
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : October 12, 2022 12:34 PM IST
arthritis in children: अगर मां को कोई बीमारी है, तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को भी वही बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी ही एक बीमारी है अर्थराइटिस जो बेहद गंभीर और दर्दनाक हेल्थ कंडीशन है। गठिया से ग्रस्ति बहुत ही महिलाओं के मन में यही सवाल होता है कि कहीं उनकी यह बीमारी उनके बच्चों को भी न हो जाए। उनके इस सवाल का जवाब देना बहुत जटिल है, क्योंकि इसका जवाब सिर्फ एक हेल्थ एक्सपर्ट्स ही दे सकता है। इसलिए हमने डॉ. हरप्रीत सिंह से इस बारे में कुछ सवाल पूछे। डॉक्टर हरप्रीत सिंह इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर में कंसलटेंट और ऑर्थोपेडिक्स (शोल्डर, एल्बो और टेट्राहैंड सर्जरी) हैं। चलिए जानते हैं अर्थराइटिस से ग्रसित मां से बच्चों में यह बीमारी फैलने से जुड़े सवालों पर एक्सपर्ट्स क्या जवाब देते हैं।
गठिया ग्रस्त मां से बच्चे में होने वाली बीमारी की संभावना बहुत कम होती है पर ऐसा नहीं कहा जा सकता की मां से बच्चे में यह बीमारी नहीं हो सकती क्योंकि गठिया के कई कारण देखे गए हैं जैसे - अनुवांशिकी अर्थात कई पीढ़ियों में देखे जाते हैं, पर्यावरण, प्रतिरक्षा तंत्र। इसमें हमारे जीन जैसे की HLA बी27 व कुछ और जीन बच्चों में गठिया संबंधित बीमारी होने की संभावना को बढाते हैं, अलग-अलग जातियों में अलग-अलग जीन पाए जाते हैं। इसलिए यह समझा जा सकता है कि इस बीमारी का असर परिवार के अन्य लोगों पर भी पड़ता है और यह बच्चों में भी हो सकता है।
बच्चों में गठिया जैसे लक्षणों का कोई इलाज तो नहीं है लेकिन इस खतरे को थोड़ा कम किया जा सकता है। यदि बच्चे में गठिया होने के लक्षणों का जल्द पता चल जाए तब प्राथमिक उपचार के माध्यम से इसे और बढ़ने से रोका जा सकता है। परंतु इसके लिए बहुत जरूरी है कि इस बीमारी को जल्द से जल्द पहचाना जाए। यदि छोटे बच्चों के जोड़ों में सूजन 6 हफ्ते से ज्यादा है तो यह इस बीमारी के लक्षण का संकेत है। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श कर एक्स-रे द्वारा गठिया की पहचान की जा सकती है। इसे ठीक करने के लिए विभिन्न प्रकार की दवाइयां दी जाती है
जैसे- सूजन को कम करने वाली गैर स्टेरायडल दवाइयाँ (एनएसएआईडी)- नेप्रोसिन, डिक्लोफेनाक और आइबूप्रोफेन।
इसके अलावा बायोलॉजिक्स, जोड़ों में सुई व कुछ व्यायाम के माध्यम से इन्हें ठीक किया जा सकता है।
गठिया में अक्सर शरीर के घुटने, कंधे, गर्दन, कूल्हों और कोहनी के जोड़ों में दर्द के साथ अकड़न आ जाती है। यह अकड़न खासकर सर्दियों के मौसम में ज्यादा होती है। यह अस्थाई होता है और कुछ समय बाद ठीक भी हो जाता है यह कई प्रकार की गठिया रोगों में होता है जैसे- ऑस्टियोआर्थराइटिस, बर्साइटिस, रूमेटोइड गठिया आदि। इसे ठीक करने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।
यह समस्या सर्दियों में अधिक होती है इसलिए ऐसे मौसम में अपने शरीर को गर्म रखना चाहिए और ठंड से बचने की कोशिश करनी चाहिए इसके लिए हमेशा गर्म कपड़े पहने रखें।
