Bruise Marks : आपके शरीर पर तो नहीं पड़ते नील के निशान, जानें क्या है कारण

कई बार चोट लगने से तो कई बार बिना चोट लगे भी यह नील का निशान शरीर पर पड़ जाता है। यदि ऐसा बार-बार हो, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। जानें, उन कारणों के बारे में, जिनकी वजह से शरीर पर नील के निशान पड़ते हैं...

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Written By: Anshumala | Published : September 1, 2019 4:02 PM IST

कल आपने जब अपने पैरों को या शरीर के किसी भी अंग को ध्यान से देखा होगा, तो हो सकता है वहीं कोई निशान ना हो, आज देखा तो वहां नीला-लाल सा एक निशान नजर आ रहा है। छूने या दबाने पर हल्का दर्द भी होता है, क्या आप जानते हैं क्या है यह? आखिर किन कारणों से शरीर पर कहीं भी यह नील निशान (Bruise Marks on Body) पड़ता है, नहीं जानते? इसके कई कारण हो सकते हैं। कई बार चोट लगने से भी यह नील का निशान शरीर (Bruise Marks on Body) पर पड़ जाता है, तो कई बार बिना चोट लगे भी नजर आने लगता है। यदि ऐसा बार-बार हो, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। जानें, उन कारणों के बारे में, जिनकी वजह से आपको शरीर पर नील के निशान (Bruise Marks on Body) पड़ते हैं...

शरीर पर क्यों पड़ते हैं नील के निशान

जब त्‍वचा पर चोट लगती है, रक्‍त धमनियों को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर पर नील के निशान पड़ जाते हैं। बढ़ती उम्र, पोषण की कमी, हेमोफीलिया और कैंसर जैसे कई गंभीर बीमारियों के इलाज, असर के कारण भी शरीर पर नील के निशान पड़ जाते हैं।

पोषक तत्‍वों की कमी

कई बार शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने से भी नील का निशान पड़ जाता है। दरअसल, ब्लड क्लॉट और चोटों को भरने के लिए कुछ विटामिन और मिनरल मुख्य भूमिका निभाते हैं। ऐसे में डाइट में विटामिन के, सी और मिनरल की कमी होने पर शरीर पर नील के निशान दिखाई देने लगते हैं।

कीमोथेरेपी और कैंसर

कैंसर होने पर उसके ट्रीटमेंट में कीमोथेरेपी बेहद जरूरी है। कई बार कीमोथेरेपी के कारण भी शरीर पर नील के निशान दिखाई देने लगते हैं। दरअसल, कीमोथेरेपी होने पर ब्‍लड प्‍लेटलेट्स बहुत नीचे आ जाता है। जब प्‍लेटलेट्स कम होता है, तो शरीर में नील के निशान दिखाई देने लगते हैं।

दवाइयों का अधिक सेवन

कई बार लगातार कुछ दवाओं के सेवन से भी शरीर पर नीले दाग दिखते हैं। नेचुरल सप्‍लीमेंट जैसे फिश ऑयल और लहसुन के अधिक इस्तेमाल से भी खून पतला होता है, जिसके कारण शरीर पर नील के निशान पड़ने लगते हैं।

हीमोफीलिया 

हीमोफीलिया एक अनुवांशिक रोग है। इसमें शरीर से जब खून निकलता है, तो वह जल्दी जमता नहीं है। ऐसे में कई बार किसी भयानक हादसे जैसे सड़क दुर्घटना होने पर इससे पीड़ित व्यक्ति की खून बहना ना बंद होने के कारण मौत भी हो जाती है। यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है। थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को शीघ्र थक्का कर देने की क्षमता होती है। अत्यधिक या बिना वजह से रक्तस्राव या नील पड़ना हीमोफीलिया का भी एक लक्षण हो सकता है।

बढ़ती उम्र 

कुछ बुजुर्गों में भी हाथों-पैरों में नील पड़ना आम होता है। उनमें यह नील का निशान इसलिए पड़ता हैं, क्योंकि रक्त धमनियां वर्षों सूरज की रोशनी का सामना करते हुए कमजोर हो जाती हैं। ये निशान लाल रंग से शुरू होकर, हल्के बैंगनी और गहरे रंग के होते हुए फिर हल्के होकर गायब हो जाते हैं।

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