Breast Cancer: AI स्मार्ट मशीनों की मदद से ब्रेस्ट कैंसर की हो रही जांच, बिना सैंपल लिए होगी स्क्रीनिंग

Breast Cancer Awareness Month: ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए जांच करने की क्षमता को और मजबूत किए जाने की जरूरत है, जिसमें AI जैसी टेक्नोलॉजी मदद कर सकती है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : October 17, 2025 5:07 PM IST

Breast Cancer Screening: ब्रेस्ट कैंसर आज के समय में सबसे प्रमुख कैंसरों में से एक बनकर उभर रहा है, जिससे महिलाओं को काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ब्रेस्ट कैंसर के बारे में भी कहा जाता है, कि अगर समय रहते ही स्वास्थ्य की जांच करके इस बीमारी का पता लगा लिया जाए तो इसे जड़ से खत्म करने में मदद मिल सकती है। वहीं अगर ब्रेस्ट कैंसर का समय रहते पता न लग पाए तो इससे मरीज को गंभीर जटिलताएं हो सकती है और इसका इलाज भी उतना ही मुश्किल हो सकता है। इतना ही नहीं बल्कि ब्रेस्ट कैंसर का देरी से पता चलता है और तब इसके लक्षण बढ़ चुके होते हैं तो ऐसे में इलाज के बावजूद भी मरीज की मृत्यु होने का खतरा बना रहता है। इसलिए ब्रेस्ट कैंसर को रोकने के लिए भी जरूरी है कि जितना हो सके एडवांस टेक्नोलॉजी से मशीनें बनाई जाएं जो और प्रभावी रूप से ब्रेस्ट कैंसर का समय रहते पता लगा सके।

कैंसर स्क्रीनिंग में AI से लैस मशीनें

ब्रैस्ट कैंसर अवेयरनेस महीने के अवसर पर यह समझना जरूरी है कि कैंसर की बीमारी से लड़ते-लड़ते हम बहुत मेडिकल साइंस में बहुत प्रगति कर चुके हैं। डॉ. राजीव अग्रवाल सीनियर डायरेक्टर, ब्रेस्ट कैंसर, कैंसर केयर मेदांता हॉस्पिटल के अनुसार अभी और ज्यादा एडवांस होने की जरूरत है और हम उस पर काम कर रहे हैं। मेदांता में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ब्रेस्ट कैंसर की जांच करते हैं। इस तकनीक से कुछ हद तक ब्रेस्ट कैंसर के कारण का पता भी लगाया जा सकता है।

AI से मिल सकती है मदद

मेडिकल साइंस को AI पूरी तरह से बदल सकता है, आप कल्पना कीजिए कि एक कंप्यूटर इतनी सटीकता से मैमोग्राम के दौरान बारिकी से ऐसे बदलावों की जाच कर सकता है, जिन्हें आंख द्वारा लगभग न के बराबर हो। दरअसल ऐसा इसलिए होता है क्योंकि AI डाटा के एल्गोरिदम पर काम करता है और कैंसर व उसके कारण होने वाली बदलावों के पैटर्न को समझता है। सरल शब्दों में कहें तो इससे फाल्स पॉजिटिव रिजल्ट या फिर फॉल्स नेगेटिव रिजल्ट होने की संभावना को हो सकती है। ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण की जांच करके भी इस तकनीक की मदद से स्क्रीनिंग की जा सकती है।

बायोप्सी की नहीं पड़ेगी जरूरत

यह भी सच है कि अगर एआई सफलतापूर्वक अपना काम करता रहा तो लोग धीरे-धीरे इसपर भरोसा करने लग जाएंगे और कम ही मामलों में सैंपल निकालकर टेस्ट करने की जरूरत पड़ेगी, जिस प्रक्रिया को बायोप्सी कहा जाता है। इसके साथ-साथ एआई मरीज की फैमिली हिस्ट्री व लाइफस्टाइल फैक्टर्स के डाटा को भी बढ़ता है, जिससे जेनेटिक व अन्य किसी भी कारण से अगर मरीज को कैंसर का खतरा है, तो उसका पता लगा लेता है।

खुद का बचाव करना जरूरी

ब्रेस्ट कैंसर की जांच और ये बाकी सब काम तो बाद की बातें हैं, सबसे पहले जरूरी है खुद की सावधानी बरतना। खुद के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। उसके लिए आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं -

  • नियमित रूप से जांच कराते रहें और डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करते रहें।
  • अपना खानपान अच्छा और हेल्दी रखें, जितना हो सके बाहर व डिब्बाबंद चीजों का सेवन न करें
  • नियमित रूप से व्यायाम करते रहें, साथ ही योग व मेडिटेशन आदि के लिए भी समय निकालें
  • शरीर के बढ़ते वजन को कंट्रोल करना सबसे जरूरी है, खासतौर पर मेनोपॉज के बाद
  • यदि आप स्मोकिंग करती हैं या शराब पीता हैं, तो उसे आज ही छोड़ दें।
  • डॉक्टर की भूमिका सबसे जरूरी

डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि हम यहां मेदांता में ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों की जांच करने में एआई टेक्नोलॉजी का सहारा लेते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें डॉक्टर की भूमिका कम हो जाती है। किसी भी बीमारी की जांच करने में डॉक्टर की भूमिका आज भी उतनी ही है, जितनी पहले थी।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।