हार्ट नहीं टीबी की बीमारी का लक्षण हो सकता है छाती में दर्द, रात में आता है तेज बुखार और पसीना

Symptoms of Tuberculosis (TB) in Hindi: आज के समय में टीबी एक कॉमन बीमारी बन चुकी है। आज हम जानेंगे कि छाती में दर्द किस तरह से टीबी का एक प्रमुख लक्षण हो सकता है।

WrittenBy

Written By: Mishra Kishori | Published : February 19, 2025 12:45 PM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr. Vikas Mittal

क्षय रोग या टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकता है। टीबी के अन्य लक्षणों में सांस लेने में दिक्कत, बुखार, थकान, बलगम में खून आना, सीने में दर्द और भूख की कमी शामिल है। वैसे तो इसका इलाज संभव है लेकिन कई बार लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। टीबी का सबसे आम प्रकार फेफड़ों का टीबी होता है, लेकिन यह प्लूरा को भी प्रभावित कर सकता है, जिसे टीबी प्लूरिसी कहा जाता है।

टीबी और सीने में दर्द - Chest pain and Tuberculosis in hindi

सीने में दर्द टीबी के लक्षणों में से एक हो सकता है, खासकर जब यह फेफड़ों की प्लूरा को प्रभावित करता है। जिसमें फेफड़ों और उनकी झिल्ली के बीच तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे सूजन और दर्द होता है। यह दर्द अक्सर तेज और चुभने वाला होता है, जो सांस लेने या खांसने पर बढ़ सकता है। हालांकि, फेफड़ों की टीबी में भी कभी-कभी सीने में दर्द हो सकता है, लेकिन इसका सबसे आम लक्षण लगातार दो या अधिक हफ्तों तक खांसी रहना है।

टीबी के अन्य सामान्य लक्षण - Symptoms of Tuberculosis (TB) in hindi

टीबी के कई लक्षण होते हैं, जो धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:

• लगातार खांसी (2 सप्ताह से अधिक)

• बलगम या थूक में खून आना

• तेज बुखार और रात में पसीना आना

• भूख कम लगना और वजन घटना

• थकान और कमजोरी महसूस होना

• कभी-कभी सांस फूलना

टीबी के प्रकार - Types of Tuberculosis

टीबी को आमतौर पर दो प्रमुख श्रेणियों में बांटा जाता है:

पल्मोनरी टीबी: यह सबसे आम प्रकार की टीबी होता है, जिसमें बैक्टीरिया मुख्य रूप से फेफड़ों पर हमला करते हैं। यह हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। इसके लक्षणों में खांसी, बलगम में खून आना, सांस फूलना और सीने में दर्द शामिल होते हैं।

एक्सट्रा-पल्मोनरी टीबी: जब टीबी का संक्रमण फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों में फैलता है, तो इसे एक्सट्रा-पल्मोनरी टीबी कहा जाता है। इसमें निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं:

1. टीबी प्लूरिसी: फेफड़ों की झिल्ली में सूजन

2. लसीका ग्रंथि टीबी: गर्दन और बगल की ग्रंथियों में सूजन

3. मस्तिष्क टीबी (मेनिनजाइटिस): मस्तिष्क की झिल्ली में संक्रमण

4. हड्डी और जोड़ टीबी: हड्डियों और जोड़ों में दर्द और कमजोरी

5. यूरिनरी टीबी: गुर्दे और मूत्राशय को प्रभावित करने वाली टीबी

टीबी का इलाज - Tuberculosis Treatment in hindi

टीबी पूरी तरह ठीक हो सकता है, बशर्ते इसका सही समय पर और नियमित रूप से इलाज किया जाए। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी के इलाज की सुविधा मुफ्त प्रदान की जाती है। टीबी का इलाज डॉट्स पद्धति के तहत किया जाता है, जिसमें रोगी को 6 से 9 महीने तक नियमित रूप से एंटी-टीबी दवाएं लेनी होती हैं।

टीबी के इलाज में उपयोग की जाने वाली प्रमुख दवाएंnरिफैम्पिसिन, आइज़ोनियाज़िड, पाइराजिनामाइड, एथाम्बुटोल आदि हैं। कुछ मामलों में, यदि रोगी सामान्य दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है, तो उसे मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी कहा जाता है। ऐसे मामलों में उपचार लंबा हो सकता है और दूसरी पंक्ति की दवाएं दी जाती हैं।

टीबी एक गंभीर और संक्रामक रोग है, जो समय पर इलाज न करने पर घातक हो सकता है। यदि किसी को लंबे समय तक खांसी, बलगम में खून, वजन कम होना या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और उचित इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

Dr. Vikas Mittal, Pulmonologist and Director at Wellness Home Clinic and CK Birla Hospital