
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Updated : February 3, 2026 3:39 PM IST
Medically Verified By: Dr. Priti Agarwal
World Cancer Day: हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इसकी रोकथाम करना, कैंसर की जल्दी पहचान करना और इसके उपचार को बढ़ावा देना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, साल 2022 में वैश्विक स्तर पर कैंसर के लगभग 2 करोड़ नए मामले और 97 लाख मौतें दर्ज की गई थीं। वहीं, अनुमान है कि साल 2050 तक कैंसर के नए मामलों में 87.5 फीसदी की वृद्धि होगी। आपको बता दें कि पुरुषों में मुंह, फेफड़े, प्रोस्टेट और पाचन-तंत्र के कैंसर सबसे आम हैं। वहीं, महिलाओं में स्तन, सर्वाइकल और गर्भाशय के कैंसर सबसे आम हैं। कैंसर से हर साल लाखों लोग अपनी जान गंवाते है, इसलिए जरूरी है लोगों में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके इलाज को हर व्यक्ति के लिए आसान बनाना। सबसे जरूरी होता है कि कैंसर का जल्दी निदान। अगर कैंसर की जल्दी पहचान होगी तो इसका इलाज संभव है और कैंसर रोगी की जान बचाई जा सकती है। कैंसर की जांच के लिए आमतौर पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट, स्कैन और बायोप्सी करवाते हैं। आइए, आइए, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. प्रीति अग्रवाल (Dr. Priti Agarwal, Sr. Consultant - Medical Oncology, Narayana Hospital Jaipur) से जानते हैं कैंसर की जांच के लिए क्या है इसकी प्रक्रिया-

जब कैंसर के लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर सबसे पहले ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। ब्लड टेस्ट को शुरुआती जांच के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ब्लड टेस्ट की मदद से खून में हीमोग्लोबिन, सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स की संख्या मापी जाती है। कैंसर रोगियों में ब्लड काउंट असामान्य होता है, इस स्थिति में कैंसर का शक पैदा होता है और फिर डॉक्टर आगे की जांच करवाते हैं।
कुछ मामलों में डॉक्टर ट्यूमर मार्कर नामक ब्लड टेस्ट करवाते हैं। हालांकि, ब्लड टेस्ट से कैंसर की पुष्टि कभी नहीं की जाती है। ब्लड टेस्ट में सिर्फ कैंसर के संकेत मिलते हैं और इसी के आधार पर आगे की जांच तय की जाती है।

जब ब्लड टेस्ट में कैंसर से जुड़े कुछ संकेत दिखते हैं, तब डॉक्टर स्कैन कराने की सलाह देते हैं। इसमें अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई और पीईटी स्कैन आदि करवाया जाता है। स्कैन की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें ली जाती हैं। इससे पता चलता है कि शरीर के अंदर कोई गांठ, सूजन या असामान्य वृद्धि तो नहीं है। स्कैन से ट्यूमर के आकार का भी सही पता चल पाता है। ट्यूमर कहां विकसित है और कौन-से अंगों तक फैला है, स्कैन की मदद से ये सभी पता लगाया जाता है। स्कैन से सिर्फ गांठ का पता चल पाता है, इससे यह पता नहीं चलता है कि यह गांठ कैंसर है की नहीं।
बायोप्सी को कैंसर की पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है। इसमें गांठ या टिशू का एक छोटा-सा हिस्सा निकाला जाता है और इसे जांच के लिए भेजा जाता है। टिशू को माइक्रोस्कोप के नीचे देखा जाता है, इससे कोशिकाओं की बनावट समझी जाती है। बायोप्सी में साफ पता चल पाता है कि गांठ या ट्यूमर कैंसर है या नहीं।
इतना ही नहीं, बायोप्सी में कैंसर के प्रकार और यह कितनी तेजी से फैल सकता है, इसके बारे में भी सारी चीजें पता चल जाती है। इसी के आधार पर इलाज की योजना भी बनाई जाती है। इसलिए कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी को सबसे अहम माना जाता है।
कैंसर की बीमारी तब ज्यादा खतरनाक हो जाती है, जब इसकी पहचान देरी से होती है। दरअसल, शुरुआती अवस्था में कैंसर का इलाज संभव माना जाता है। जब इसके लक्षण महसूस होते हैं, तो डॉक्टर कैंसर की जांच करवाते हैं। जब शरीर में ये लक्षण दिखते हैं, तो कैंसर के टेस्ट करवाए जाते हैं। कैंसर के लक्षणों को नीचे ग्राफिस में दिखाया गया है-

डॉ. प्रीति अग्रवाल बताती हैं कि लोगों को लगता है कि सभी मरीजों को इन 3 स्टेप्स से गुजरना पड़ता है। जबकि यह एक गलतफहमी है। कैंसर की जांच के लिए हर व्यक्ति को ब्लड टेस्ट, स्कैन और बायोप्सी तीनों चीजें करवानी जरूरी नहीं होती है। डॉक्टर लक्षण, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ही टेस्ट करवाते हैं। कुछ मामलों में स्कैन से ही कैंसर की पुष्टि हो जाती है, वहीं कुछ मामलों में बायोप्सी की जरूरत पड़ती है। लेकिन, जब लक्षण साफ नजर नहीं आते हैं, तो इस स्थिति में रोगी को कैंसर जांच की पूरी प्रक्रिया फॉलो करनी पड़ती है।
डॉ. प्रीति अग्रवाल बताती हैं, "अगर आपको पता चले की आपकी कैंसर की जांच हो रही है, तो मन में डर और चिंता का होना बेहद स्वाभाविक है। कैंसर की जांच का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं। लेकिन, लोगों को यह समझना जरूरी है कि कैंसर की जांच का मतलब है बिल्कुल नहीं है कि बीमारी की पुष्टि कंफर्म है। कई मामलों में कैंसर की जांच नेगेटिव भी होती है। इस स्थिति में लोगों को समझाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।"
वह आगे बताती हैं कि टेक्नोलॉजी से काफी प्रोग्रेस कर लिया है, अब कैंसर की जांच की प्रक्रिया पहले की तुलना में बेहद सुरक्षित और कम दर्दनाक होती है। ज्यादातर स्कैन दर्दरहित होते हैं। बायोप्सी भी आराम से हो जाती है, इसके लिए मरीज को ज्यादा समय तक अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं पड़ती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।