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Ajay Devgan OCD : बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन को एक खास तरह का डिसॉर्डर (Bollywood Actor Ajay Devgan have OCD Disorder) है जिसमें व्यक्ति को बार-बार हाथ धोने की इच्छा होती है। ओसीडी या ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (Obsessive-Compulsive Disorder) नाम के इस डिसॉर्डर में लोगों को साफ-सफाई की इतनी आदत हो जाती है कि वो सनक के स्तर तक पहुंच जाती है। अजय देवगन को भी यही समस्या है जिसका खुलासा कुछ दिनों पहले अजय देवगन की पत्नि और अभिनेत्री काजोल (Ajay Devgan's wife) ने किया। दरअसल, कुछ समय पहले अजय देवगन टेनिस एल्बो (Tennis Elbo) का इलाज करा रहे थे। इसी दौरान काजोल (Kajol) ने रणवीर अलहाबादिया (Ranveer Allahabadia) के पॉडकॉस्ट में खुलासा किया कि अजय देवगन को ओसीडी की भी समस्या है।
इस सेगमेंट में काजोल ने बताया कि अजय देवगन बहुत अच्छा खाना बनाते हैं और वे साफ-सफाई से खाना (Ajay Devgan cooks food) बनाते हैं। काजोल ने कहा कि किसी भी चीज को उंगलियों से भी छूने के बाद अजय अपना हाथ धोने लगते हैं। यह ओसीडी के बॉर्डर लाइन (OCD Border line) पर हैं। अजय किसी भी चीज को टच करने के बाद बार-बार हाथ धोते (Washing hands repeatedly) हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके हाथ से गंध आ रही है। इसलिए वे किसी भी चीज को छूने के बाद वह बार-बार अपना हाथ धोते हैं।
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ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) एक कॉमन बीमारी और यह गम्भीर नहीं मानी जाती है। लेकिन, इस बीमारी में लोगों को चीजों को व्यवस्थित रखने की आदत होती हैं और अगर कुछ भी अस्त-व्यस्त हो जाए तो वे परेशान हो जाते हैं। इसी तरह बार-बार नहाने, हाथ धोने और सैनिटाइजर के इस्तेमाल करने जैसी आदतें भी ओसीडी से पीड़ित लोगों में देखी जाती हैं। काजोल के मुताबिक अभिनेता अजय देवगन को बार-बार हाथ धोने की आदत है जो कि ओसीडी का एक लक्षण है। बता दें कि, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (एन.आई.एम.एच.) के अनुसार, अमेरिका में लगभग 1.2% वयस्कों में ओसीडी है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार ओसीडी की समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। लेकिन, कुछ लोगों में इसका खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। इसके कई कारण हो सकते हैं-
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशन उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।