शिशु को ब्रेस्टफीड कराने से मां को अपना ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मिलती है मदद, जानें और कौन-कौन से खतरे होते हैं कम

जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बहुत ज्यादा होता है लेकिन एक चीज इस जोखिम को कम कर सकती है वो है ब्रेस्टफीड।

WrittenBy

Written By: Jitendra Gupta | Published : November 5, 2021 11:59 AM IST

प्रेगनेंसी के दौरान दुनियाभर में लगभग 9 प्रतिशत महिलाएं इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो जाती हैं, जिसे जेस्टेशनल डायबिटीज भी कहा जाता है। भारत में ऐसा देखा गया है कि करीब 40 लाख महिलाएं, जो अतीत में डायबिटीज का शिकार नहीं थी फिर भी प्रेगनेंसी के बाद जेस्टेशनल डायबिटीज का शिकार हो जाती हैं। जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बहुत ज्यादा होता है लेकिन एक चीज इस जोखिम को कम कर सकती है वो है ब्रेस्टफीड।

जी हां, डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को ब्रेस्टफीड करना चाहिए क्योंकि इससे आपको ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद मिल सकती है।

महिलाओं के लिए ब्रेस्टफीड कराने के फायदे

ब्रेस्टफीड, बच्चे की देखभाल करने और मां-बच्चे के बंधन को मजबूत बनाने का सबसे अच्छा तरीका है। ब्रेस्टफीड कराने से महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस, रुमेटाइड अर्थराइटिस, हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज, गर्भावस्था के बाद वजन घटाने, स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर और डिम्बग्रंथि कैंसर सहित विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के विकास की संभावना को कम करता है।

महिलाओं को ब्रेस्टफीड कराने से न केवल शारीरिक लाभ मिलते हैं बल्कि बच्चे के जन्म के बाद की चिंता से भी मुक्ति मिलतीहै। दरअसल ब्रेस्टफीड ऑक्सीटोसिन नाम का हैप्पी हार्मोन रिलीज करता है, जो मां के मूड को बेहतर बनाता है और नई माताओं में प्रसव के बाद अवसाद के जोखिम को कम करता है।

ब्रेस्टफीड से कैसे होता है डायबिटीज और ब्लड शुगर कंट्रोल?

हाल ही में मां बनी महिलाओं के लिए ब्रेस्टफीड किसी वर्कआउट से कम नहीं है। यह पीरियड्स (मासिक धर्म) के वापस से होने वाली परेशानी को कम करती है और आपको आराम पहुंचाती है। जब तनाव कम होता है तो ब्लड शुगर लेवल कम हो जाता है और प्रसव के बाद महिला के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार कर सकता है।

बता दें कि जब बच्चा स्तनपान करना शुरू करता है, तो कुछ महिलाओं को लो ब्लड शुगर का अनुभव हो सकता है। इसलिए बच्चे को दूध पिलाते समय ग्लूकोज को अपने पास रखना जरूरी होता है। डायबिटीज होने पर स्तनपान कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि महिलाएं अपने स्तनों में सूजन से परेशान होती है, जिसे मास्टिटिस कहा जाता है। स्तनों की सूजन से बचने के लिए माताओं को अपने बच्चों को दोनों स्तनों से दूध पिलाना चाहिए। इसके अलावा महिलाओं को अपने ब्लड शुगर लेवल की भी जांच करते रहना चाहिए। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लेवल दूध की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इतना ही नहीं ये दूध पैदा करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।

कैसे स्तनपान करता है नवजात शिशुओं को प्रभावित

नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान उन्हें बचपन में अल्पपोषण और अतिपोषण दोनों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह उन्हें मोटापे, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग के जोखिम से भी दूर रखता है।

स्तनपान कैसे ब्लड शुगर लेवल को कर सकता है कम ?

दरअसल ब्रेस्टफीड कराने से ब्लड ग्लूकोज को कंट्रोल करने में मदद मिलती है क्योंकि ये ग्लूकोज ब्रेस्ट को दूध का उत्पादन करने में मदद करता है। इसके अलावा यह अतिरिक्त कैलोरी बर्न कर ब्लड शुगर लेवल को कम करता है, जिससे इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ जाती है।