ब्रेस्ट कैंसर: अपने ब्रेस्ट की जांच कब-कब करवानी चाहिए, जानिए स्तन कैंसर के लक्षण और उपचार के तरीके

कैंसर के प्रकार और स्टेज के आधार पर उपचार का तरीका अलग-अलग हो सकता है। लेकिन कुछ सामान्य तरीके हैं जिनका उपयोग डॉक्टर और विशेषज्ञ स्तन कैंसर से निपटने के लिए करते हैं।

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Written By: Atul Modi | Published : July 21, 2022 3:58 PM IST

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, कैंसर के बढ़ते मामलों में पहले स्थान पर है। ये कैंसर सबसे अधिक प्रचलित है। यह कैंसर के सभी बोझों का 26.3% हिस्सा है। 2020 के आंकड़ों के अनुसार, 1.78 लाख भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के होने का पता चला, 90,000 से अधिक महिलाओं ने इस बीमारी से अपनी जान गंवाई। अगर ब्रेस्ट कैंसर के कारणों की बात करें तो खराब लाइफस्टाइल, खानपान में बदलाव, शराब का सेवन करना, स्मोकिंग करना, मोटापा आदि कई जीवनशैली से जुड़ी आदतें शामिल हैं। इस बीमारी के कारण हर साल बहुत सारी महिलाएं अपनी जान गवां देती हैं।

डॉ. दीप्तेंद्र सरकार, (कंसल्टेंट सर्जन, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और ब्रेस्ट कैंसर सर्जन) के मुताबिक, "अब भारतीय महिलाएं अपनी ब्रेस्ट हेल्थ के प्रति और भी ज्यादा जागरूक होने लगी है। अब वह थोड़े बहुत लक्षण दिखने के बाद अर्ली स्टेज में ही हॉस्पिटल पहुंच जाती हैं। ऐसा एक दशक पहले देखने को नहीं मिलता था। ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती जांच केवल जीवन बचाने के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि यह ब्रेस्ट बचाने और उपचार के साइड इफेक्ट्स से बचाने में भी बहुत लाभदायक है। भविष्य में डॉक्टरों को भी तकनीकी इलाजों की ओर ज्यादा फोकस करना चाहिए।"

ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग में रेगुलर सेल्फ एग्जाम, क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जाम, मैमोग्राफी और एमआरआई जैसी चीजें शामिल है। अर्ली डिटेक्शन जितना ज्यादा जरूरी है उतना ही ज्यादा जरूरी इस चीज के बारे में जागरूक होना भी है।

डॉ. चंद्रा सीके नायडू, बसावतारकम इंडो अमेरिकन कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट ऑन्कोलॉजिस्ट एंड ऑन्कोप्लास्टिक, ब्रेस्ट सर्जन के मुताबिक, "जागरूकता में कमी को खत्म करना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रारंभिक जांच, बेहतर परिणाम और रोगी के लिए कम शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक आघात से संबंधित है। 30-40 आयु वर्ग की महिलाओं को हर दो साल में क्लिनिकल ब्रेस्ट टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है, जबकि 40 से ऊपर की महिलाओं को इसे अपने वार्षिक मेडिकल चेक-अप रूटीन का हिस्सा बनाना चाहिए।"

डॉक्टरों के मुताबिक टेक्नोलॉजी ने ब्रेस्ट कैंसर को ठीक करने में और मरीजों को बचाने में काफी मदद की है। आज के समय में मौजूद 4k FI जैसी तकनीकों के कारण हम ज्यादा गहराई से देख सकते हैं जिस कारण लिंफ नोड वगेरह को अधिक स्पष्टता से पहचाना जा सकता है। इस तकनीक से सफलता पूर्वक कैंसर से प्रभावित नोड को निकाला जा सकता है। इसका फायदा यह है कि जो लिम्फ नोड कैंसर से प्रभावित नहीं थे या जो हेल्दी थे वह रिमूव होने से बच जाते हैं। इस प्रकार सर्जरी के बाद आने वाली दिक्कतें जैसे सेंसरी डेफिसिट आदि से बचा जा सकता है। इसलिए ही अर्ली डिटेक्शन और लक्षणों की पहचान करना कैंसर से बचने का सबसे बेस्ट तरीका है। हालांकि उपचार से बेहतर हमेशा बचाव जाता है इसलिए इसके रिस्क फैक्टर से बच कर रहना चाहिए।

एक नॉर्मल ब्रेस्‍ट क्‍या होता है?

