खान-पान की अनहेल्दी आदतों को बदलने की कोशिश करें। इसी तरह, अगर आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारियां या स्ट्रोक की शिकायत रही हों तो कम उम्र में आपके बच्चों को दिल की बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है। इसलिए अगर आपके बच्चे का वजन थोड़ा भी ज़्यादा है तो अपने डॉक्टर से बात करें ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं उसे दिल की बीमारियों का खतरा तो नहीं।