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एक मृत व्यक्ति के अंग छह से आठ लोगों को नया जीवन दे सकते हैं। © Shutterstock
एक मृतक के अंगों को तीन लोगों को दान में देकर उनके परिवार के सदस्यों ने मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिससे तीन लोगों को नया जीवन मिला है। 65 वर्षीय मृतक सेवानिवृत्त श्री वाय. के. भल्ला का अंगदान इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टर्स की मदद से ही संभव हो सका। श्री भल्ला का परिवार जरूरतमंद मरीजों को उनके अंग देने के लिए तैयार हो गया, जिसके बाद 19 सितम्बर को उनके दोनों गुर्दे (किडनी) और लीवर दान में दे दिए गए।
वाय. के. भल्ला बाइलेटरल सेरेब्रल इन्फर्क्शन से पीड़ित थे। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें दिमाग को खून पहुंचाने वाली धमनियों/आर्टरीज के ब्लॉक हो जाने के कारण दिमाग तक आक्सीजन नहीं पहुंच पाती। मरीज को जब 16 सितम्बर को इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, तब उनकी हालत बहुत खराब थी। उनका एप्निया टेस्ट किया गया, जिसके बाद 19 सितम्बर को दोपहर 12.15 बजे उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
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इसके बाद डॉक्टर्स ने परिवार के सदस्यों को सलाह दी कि उनके शरीर के अन्य स्वस्थ अंगों को दान में दे देना चाहिए। इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कन्सलटेंट, न्यूरोलॉजी डॉ. पी. एन. रंजन, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर ज्योति शर्मा और कैडावेरिक ऑर्गन डोनेशन प्रोग्राम के इन्चार्ज डॉ. विकास संगवान ने अंगदान की पूरी प्रक्रिया के बारे में परिवार को जानकारी दी।
65 वर्षीय मृतक सेवानिवृत्त श्री वाय. के. भल्ला।
परिवार से सहमति मिलने के बाद रीनल ट्रांसप्लांट, सीनियर कन्सलटेंट डॉ. संदीप गुलेरिया और लीवर ट्रांसप्लांट के सीनियर कन्सलटेंट डॉ. नीरव गोयल ने शाम सात बजे एनेस्थिसिया, क्रिटिकल केयर एवं नर्सिंग टीमों के सहयोग से ऑर्गन रीट्राइवल प्रक्रिया शुरू कर दी। एक लीवर एवं एक किडनी का ट्रांसप्लांट इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में ही किया गया, जबकि दूसरी किडनी को नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा दिल्ली के एक अन्य निजी अस्पताल को भेज दिया गया।
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इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में एक किडनी दिल्ली की 41 वर्षीय महिला में ट्रांसप्लांट की गई। यह महिला क्रोनिक किडनी फेलियर से पीड़ित थी और पिछले 18 सालों से डायलिसिस पर थी। उसके परिवार में कोई सही डोनर न मिलने के कारण वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थी। लीवर ट्रांसप्लांट नोएडा के एक 48 वर्षीय पुरुष में किया गया। यह मरीज पिछले चार सालों से लीवर सिरोसिस से पीड़ित था।
सेवानिवृत्त मेजर जनरल डॉ जखतार सिंह ने बताया, ‘‘भारत में अंगदान की दर 0.26 प्रति मिलियन है, जबकि अमेरिका में यह दर 26, स्पेन में 35.3 और क्रोएशिया में 36.5 है (ऑर्गन इंडिया डॉट ओआरजी की रिपोर्ट के अनुसार)। इससे साफ है कि हम मृतक अंगदान की दृष्टि से इन देशों से बहुत पीछे हैं और इसका मुख्य कारण यह है कि आज भी लोगों में अंगदान के बारे में जागरूकता की कमी है।’’
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डॉ. पीएन रंजन ने कहा, ‘‘जब आप अपने प्रियजनों को खो देते हैं, तो उस समय आप इस तरह के मुश्किल फैसले लेने की अवस्था में नहीं होते। यह परिवार भी गहरे दुख में था लेकिन मेरी टीम के सहयोग से हम परिवार को इस नेक काम के लिए तैयार करने में सफल रहे।’’