रात में सोते समय अधिक तेजी से फैल सकता है ब्रेस्ट कैंसर,जानें इसकी वजह और साथ ही समझें कैसे गम्भीर बनता है कैंसर

एक नयी स्टडी के अनुसार, कैंसर सेल्स रात में अधिक सक्रिय होती हैं और वे बीमारी को गम्भीर भी बनाती हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 27, 2022 11:54 PM IST

ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए रात में सोना नुकसानदायक साबित हो सकता है क्योंकि, ऐसा करने से उनका कैंसर गम्भीर हो सकता है। यह दावा किया गया है एक नयी स्टडी में जिसके अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर मेटास्टेसिस (that breast cancer metastasis) की प्रक्रिया रात में अधिक तेज गति से होती है। साइंस पत्रिका नेचर (Nature) में छपे एक नये रिसर्च पेपर में उस धारणा को गलत साबित करने वाले तथ्य सामने आए हैं जिसके अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर के बनने और बढ़ने की प्रक्रिया दिन-रात चलती है।  नयी स्टडी के अनुसार, कैंसर सेल्स रात में अधिक सक्रिय होती हैं और वे बीमारी को गम्भीर भी बनाती हैं।

इस स्टडी के परिणाम भविष्य में कैंसर के इलाज के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। स्टडी की लेखिका और मॉल्यूकल ऑन्कोलॉजी की प्रोफेसर निकोला एसेटो कहती हैं कि, "हमारा यह मानना है कि इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा प्रदान करने वाली एजेंसियां भविष्य में बायोप्सी करने या मरीज के इलाज से जुड़े फैसले लेने में आसानी हो सकेगी।“

क्या है ब्रेस्ट कैंसर मेटास्टेसिस?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कैंसर वाली सेल्स नसों में एक जगह से दूसरी जगह तक तैरती हैं तो इस प्रक्रिया के तहत इस स्थिति में कैंसरजन्य सेल्स हड्डियों और जॉइंट्स पर हमला करती हैं। जानकारों के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर अस्थि या हड्डियों की मेटास्टेसिस में प्रवेश करता है तो इसे मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर कहा जाता है। ब्रेस्ट कैंसर मेटास्टेसिस की प्रक्रिया रात के समय तेज हो जाती है और इसके दौरान कैंसर अधिक गम्भीर हो सकता है।

चूहों पर की गयी इस स्टडी  के आधार पर शोधकर्ताओं का दावा है कि, सर्कैडियन रिदम या जैविक प्रक्रिया और कैंसरजन्य सेल्स के बीच के तालमेल के बारे में हमेशा से शोध और अध्ययन किए जाते रहे हैं। नयी स्टडी से यह पता चलता है कि कैंसर के मरीज जब सो रहे हों तब उनके शरीर में ट्यूमर अधिक सक्रिय हो सकता है जिससे ब्रेस्ट कैंसर गम्भीर बन सकता है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि जैविक प्रक्रिया में एक खास समय ऐसा होता है जिसे कैंसरस सेल्स अधिक अनुकूल पाती हैं और इस समय वे अधिक सक्रिय हो जाती हैं। इस स्टडी में पाया गया कि रात के समय सेल्स अधिक एक्टिव हो जाती हैं। लेकिन, इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि लोग रात के समय सोना ही बंद कर दें। ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित मरीजों को रात में पर्याप्त नींद सोना चाहिए।

मरीज की सर्कैडियन रिदम भी कर सकती है कैंसर सेल्स को प्रभावित

बता दें कि इससे पहले साल 2007 में आयी एक स्टडी में कहा गया था कि लोगों की जैविक प्रक्रिया या सर्कैडियन रिदम कैंसर का एक  संभावित कारण हो सकता है। स्टडी में दावा किया गया था कि जिन लोगों के सोने-जागने का समय निश्चित नहीं होता और जो लोग अलग-अलग शिफ्ट्स में काम करते हैं, ऐसे लोगों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक पाया जाता है। हालांकि, शरीर की जैविक प्रक्रिया कई चीजों पर निर्भर करती है जिसमें अनुवांशिकी जैसे कारण भी शामिल हैं।

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