नियमित व्यायाम करें जिससे जोड़ों में कुछ लचीलापन बना रहे, जोड़ों को स्ट्रेच करें जिससे जोड़ों के रक्त प्रवाह में सुधार हो सके। व्यायाम बहुत जल्दी-जल्दी व जोर से नहीं करना चाहिए। चूंकि गठिया जोड़ों को प्रभावित करता है, व्यायाम करने के दौरान कुछ मूवमेंट या गलत पोज शरीर के जोड़ को और नुकसान पहुंचा सकती हैं साथ ही दर्द को भी बढ़ा सकती हैं। इसलिए व्यायाम करने में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है। कोशिश करें कि व्यायाम किसी अच्छे प्रोफेशनल की सहायता से ही करें।
अधिकतर यह समस्या ज्यादा वजन वाले लोगों को होती है और इस कारण उनके जोड़ों में भी बहुत दर्द रहता है इसलिए कोशिश करें की शरीर का वजन थोड़ा कम हो सके शरीर का वजन कम होने से जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है और थोड़ा राहत भी मिलती है। इसके लिए आपको अपने खानपान व जीवन शैली में बहुत ध्यान रखना पड़ेगा।
जोड़ों में लचीलापन ना होने के कारण और शरीर में डिहाइड्रेशन के कारण भी दर्द बहुत बढ़ जाता है इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिए, जूस पिएं व खाने में फल या सलाद आदि का सेवन जरूर करें।
यदि आपके जोड़ों या घुटनों में अधिक दर्द है तो उन्हें गर्म पानी की थैली से या फिर किसी गर्म कपड़े से सिकाई कर सकते हैं। इससे जोड़ों के दर्द में थोड़ा आराम मिलता है।
जूते और चप्पलों का सही प्रयोग भी आपके घुटने के दर्द में बहुत आराम देता है इसलिए सही फुटवियर का चुनाव करें जिससे पैरों को आराम मिल सके।
नियमित थोड़ी देर जरूर टहलें और पैदल चलते समय अपनी गति पर बहुत ध्यान रखें कदमों का उचित इस्तेमाल करें, क्योंकि इसका असर आपके घुटनों पर भी पड़ता है।
जहां पर भी आपके घटिया है उस जगह को स्ट्रेच करें धीरे-धीरे आगे व पीछे ले जाने की कोशिश करें जिससे उस स्थान का मूवमेंट हो और वहां पर लचीलापन बना रहे।
गठिया के कारण यदि जोड़ों में अकड़न है तब रनिंग, जॉगिंग जैसी एक्सरसाइज से बचना चाहिए। क्योंकि इससे जोड़ों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे बहुत नुकसान व दर्द हो सकता है।
भारी वजन उठाने से बचें क्योंकि इसका असर आपके जोड़ों पर पड़ता है और जोड़ों पर दबाव के कारण दर्द भी बहुत अधिक बढ़ जाता है।
पुरुषों को ऐसे खेलों से बचना चाहिए जिनमें अचानक हाथ व पैर का मूवमेंट करना पड़े। जैसे -टेनिस, वॉलीबॉल, बॉस्केटबॉल, क्रिकेट आदि।
यदि पैर के घुटने में यह समस्या है तब सीढ़ी पर ज्यादा ऊपर नीचे चढ़ने उतरने से बचना चाहिए क्योंकि इसका असर सीधे घुटने के जोड़ों पर पड़ता है। यदि कहीं बाहर जा रहे हैं तो ऊपर नीचे जाने के लिए लिफ्ट उपलब्ध है तो लिफ्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।
बैठते समय सही मुद्रा में बैठे क्योंकि गलत मुद्रा में बैठने से जोड़ों पर असर पड़ता है यदि पैरों को क्रॉस करके बैठते हैं तो घुटने के जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है, इसलिए इस मुद्रा में बैठने से बचें l
व्यायाम को संयम पूर्वक करें इसमें हड़बड़ाहट या जल्दी बाजी ना करें, कोशिश करें बहुत ही हल्के व्यायाम से शरीर के वजन को नियंत्रित रखें, शरीर का वजन न बढ़ने दें और स्वस्थ आहार अपनाएं नियमित व संयमित जीवनशैली अपनाएं।
इस प्रकार से छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर गठिया के जोड़ों का अकड़न दूर कर सकते हैं और एक्सरसाइज में इन बातों को ध्यान में रखकर आप अपने शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं।