
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Vivek Mahajan
bone density test (AI generated image)
हड्डियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर आपकी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं तो उससे न सिर्फ बोन फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है, साथ ही साथ हड्डियों से ही जुड़ी कई बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर अब लोग सावधान भी होने लगे हैं, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि आपको पता कैसे चलेगा कि आपकी हड्डियां कमजोर पड़ रही हैं। अगर सीधा बोन फ्रैक्चर होने के बाद या हड्डियों से जुड़ी कोई बीमारी होने के बाद ही इस बारे में पता चला तो फिर फायदा क्या हुआ। आज के समय में बहुत ही कम लोगों को बोन डेंसिटी टेस्ट के बारे में जानकारी नहीं है, बल्कि अगर आप अपनी हड्डी को हेल्दी रा चाहते हैं तो इस बारे में सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।
ISIC Multispeciality Hospital में ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट के चीफ ऑफ जॉइंट रिप्लेसमेंट एंड एचओडी डॉ. विवेक महाजन ने बताया कि हमारी हड्डियां उम्र के साथ-साथ कमजोर पड़ने लगती हैं और कई बार तो हड्डियों की कमजोरी का पता तब चलता है जब सामान्य रूप से गिरने या कोई मामूली चोट लगने पर ही फ्रैक्चर आ जाता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि समय-समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट कराते रहना चाहिए। यह टेस्ट बताता है कि आपकी हड्डियां कितनी मजबूत हैं और उनमें ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) का खतरा है या नहीं।
अगर आसान भाषा में कहें तो बोन डेंसिटी टेस्ट एक बहुत ही आसान और सुरक्षित टेस्ट है और इसमें किसी तरह का दर्द भी नहीं होता है। इसमें खास एक्स रे तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसे डेक्सा स्कैन (DEXA Scan) कहा जाता है। इस स्कैन की मदद से हड्डियों में मिनरल्स की मात्रा का पता लगाया जाता है यानी यह पता लगता है कि आपकी हड्डियों में मिनरल्स कितनी मात्रा में है और आपकी हड्डियां कितनी मजबूत या कितनी कमजोर हैं। यह जांच आमतौर पर रीढ़ (Spine), कूल्हे (Hip) और कभी-कभी कलाई की हड्डी पर की जाती है।
यह टेस्ट आसान और दर्द रहित तो होता ही है, साथ ही खास बात यह भी है कि इस टेस्ट की पूरी प्रोसेस में सिर्फ 10 से 15 मिनट का ही समय लगता है और इसके लिए आपको कोई खास तैयारी करने की भी जरूरत नहीं होता है और न ही आपको बाद में रेस्ट आदि करने की जरूरत होती है। जांच पूरी होने के तुरंत बाद व्यक्ति अपनी सामान्य दिनचर्या के काम कर सकता है।
जैसा कि अब हम जान चुके हैं कि उम्र के साथ-साथ हड्डियां कमजोर होती हैं, इसलिए 50 वर्ष की उम्र के बाद यह टेस्ट करा लेना चाहिए ताकि यह पता लग सके कि आपकी हड्डियां कितनी कमजोर पड़ गई हैं। खासतौर पर महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हड्डियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं, इसलिए इस उम्र में बोन डेंसिटी टेस्ट करा लेना चाहिए। हालांकि, इस बात का ध्यान भी रखें कि उम्र कोई भी हो बोन डेंसिटी टेस्ट कराने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर पूछ लेना चाहिए। इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी हैं, जिनमें बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है -
हड्डियों से जुड़ी कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनका अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो वे समय के साथ-साथ हड्डियों को गंभीर रूप से कमजोर कर सकती हैं जैसे कि ऑस्टियोपोरोसिस जिसे "Silent Disease" भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके शुरुआती चरण में इसके कोई खास लक्षण नहीं होते और लक्षण तब दिखने लगते हैं जब स्थिति गंभीर हो जाती है।
वहीं अगर आप समय-समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट कराते हैं, तो स्थिति के गंभीर होने से पहले ही उसका पता लग पाता है और ऐसे में समय रहते हड्डियों की कमजोरी का पता चल जाए, तो सही खानपान, नियमित व्यायाम, कैल्शियम और विटामिन D की पर्याप्त मात्रा तथा जरूरत पड़ने पर दवाओं की मदद से हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है और फ्रैक्चर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल बोन डेंसिटी स्कैन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।