
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Bollywood Actor Sanjay Mishra Hairline Fracture: हिंदी फिल्मों और टीवी इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता संजय मिश्रा (Bollywood Actor Sanjay Mishra) ने हाल ही में पब्लिकली यह बात स्वीकार की है कि उन्हें हेयरलाइन फ्रैक्चर है। संजय मिश्रा ने खुद अपने सोशल मीडिया पर इस बारे में लिखा और अपने फैंस को अपनी बीमारी के बारे में बताया। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए संजय ने बताया कि उन्हें हेयरलाइन फ्रैक्चर होने की पुष्टि डॉक्टरों द्वारा की गयी है। अभिनेता ने इस पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की जिसमें उन्होंने शोल्डर को सपोर्ट देने वाला एक ब्रेस पहना हुआ है। अस्पताल में ही खींची गयी इस तस्वीर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभिनेता को काफी तकलीफ हो रही है। (Bollywood Actor Sanjay Mishra suffering from Hairline Fracture)
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हेयरलाइन फ्रैक्चर को हेयरलाइन क्रैक (Hairline Crack) या स्ट्रेस फ्रैक्चर (Stress Fracture) भी कहा जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार किसी खास प्रकार की गतिविधि को बहुत अधिक करने से होता है। किसी खास गतिविधि की अवधि या इटेंसिटी बढ़ाने से फ्रैक्चर की समस्या हो सकती है। जैसे कि कोई टेनिस प्लेयर जब अचानक से अपने स्टाइल में बदलाव करे या कोई एथलिट अपने दौड़ की अवधि या दूरी बढ़ा दे या जिम में एक्सरसाइज करते समय अधिक इंटेसिटी वाली या कठिन एक्सरसाइज करने लगे तो इससे हेयरलाइन फ्रैक्चर की स्थिति बन सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार हेयरलाइन फ्रैक्चर के कई प्रकार हो सकते हैं। आर्मी की परेड में हिस्सा लेने वाले लोगों को लम्बे समय तक मार्च या परेड करने की वजह से भी उन्हें फ्रैक्चर हो जाता है। वहीं, बच्चों में भी हल्के या गम्भीर प्रकार के फ्रैक्चर हो सकते हैं। इसी तरह बुजुर्गों में अक्सर देखा जाता है कि बिना गिरे या चोट लगे बिना भी उन्हें फ्रैक्चर हो सकता है।
इसी तरह ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) के मरीजों में भी हेयरलाइन फ्रैक्चर्स का रिस्क (risk of hairline fractures) बहुत अधिक होता है।
हेयरलाइन फ्रैक्चर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं। यूं तो हेयरलाइन फ्रैक्चर अपर बॉडी पार्ट्स में भी हो सकता है जो किगिरने या किसी गम्भीर प्रकार की चोट लगने से हो सकता है। लेकिन, आमतौर पर शरीर के लोअर पार्ट या निचले हिस्से से जुड़ी हड्डियों में स्ट्रेस फ्रैक्चर के मामले अधिक देखे जाते हैं। अक्सर, इस प्रकार के फ्रैक्चर में पैर और पांवों की हड्डियों या शरीर के अन्य हिस्सों की हड्डी में मामूली सा फ्रैक्चर हो जाता है। इस हल्के फ्रैक्चर को ही हेयरलाइन फ्रैक्चर हो कहा जाता है।
पैरों और पांवों की हड्डियों में हेयरलाइन फ्रैक्चर या स्ट्रेस फ्रैक्चर का खतरा अधिक होता है क्योंकि, भागने-दौड़ने या अन्य गतिविधियों के दौरान इन हड्डियों पर ही सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है। पैरों के निचले हिस्सों की हड्डियों काफी पतली होती है और दौड़ते या कूदते समय इनम पर काफी अधिक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए आमतौर एड़ियों (heel), एंकल बोन्स (ankle bones) और पांव के ऊपरी हिस्से में मौजूद हड्डियों में हेयरलाइन फ्रैक्चर होने की घटनाएं सबसे अधिक देखी जाती हैं। (most common spots of hairline fracture) इसीलिए, जब पांवों की हड्डियों में दर्द या हिप्स की हड्डियों में दर्द की शिकायत हो तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।

हेयरलाइन फ्रैक्चर की जांच करने के लिए सबसे पहले फिजिकल एक्जामिनेशन (Physical Examination) किया जाता है। इसके तहत शरीर के प्रभावित हिस्से पर थोड़ा दबाव बनाते हुए यह चेक करते हैं कि वहां छूने से मरीज को दर्द हो रहा है या नहीं। मरीज को महसूस होने वाले दर्द के आधार पर मरीज को आगे के टेस्ट और उपचार किया जाता है।
फिजिकल एक्जामिनेशन के बाद हेयरलाइन फ्रैक्चर के निदान के लिए एमआइआई स्कैन (MRI Scan) कराने की सलाह दी जाती है। इस टेस्ट की मदद से हड्डियों की इमेजिंग की जाती है और इसके लिए मैग्नेट (magnet) और रेडियो वेव्स (radio waves) का इस्तेमाल किया जा सकता है।
एमआरआई के बाद एक्स-रे कराने की सलाह दी जाती है। हालांकि, चोट लगने के ठीक बाद एक्स-रे कराने से हेयरलाइन फ्रैक्चर दिखाई नहीं देते इसीलिए, कुछ सप्ताह बाद हेयरलाइन फ्रैक्चर के सबूत दिखायी दे सकते हैं।
हर फ्रैक्चर की गम्भीरता के आधार पर आर्थोपेडिक उनके इलाज के लिए अलग-अलग तरीके (methods for treatment of hairine fracture) इस्तेमाल करते हैं। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन की सलाह देते हैं और उसके परिणामों के आधार पर उपचार के तरीके अपनाए जाते हैं।आमतौर पर कम गम्भीर हेयर लाइन फ्रैक्चर के इलाज के लिए इस तरह के उपाय अपनाए जाते हैं-
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई बीमारी और उसके उपचार से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)
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