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Breast Cancer: माना जाता है कि ब्रेस्ट कैंसर मुख्य तौर पर शहर की महिलाओं में होने वाला एक आम कैंसर है। लेकिन, अब गांव की महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। गांव की महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर का निदान हो रहा है और वे इसकी वजह से अपनी जान गंवा रही हैं। लेकिन, ऐसे में ज्यादातर लोगों के मन में सवाल आता है कि शहरी महिलाओं में कैंसर इसलिए होता है, क्योंकि उनकी लाइफस्टाइल खराब होती है और वे शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय नहीं होती हैं। जबकि, गांव की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का कोई सवाल ही नहीं होता है, क्योंकि वे फिजिकली काफी एक्टिव रहती है और उनकी जीवनशैली भी नॉर्मल होती है। तो आइए, ऐसे में जानते हैं कि गांव की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
इन कारणों से ब्रेस्ट कैंसर शहरी महिलाओं में ज्यादा होता है, ऐसा हम सभी मानते थे। ऐसा मेरे द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए स्क्रीनिंग कैंपस में साफ दिखाई देता है। पिछले 10 वर्षों से मेरे द्वारा कैंसर डायग्नोसिस, ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए जा रहे कैंसर जागरूकता और स्क्रीनिंग कैम्प्स से एक चिंताजनक तथ्य सामने निकल कर आ रहा है और वह है कि अब गांव की महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में तेजी देखने को मिल रही है।
गांव में रहने वाली महिलाएं, जिनकी कम उम्र में भी शादी हो जाती है, एक से अधिक बच्चों की मां भी हैं, लंबे समय तक स्तनपान कराती हैं, बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत भी करती हैं, उनमें मोटापा भी नहीं है, इन सबके बावजूद भी उन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह बहुत चिंताजनक विषय है।
ऐसा मानते थे कि जितने ज्यादा किसी महिला के बच्चे होंगे और जितना लंबे समय तक वह बच्चों को स्तनपान कराएगी, तो उसे ब्रेस्ट कैंसर से सुरक्षा मिलेगी। यह बात आज भी आंशिक रूप से सही है। लेकिन, अब ब्रेस्ट कैंसर के और भी नए कारण सामने आ रहे हैं।
ब्रेस्ट कैंसर की देर से पहचान, कैंसर का सबसे आम कारण होता है। ज्यादातर महिलाओं ब्रेस्ट की गांठ को नजरअंदाज कर देती हैं। इससे ब्रेस्ट कैंसर गंभीर रूप ले लेता है।
दूसरा कारण होता है, जागरूकता की कमी। महिलाओं को पता नहीं होता है कि कोई गांठ कैंसर का खतरा भी हो सकता है। इसके अलावा, गांव की महिलाओं को अस्पतालों तक पहुंचने में भी देरी हो जाती है।
सिर्फ शहर में ही नहीं, गांव में भी अब रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग बढ़ गया है। पैकेट और प्रोसेस्ड फूड्स खाने से भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इन सब से शरीर का हार्मोनल संतुलन प्रभावित हो रहा है ।
बार-बार गर्भधारण और प्रसव की प्रक्रिया शरीर पर शारीरिक और हार्मोनल दबाव डालते हैं। महिलाओं में एनीमिया, थाइराइड और पोषण की कमी हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाते हैं। ये ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।
महिलाओं को बताना होगा कि महीने में एक बार खुद अपनी जांच करें। अगर ब्रेस्ट या स्तन पर कोई गांठ महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। 40 वर्ष के बाद नियमित स्क्रीनिंग जरूर कराएं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।