
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Constipation treatment: कब्ज एक बहुत ही आम बीमारी बन चुकी है और हर किसी को कभी न कभी हो ही जाती है। लेकिन देखा गया है कि कुछ लोगों को काफी लंबे समय तक रहती है और स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। वैसे तो मेडिकल स्टोर पर कई ओवर द काउंटर दवाएं व प्रोडक्ट्स आदि मिल जाते हैं, जिनकी मदद से कब्ज को दूर किया जाता है। लेकिन इनका इस्तेमाल बंद होते ही कब्ज की समस्या फिर से होने लगती है, जो कि एक गंभीर स्थिति की ओर इशारा करती है। इसलिए कब्ज को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से इस बारे में सलाह ले लेनी चाहिए। दिल्ली शालीमार बाग के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सीनियर एंड हेड, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेप्टोलॉजी एंड एंडोस्कोपी डॉक्टर राजेश उपाध्याय ने कब्ज के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी। यदि आप भी कब्ज से परेशान हैं, तो आपको डॉक्टर राजेश द्वारा दी गई इन जानकारियों के बारे में जरूर जानना चाहिए।
डॉक्टर राजेश उपाध्याय के अनुसार जब किसी व्यक्ति की बाउल मूवमेंट (मल को सरकाने की प्रक्रिया) खराब हो जाती है, तो उस स्थिति को कब्ज कहा जाता है। मलत्याग के दौरान जरूरत से ज्यादा जोर लगना, मल अधिक कठोर होना या फिर नियमित रूप से मल न आना आदि ये सभी कब्ज का ही हिस्सा है। डॉक्टर राजेश के अनुसार बाउल मूवमेंट हर व्यक्ति की अलग-अलग होती है और एक दिन में तीन बार या फिर तीन दिन में एक बार मल आना नॉर्मल हो सकता है। हालांकि, यदि आपका पेट रोजाना साफ होता है, तो आपको तीन दिन तक इंतजार नहीं करना चाहिए और इस बार में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
डॉक्टर राजेश उपाध्याय के अनुसार हाल ही में आपकी लाइफस्टाइल और डाइट की आदतों में कुछ बदलाव होने के कारण ही अक्सर कब्ज की समस्या होती है, उदाहरण के लिए ज्यादा फास्ट फूड खाना कब्ज की समस्या पैदा कर सकते हैं। कब्ज के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं जिसमें सामान्य कारकों से लेकर बीमारियां भी हो सकती हैं। कुछ कारक हैं जो कब्ज के खतरे को ज्यादा बढ़ाते हैं जैसे पुरुषों की तुलना में महिलाएं, बढ़ती उम्र, सेडेंटरी लाइफस्टाइल और डाइट में कम फाइबर लेना आदि। सिर्फ लाइफस्टाइल और डाइट ही नहीं कुछ प्रकार की दवाएं और कैल्शियम व आयरन जैसे सप्लीमेंट्स भी कब्ज का कारण बन सकते हैं।
डॉक्टर राजेश उपाध्याय के अनुसार कब्ज का इलाज शुरूआत में नोन-फार्मोलॉजिकल (बिना दवाओं के) तरीकों से किया जाता है, जिनमें आमतौर पर शारीरिक गतिविधियां बढ़ाना, डाइट में तरल पदार्थ और फाइबर फूड्स लेना और मलत्याग की इच्छा को नजरअंदाज न करना आदि। फोडमैप (Fermentable oligosaccharides, disaccharides, monosaccharides and polyols) डाइट कम लेकर भी काफी फायदा मिल सकता है। यदि इन तरीकों से इलाज न हो पाए तो फार्मोलॉजिकल ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है, जिनमें मरीज को लैक्सेटिव (दवाओं या सिरप के रूप में) सिंथेटिक फाइबर, ओस्मोटिक एजेंट्स, गट स्टीमुलेंट्स और स्टूल सॉफ्टनर्स आदि दिए जाते हैं।
डॉक्टर राजेश उपाध्याय के अनुसार कब्ज की लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क जरूर कर लेना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि लंबे समय से कब्ज रहना या फिर समय रहते कब्ज का इलाज न करने स्थिति गंभीर हो जाती है और ऐसे में दवाओं को काम करने में भी समय लग सकता है। यदि आपका पेट साफ नियमित रूप से हो रहा है और अचानक से कब्ज के लक्षण महसूस होने लगें तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।