हेल्थ लाइन के अनुसार, जैसा कि आपको संदेह हो सकता है, मगर वास्तव में 'नॉर्मल ब्रेस्ट' जैसी कोई चीज नहीं होती है। सबके ब्रेस्ट अलग-अलग होते हैं। इसलिए, जब हम सामान्य के बारे में बात करते हैं, तो हमारा मतलब आपके लिए सामान्य है। यह इस बारे में है कि आपके स्तन आमतौर पर कैसे दिखते हैं और महसूस करते हैं और जब यह बदलता है तो इसका क्या अर्थ हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि ओव्यूलेशन के दौरान ब्रेस्ट में परिवर्तन का अनुभव करना बहुत ही आम घटना है।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण - Breast Cancer Symptoms

  • ब्रेस्ट के पूरे या उसके हिस्से में सूजन (भले ही कोई गांठ महसूस न हो)
  • त्वचा का फड़कना (कभी-कभी संतरे के छिलके जैसा दिखना)
  • ब्रेस्ट या निप्पल में दर्द
  • निप्पल का पीछे हटना (अंदर की ओर मुड़ना)
  • यदि निप्पल या ब्रेस्ट की त्वचा जो लाल, सूखी, परतदार या मोटी हो गई है
  • निप्पल डिस्चार्ज (मां के दूध के अलावा)
  • बांह के नीचे या कॉलर बोन के पास सूजी हुई लिम्फ नोड्स (कभी-कभी यह स्तन कैंसर के फैलने का संकेत हो सकता है।)

खुद से ब्रेस्ट कैंसर का पता कैसे लगाएं - Breast self-checks

रोजाना सेल्फ टेस्ट से आपको यह जानने में मदद मिल सकती है कि आपके ब्रेस्ट सामान्य रूप से कैसे दिखते हैं और महसूस करते हैं, ताकि आप परिवर्तनों को जल्दी ही पहचान सकें। इस दौरान क्या देखना है:

  • आपके ब्रेस्ट के आकार, आकार या रंग में अंतर
  • त्वचा का डिंपल या उभार
  • रेडनेस, दर्द या सूजन
  • निप्पल अंदर की ओर होना, असामान्य निर्वहन

ब्रेस्ट सेल्फ-चेक कैसे करें - Breast Self Examination Steps in Hindi

  • एक सीसे के सामने अपने कंधों को सीधा रखें और अपने हाथों को अपने कूल्हों पर रखें। अपने ब्रेस्ट का विज़ुअली टेस्ट करें।
  • अब अपनी बाहों को ऊपर उठाकर उपरोक्त प्रक्रिया को दोहराएं।
  • अपने ब्रेस्ट को महसूस करने के लिए अपनी पीठ के बल लेट जाएं। सबसे पहले, अपने बाएं स्तन की जांच करने के लिए अपने दाहिने हाथ का उपयोग करें।
  • अपनी उंगलियों के पैड का उपयोग करें और गांठ या अन्य परिवर्तनों को महसूस करने के लिए एक गोलाकार गति में आगे बढ़ें। अपनी छाती के बीच से अपनी

    कांख तक और अपने पेट से अपने कॉलरबोन तक पूरे स्तन को ढंकना सुनिश्चित करें।

  • अपने दाहिने ब्रेस्ट की जांच के लिए अपने बाएं हाथ का उपयोग करके दोहराएं।
  • खड़े या बैठे हुए दोहराएं। आपको शॉवर में ऐसा करना आसान लग सकता है।

स्तन कैंसर का इलाज - Breast Cancer Treatment

हेल्थ लाइन के अनुसार, कैंसर के प्रकार और स्टेज के आधार पर उपचार का तरीका अलग-अलग हो सकता है। लेकिन कुछ सामान्य तरीके हैं जिनका उपयोग डॉक्टर और विशेषज्ञ स्तन कैंसर से निपटने के लिए करते हैं:

  • लम्पेक्टोमी: यह तब होती है जब आपका डॉक्टर आपके स्तन को बरकरार रखते हुए ट्यूमर को हटा देता है।
  • मास्टेक्टॉमी: यह तब होती है जब आपका डॉक्टर ट्यूमर और कनेक्टिंग टिश्यू सहित आपके स्तन के सभी ऊतकों को सर्जरी से हटा देता है।
  • कीमोथेरेपी: यह कैंसर का सबसे आम उपचार है, और इसमें कैंसर रोधी दवाओं का उपयोग शामिल है। ये दवाएं कोशिकाओं की पुनरुत्पादन (Reproduce) की क्षमता में हस्तक्षेप करती हैं।
  • रेडिएशन सीधे कैंसर का इलाज करने के लिए रेडिएशन किरणों का उपयोग करता है।
  • हार्मोन और टार्गेटेड थेरेपी का उपयोग तब किया जा सकता है जब हार्मोन या HER2 कैंसर के विकास में एक भूमिका निभाते हैं।