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Written By: Pallavi Kumari | Published : April 7, 2022 10:51 AM IST
ब्रेन स्ट्रोक (brain stroke in hindi) एक तरह का ब्रेन के अंदर अचानक से होने वाला अटैक है , जो मस्तिष्क को खून की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिका के फटने से या दिमाग की नसों में खून का बहना रुकने (ब्लॉकेज) के कारण होता है। दरअसल, किसी भी कारण से जब ब्रेन का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो जाता है स्ट्रोक आ जाता है। ऐसा होने पर दिमाग की कोशिकाएं मरने लगती हैं क्योंकि उन्हें काम करने के लिए जो ऑक्सिजन और पोषण मिलना चाहिए, वो नहीं मिल पाता। स्ट्रोक की अवस्था में इंसान कई बार मुंह तिरछा होने लगता है, हाथ-पैर या शरीर के किसी हिस्से का बेजान हो जाता है, जुबान लड़खड़ाने लगता है और ठीक से ना बोल पाने जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। लेकिन सोचने वाली बात ये है किन इस स्थिति से बचा कैसे जा सकता है। तो, इसके लिए हमें ब्रेन स्ट्रोक के कारणों (brain stroke reasons) के बारे में जानना होगा और फिर इन्हीं चीजों से बचना होगा। इसी बारे में हमने सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर कुणाल बहरानी (Dr. Kunal Bahrani), फॉर्टिस हॉस्पिटल से बात की, जिन्होंने ब्रेन स्ट्रोक के कारण, लक्षण और बचाव के तरीके के बारे में बताया।
अगर किसी को डायबिटीज है तो, इसे कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि डायबिटीज कंट्रोल मेंरहने का मतलब है हाई ब्लड शुगर जो कि ब्लड वेसेल्स और दूसरे अंगों को भी प्रभावित करती है और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाती है।
हाई बीपी के मरीजों को सबसे ज्यादा स्ट्रोक का खतरा होता है। दरअसल, हाई बीपी में धमनियों का नुकसान होता है और कई बार ब्लड वेसेल्स फट सकते हैं या इनसे लीकेज हो सकता है जो कि ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकता है। इसलिए अपनी बीपी को हमेशा 140/90 से नीचे ही रखें।
हाई कोलेस्ट्रॉल और लिपिड का बढ़ा हुआ स्तर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करने का काम करता है। इनके कारण ब्लड वेसेल्स में प्लॉक जमा हो जाते हैं और इस वजह से धमनियों में एथेरोस्क्लेरोसिस का खतरा बढ़ता है। इससे ब्लड वेसेल्स मोटे या सख्त हो जाते हैं और ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में ये स्थिति ज्यादा बढ़ने पर भी ब्रेन स्ट्रोक होता है।
ब्रेन स्ट्रोक का खतरादिल के रोगियों में ज्यादा होता है। दरअसल, दिल के रोगियों में दवाओं की कमी या फिर दूसरी लापरवाहियों से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि दिन आपके ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ा हुआ है और इसका किसी भी कारण से प्रभावित होना पूरे शरीर को प्रभावित करता है।
मोटापा सीधे तौर पर तो नहीं पर दूसरे तरीकों से ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाता है। ये शरीर में डायबिटीज और दिल की बीमारियों का कारण बनता है जो कि आगे चल कर ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकता है। इसलिए मोटापा कंट्रोल करना बेहद जरूरी है।
स्मोकिंग आपके शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। ये पहले तो बीपी बढ़ाता है और फिर इस्केमिक स्ट्रोक के जोखिम को लगभग दोगुना कर देता है।
इस्केमिक स्ट्रोक के पीछे एक बड़ा कारण गर्भनिरोधक गोलियां और गैरकानूनी दवाइयां हो सकती हैं। खास कर कि नए उम्र के लोगों में। दरअसल, ये दवाइयां अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुंचा रही होती हैं, जिससे दिल की बीमारियां, ब्लड वेलेस्ल के नुकसान और अंत में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
स्ट्रेस बीपी बढ़ाता है, नींद की कमी से जुड़ा हुआ है, मोटापा बढ़ाता है और दिल की बीमारियों का भी कारण बनता है। ये तमाम चीजें ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं।
नौजवानों में आज कल खराब लाइफस्टाइल एक चलन बन गया है। लेकिन कम उम्र में तो ये आपको प्रभावित नहीं करती लेकिन 35 की उम्र के बाद ये दूसरी बीमारियों का कारण बनती है और फिर ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को पैदा करती है।
एक्सराइज ना करना कई बीमारियों को बुलावा देती है। जी हां, एक्सरसाइज ना करने से आप मोटापा, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। यही आगे चक कर ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं।
डॉ. कुणाल बहरानी की मानें तो, स्ट्रोक की प्रक्रिया को FAST से समझा जा सकता है
फेस (F): मुंह तिरछा हो जाना।
आर्म (A): अचानक से एक या दोनों हाथों का बेजान हो जाना।
स्पीच (S): जुबान लड़खड़ाने लगना या पूरी तरह से आवाज चली जाना।
टाइम (T): ऐसा हो तो एंबुलेंस बुलाकर तुरंत पास पहुंचे और तुरंत सीटी स्कैन करवाएं
डॉ. कुणाल बहरानी की मानें तो, स्ट्रोक से बचने के तरीके बेहद आसान हैं। जैसे कि
-ब्लड प्रेशर (बीपी) कंट्रोल रखें और इसकी नियमित रूप से जांच करवाएं।
-डायबिटीज कंट्रोल करें और स्ट्रेस ना लें।
-धूम्रपान और नशीले पदार्थों का सेवन करने से बचें।
-कॉलेस्ट्रॉल कम करें।
- सप्ताह में 5 दिन करीब 30 मिनट वर्कआउट जरूर करें।
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