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Written By: Yogita Yadav | Published : August 22, 2018 6:03 PM IST
ब्रुगाडा सिंड्रोम दिल की आसामान्य धड़कन की बीमारी है। इस बीमारी से अधिकांश लोगों की जान चली जाती है। कई बार छोटे बच्चे भी इसके शिकार होते हैं। जिसके लिए उनके पिता का जीन जिम्मेदार है। जबकि अव्यवस्थित जीवनशैली भी ब्रुगाडा सिंड्रोम को बढ़ाने में मदद करती है।
क्या है ब्रुगाडा सिंड्रोम
ब्रुगाडा सिंड्रोम असामान्य लेकिन दिल के लिए एक गंभीर स्थिति है। इस समस्या में अक्सर बेहोशी या दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो जाती है। यह समस्या तब होती है जब दिल की विद्युतीय गतिविधि बाधित हो जाती है। आमतौर पर ये बीमारी अनुवांशिक होती है, लेकिन कई बार अनियमित जीवनशैली भी इसकी वजह बन सकती है। लापरवाही करने पर यह रोग खतरनाक और जानलेवा भी हो सकता है।
कितना खतरनाक है
ब्रुगाडा सिंड्रोम युवाओं में अचानक हृदय संबंधी मौत का कारण बनता है। आमतौर पर अचानक दिल की धड़कन का घटना या बढ़ना इस खतरनाक सिंड्रोम का एक प्रमुख कारण है। कुछ मामलों में शिशुओं की अचानक मृत्यु का कारण भी ये सिंड्रोम बनता है। इसके अलावा कम उम्र के बच्चों की अचनाक मौत का भी ये एक प्रमुख कारण है। अफसोस की बात ये है कि ब्रूगाडा सिंड्रोम से होने वाली ज्यादातर मौतें बिना किसी चेतावनी या संकेत के होती हैं।
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पुरुषों को होता है ज्यादा खतरा
ब्रूगाडा सिंड्रोम आमतौर पर युवा और मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों को प्रभावित करता है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में इस सिंड्रोम से प्रभावित होने का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि इस सिंड्रोम में मेल हार्मोन यानी टेस्टोस्टेरॉन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
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बरतें ये सावधानियां
दिल की धड़कन के घटने या बढ़ने पर आपको तुरंत किसी अनुभवी चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। हृदय रोग विशेषज्ञ कुछ लक्षणों के द्वारा इसका अनुमान लगाते हैं। इसके बाद वो जांच के लिए ईसीजी और जेनेटिक परीक्षण करते हैं। ईसीजी में दिल की धड़कन और दिल की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड किया जाता है। जबकि जेनेटिक परीक्षण में दोषपूर्ण SCN5A जीन की पहचान की जाती है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.
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