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Cancer Cases In Children: अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या बिना जेनेटिक रीजन के बच्चों को कैंसर हो सकता है? यही सवाल हमने तेलगांव के ओन्को लाइफ कैंसर सेंटर के वरिष्ठ सलाहकार- हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्टऔर बीएमटी एक्सपर्ट डॉक्टर सूरज गोयनका से बात की। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि
‘हां, बच्चों को बिना किसी जेनेटिक (वंशानुगत) कारण के भी कैंसर हो सकता है। बहुत से माता-पिता सोचते हैं कि कैंसर सिर्फ परिवार में चलने वाली बीमारी है या उम्र बढ़ने पर होता है, लेकिन बच्चों में कैंसर इसके अलावा भी हो सकता है। क्योंकि, कैंसर वंशानुगत हो सकता है लेकिन हर केस में ऐसा होना संभव नहीं है।’
इसलिए कुछ मामलों में वंशानुगत जेनेटिक चेंजेज के कारण कैंसर परिवारों में काफी जनरेशन तक चलता है, जिसके कारण माता-पिता से बच्चों में होता है। आइए अब हम आपको कैंसर के बारे में थोड़ी बेसिक और जरूरी जानकारी देते हैं जैसे बच्चों में कैंसर क्यों होता है, गर्भावस्था के दौरान कैसे असर पड़ता है और बाहरी कारक क्या हैं आदि-आदि। जो डॉक्टर ने हमारे साथ साझा की हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों में कैंसर अक्सर शरीर की कोशिकाओं में अचानक होने वाले बदलाव की वजह से होता है। ये बदलाव किसी गलती की तरह होते हैं, जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं होता। इसका खान-पान या लाइफस्टाइल से सीधा संबंध ज्यादातर मामलों में नहीं होता।
डॉक्टर ने जवाब देते हुआ कहा कि ‘नहीं, ऐसा नहीं है। कुछ बच्चों में कैंसर जेनेटिक कारण से होता है, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम होते हैं। ज्यादातर मामलों में यह पता ही नहीं चल पाता कि कैंसर क्यों हुआ। यह अचानक भी हो सकता है।’
कुछ लोगों को लगता है कि कैंसर गर्भावस्था के दौरान भी हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं कि ‘कभी-कभी कैंसर की शुरुआतमां के पेट में ही हो जाती है। गर्भ में बच्चे की कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं। अगर उस समय कोई छोटी गड़बड़ी हो जाए, तो आगे चलकर वह कैंसर बन सकती है।’
डॉक्टर ने बताया कि कुछ मामलों में ये कारण भी असर डाल सकते हैं जैसे-
डॉक्टर ने बच्चों में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कैंसर के बारे में बताया है। यह है- ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) और दिमाग के ट्यूमर और कुछ ठोस ट्यूमर देखे जाते हैं। अच्छी बात यह है कि समय पर इलाज से कई बच्चों का कैंसर ठीक हो जाता है।’ लेकिन आपकी थोड़ी भी अनदेखी भारी पड़ सकती है।

अगर बच्चे में लंबे समय तक ये लक्षण रहें, तो डॉक्टर को दिखाएं- बार-बार बुखार, बहुत ज्यादा थकान, शरीर में गांठ या सूजन, अचानक वजन कम होना, हड्डियों या जोड़ों में दर्द और बच्चे का पीला दिखना। ये लक्षण हमेशा कैंसर नहीं होते, लेकिन जांच जरूरी है।
अगर कैंसर जल्दी पकड़ में आ जाए, तो इलाज के अच्छे परिणाम मिलते हैं। आजकल इलाज के कई अच्छे तरीके उपलब्ध हैं और बहुत से बच्चे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल कई बच्चों में कैंसर पाया जाता है, लेकिन समय पर इलाज से उन्हें स्वस्थ जीवन मिल सकता है। इसलिए माता-पिता का सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
बच्चों को कैंसर होने के लिए जेनेटिक कारण होना जरूरी नहीं है। यह बिना किसी साफ कारण के भी हो सकता है। लेकिन सही समय पर पहचान, इलाज और देखभाल से बच्चों को स्वस्थ बनाया जा सकता है। जागरूकता और डॉक्टर की सलाह ही सबसे बड़ा सहारा है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।