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पेट को हेल्दी रखकर हड्डियों को किया जा सकता है मजबूत, जानिए हड्डियों और आंतों के बीच संबंध

स्टडी के अनुसार आंतों और हड्डियों के घनत्व यानी बोन डेंसिटी के बीच गहरा संबंध है। जब ये संबंध बिगड़ता है तो ज्वाइंट पेन होने लगता है।

पेट को हेल्दी रखकर हड्डियों को किया जा सकता है मजबूत, जानिए हड्डियों और आंतों के बीच संबंध

Written by Atul Modi |Published : March 8, 2024 9:23 PM IST

पैरों और घुटनों में दर्द, ये वो आम समस्या है जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ अधिकांश महिलाओं को होने लगती है। शायद ही कोई ऐसी उम्रदराज महिला होगी, जिसे यह परेशानी न हो। दरअसल, जिंदगीभर पूरे परिवार का ध्यान रखने वाली महिलाएं अक्सर अपनी सेहत का ध्यान रखना भूल जाती हैं और आखिरकार कई बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। पैरों या घुटनों में दर्द इन्हीं बीमारियों में से एक है। आमतौर पर माना जाता है कि उम्र और वजन बढ़ने के कारण यह समस्या होती है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक स्टडी ने इस सोच को बदल दिया है। इस स्टडी के अनुसार आंतों और हड्डियों के घनत्व यानी बोन डेंसिटी के बीच गहरा संबंध है। जब ये संबंध बिगड़ता है तो ज्वाइंट पेन होने लगता है। यह स्थिति महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले अधिक नजर आती है। ऐसे में महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि आंतों और हड्डियों के बीच क्या संबंध है।

इसलिए है दोनों में संबंध

दरअसल, आंतों में अनगिनत सूक्ष्मजीव रहते हैं, इन्हें गट माइक्रोबायोटा कहा जाता है। ये गट माइक्रोबायोटा मिलकर शरीर के कई महत्वपूर्ण काम करते हैं। इम्यून रेगुलेशन और पोषक तत्वों के अवशोषण के साथ ही ये हड्डियों को सेहतमंद रखने में भी मददगार होते हैं। हाल ही में हुई स्टडी में महिलाओं की आंतों और बोन डेंसिटी के बीच गहरा संबंध मिला। जिसके अनुसार गट माइक्रोबायोटा शरीर में बोन मेटाबॉलिज्म को बनाएं रखने के लिए जरूरी है। बोन मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से हड्डियों को बनाने और टूटने से बचाने का काम करता है। ऐसे में गट माइक्रोबायोटा कमजोर होने पर इसका सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है।

डिस्बिओसिस है खतरनाक

माइक्रोबायोटा का बैलेंस बिगड़ने की स्थिति को डिस्बिओसिस कहा जाता है। स्टडी के अनुसार डिस्बिओसिस से हड्डियों के घनत्व में भी कमी आती है। इसी के साथ शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (एससीएफए) के उत्पादन पर भी इसका असर पड़ता है। एससीएफए गट बैक्टीरिया के जरिए भोजन से मिलने वाले फाइबर को फर्मेंट करने में मदद करता है। इन्हीं के कारण हड्डियां कैल्शियम का ठीक से अवशोषण कर पाती हैं और उन्हें टूटने से बचाती हैं। लेकिन जब एससीएफए कम होता है तो बोन मिनरल डेंसिटी यानी बीएमडी में कमी आने लगती है और हड्डियों को नुकसान होने लगता है। यह स्थिति विशेषकर महिलाओं में ज्यादा होती है।

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हार्मोन चेंज भी कारण

बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में कई हार्मोनल चेंज होते हैं। मेनोपॉज भी इनमें से एक है। इन परिवर्तनों के कारण भी हड्डियों पर असर पड़ता है। मेनोपॉज के साथ ही महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम बनने लगता है। जिसका असर बोन डेंसिटी पर पड़ता है। यही कारण है कि जैसे-जैसे एस्ट्रोजन का लेवल कम होता है, महिलाओं को ज्वाइंट पेन होने लगता है। साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि महिलाएं आपकी आंतों की सेहत का खास ध्यान रखें।

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