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शरीर के अन्य अंगों की तरह ही हमारे दिमाग का हेल्दी होना भी बहुत जरूरी है। शरीर के अन्य हिस्सों की ही तरह अगर दिमा का भी ठीक से ख्याल न रखा जाए तो दिमाग से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती हैं। दिमाग से जुड़ी कुछ समस्याएं गंभीर व काफी परेशान कर देने वाली हो सकती हैं। इन्हीं परेशान कर देने वाली दिमागी बीमारी में एक डिमेंशिया भी है। आमतौर पर ज्यादातर लोगों नें डिमेंशिया का नाम तो सुना होगा लेकिन बहुत ही कम लोग इस बारे में जानते हैं किय यह दिमाग से जुड़ी एक बीमारी है और काफी खतरनाक भी है। आपको बता दें कि यह बीमारी दिमाग को अंदर ही अंदर खत्म कर देती है और इससे हुए पर्मानेंट डैमेज इलाज से भी ठीक नहीं हो पाता है। इस लेख में हम आपको डिमेंशिया रोग क्या है और इसके लक्षण व कारण क्या है आदि के बारे में बताने वाले हैं। साथ ही डिमेंशियां के इलाज विकल्पों के बारे में भी हम इस लेख में जानेंगे।
डिमेंशियां कोए एक बीमारी नहीं बल्कि कई मानसिक व दिमागी बीमारियों का एक ग्रुप है, जिससे दिमाग के सोचने, समझने व निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है, जो मरीज के दिमाग के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर ही देती है, साथ ही साथ इससे व्यक्ति की याददाश्त भी प्रभावित हो जाती है।
डिमेंशिया की शुरुआती स्टेज में इसके लक्षणों की पहचान करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन कुछ लोग इसका जल्दी पता लगा लेते हैं। याददाश्त से जुड़ी समस्या होना डिमेंशिया का सबसे पहला और स्पष्ट लक्षण हो सकता है, जिसे गलती से इग्नोर नहीं करना चाहिए। इसके अलावा डिमेंशिया में निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं -
दिमाग के अंदर मौजूद तंत्रिका कोशिका (Nerve Cell) डैमेज होना डिमेंशिया होने का प्रमुख कारण है, क्योंकि नर्व सेल्स डैमेज होने के कारण दिमाग ठीक से काम करने में असमर्थ हो जाता है। नर्व सेल डैमेज होने के कई प्रमुख कारण हो सकते हैं जैसे किसी प्रकार की ब्रेन डिजीज, दिमाग में चोट लगना, बहुत ज्यादा शराब पीना, दिमाग में किसी प्रकार का संक्रमण होना। इसके अलावा एचआईवी, लाइम डिजीज और सिफलिस जैसे इन्फेक्शन भी डिमेंशिया का कारण बन सकते हैं।
अभी तक डिमेंशिया को जड़ से खत्म करने के लिए कोई इलाज नहीं बन पाया है। हालांकि, कुछ उपचार विकल्प मौजूद हैं, जिनकी मदद से डिमेंशिया के लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। डिमेंशिया के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए अलग-अलग प्रकार की दवाएं का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ-साथ मरीज को स्पीच थेरेपी व बिहेवियर थेरेपी जैसे ट्रीटमेंट भी दिए जाते हैं, जिसकी मदद से मरीज को हो रही जटिलताओं को कम करने में मदद की जाती है।