
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Medically Verified By: Dr. Rajiv Sethia
Organ donation with covid history- ऑर्गन डोनेशन या अंगदान को महादान कहा जाता है क्योंकि, अंग दान करके हम अन्य लोगों को लम्बी उम्र और स्वस्थ जीवन जीने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को ऑर्गन डोनेट करने से पहले अपने स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां डॉक्टर को भी बतानी पड़ती हैं। इसी तरह कुछ स्थितियों में लोगों को अंगदान करने से मना भी किया जाता है। जैसे अक्सर लोग सवाल पूछते हैं कि क्या जिन्हें पहले कोविड संक्रमण हो चुका है उन्हें ऑर्गन डोनेशन करना चाहिए या नहीं। दरअसल, जब COVID-19 महामारी (Covid-19 pandemic) की शुरुआत हुई थी, तब से लोगों को मन में कई तरह के डर और सवाल बन रहे हैं। लोगों को मन में यह डर रहता है कि कहीं कोविड वायरस के स्ट्रेन अंगों में छुपे ना हों और अंगदान करने के बाद रिसीपीएंट को संक्रमित न कर दे। आइए डॉक्टरों से जानते हैं कि क्या COVID से ठीक होने के बाद लोग सुरक्षित रूप से अंगदान कर सकते हैं।
एशियन हॉस्पिटल के यूरोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट और रोबोटिक सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. राजीव कुमार सेठिया बताते हैं, “पहले COVID का इतिहास होते ही डोनर को तुरंत अस्वीकार कर दिया जाता था, लेकिन अब अच्छी तरह स्क्रीनिंग करने के बाद और सावधानियां बरतते हुए सुरक्षित तरीके से अंगदान किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि अब अस्पताल यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त स्क्रीनिंग करते हैं कि डोनर पूरी तरह स्वस्थ है और COVID रिपोर्ट नेगेटिव है।
आकाश हेल्थकेयर में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अजीत सिंह बताते हैं, “यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और COVID की रिपोर्ट नेगेटिव है, तो अंगदान में किसी तरह का खतरा नहीं है। हमने इस वायरस को लेकर काफी रिसर्च और अनुभव हासिल कर लिया है।”
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन, सेंट लुइस की एक रिसर्च में भी यह निष्कर्ष सामने आया कि पहले COVID पॉजिटिव रहे डोनर्स की किडनी का ट्रांसप्लांट सुरक्षित है और इससे वायरस का संक्रमण रिसीपीएंट तक नहीं पहुंचता।
भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की स्थितिपर नजर डालें तो अमेरिका और चीन के बाद यह तीसरे स्थान पर है, लेकिन प्रति दस लाख लोगों पर ट्रांसप्लांट की संख्या अभी भी बेहद कम है। द लैंसेट रीजनल हेल्थ – साउथ ईस्ट एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब दो लाख लोग किडनी फेल्योर के लास्ट स्टेज में पहुंचते हैं, लेकिन सिर्फ 11,000 के आसपास ही किडनी ट्रांसप्लांट हो पाते हैं।
महामारी के शुरुआती दौर में स्थिति अलग थी। डॉ. अजीत के अनुसार, उस समय कई अस्पतालों ने संक्रमित या हाल ही में ठीक हुए लोगों से ऑर्गन रिसीव करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाता था। लेकिन अब वैज्ञानिक प्रमाणों ने साबित कर दिया है कि सावधानीपूर्वक जांच के बाद यह पूरी तरह सुरक्षित है।
डॉ. अजीत मानते हैं कि डोनर्स की कमी एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, अंगों को छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना भी मुश्किल काम है। वे कहते हैं, “भारत में ज्यादातर ट्रांसप्लांट अभी भी निजी अस्पतालों में होते हैं। इसीलिए, जागरूकता बढ़ाने और लोगों को ऑर्गन डोनेशन के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है, ताकि लोग बिना आर्थिक बोझ के इलाज करा सकें और सुरक्षित तरीके से ऑर्गन ट्रांसप्लांट भी हो सकें।”
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
मानव शरीर में कई अंगों का दान वैज्ञानिक तरीके से हो सकता है। इनमें हार्ट, लिवर, किडनी, कॉर्निया, हार्ट के वॉल्व के अलावा स्किन और हड्डियां भी दान की जा सकती हैं।