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Written By: Yogita Yadav | Published : July 25, 2019 3:31 PM IST
अगर लगातार टेस्ट करवाने के बाद भी आपको अपनी बीमारी समझ में नहीं आ रही है तो एक बार अपना पॉश्चर ठीक करके देखिए। युवाओं में बदन दर्द की सबसे बड़ी वजह गलत पॉश्चर में बैठना है।
अगर आप घंटों लगातार एक ही पॉजीशन (Body Posture) में खड़े या बैठे रहते हैं तो बॉडी में पेन यानी बदन दर्द रहना आपकी सामान्य समस्या हो सकती है। इन दिनों अधिकांश लोग शरीर के किसी न किसी हिस्से में दर्द (Body Posture) से परेशान हैं। इनमें ज्वांट, कमर, गर्दन और छाती का दर्द भी शामिल है। अगर लगातार टेस्ट करवाने के बाद भी आपको अपनी बीमारी समझ में नहीं आ रही है तो एक बार अपना पॉश्चर (Body Posture) ठीक करके देखिए। युवाओं में बदन दर्द की सबसे बड़ी वजह गलत पॉश्चर में बैठना है।
हाल ही में हुए कई शोध इस बात की तस्दीक करते हैं कि युवाओं में कमर और गर्दन में दर्द (Body Posture) के मामले बढ़ रहे हैं। जबकि अभी तक ज्वाइंट पेन को बढ़ती उम्र का संकेत माना जाता था। लगातार बैठे रहने से जोड़ों के दर्द की यह समस्या अब युवाओं में भी देखने में आ रही है।
90 प्रतिशत लोग अपने जीवन के किसी-न-किसी स्तर पर कमर दर्द (Body Posture) से पीड़ित रहते हैं। कई बार यह इतना गंभीर हो जाता है कि काम करना ही मुश्किल होने लगता है। कामकाजी लोगों में कमर व गर्दन दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है, विशेषकर उन युवाओं में, जो आइटी इंडस्ट्री या बीपीओ में डेस्क जॉब करते हैं या कंप्यूटर के सामने लगातार कई घंटे बैठे रहते हैं।
हमारा शरीर कई ज्वाइंट्स को साथ मिलाकर खड़ा होता है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने शरीर को आराम के साथ व्यायाम भी दें। असल में शरीर चुस्त–दुरुस्त तभी रहेगा जब हम इन दोनों का मिश्रण अपने रूटीन में शामिल करेंगे। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से कशेरूकाओं के बीच स्थित शॉक-एब्जार्बिंग डिश पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जिससे कमर की मांसपेशियां थक जाती हैं। गलत पॉस्चर में बैठना इस स्थिति को और गंभीर बना देता है।
बदन दर्द को बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक गलत बॉडी पॉश्चर है। बॉडी पॉस्चर ठीक नहीं होने से रीढ़ की हड्डी का अलाइनमेंट बिगड़ जाता है। इससे कमर के निचले हिस्से और गर्दन में दर्द होता है। कमर दर्द से बचने के लिए हमेशा कमर को सीधी और पीछे की ओर करके इस तरह बैठें कि शरीर का भार दोनों हिप्स पर बराबर हो। यह भी जरूरी है कि एक ही पॉजीशन में 30 मिनट से ज्यादा न बैठें।
फिजिकली एक्टिव रहें, नियमित एक्सरसाइज और योग करें। पैदल चलना बोन मास को बढ़ाने में सहायक होता है। रेगुलर वर्कआउट करने से वजन कंट्रोल में रहता है, जिससे मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
लगातार कई घंटों तक एक ही पॉजीशन में एक ही जगह बैठे रहना अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ है। इसलिए कितना भी जरूरी काम हो यह जरूरी है कि उसके बीच से ब्रेक लें।
हर घंटे में एक बार अपनी कुर्सी से उठें तथा अपनी गर्दन और कमर को 30 सेकेंड तक स्ट्रेच करें।
कुर्सी पर बैठे-बैठे गर्दन को विपरीत दिशा में दायें-बायें, आगे-पीछे हाथों से 5-5 सेकेंड धकेलें। स्मूदली ऊपर-नीचे, दायें-बायें भी 10-10 सेकेंड कर सकते हैं।
जिस भी पोजिशन में आराम मिले, उसे दोहराएं। ऐसा पूरे वर्किंग आवर में रोज कम-से-कम तीन बार करें।
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