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Written By: Jitendra Gupta | Updated : February 4, 2021 5:21 PM IST
Image credits by: ब्लड शुगर या फिर यूरिन शुगर कौन सी शुगर ज्यादा खतरनाक! जानें यूरिन या ब्लड किस टेस्ट से मिलता है सही रिजल्ट
हाई ब्लड शुगर या डायबिटीज एक ऐसी समस्या है, जो मरीज की सम्पूर्ण जीवनशैली में बदलाव ला देती है। ऐसे में खान पान से लेकर शारीरिक गतिविधियों तक के नियम बनाने अनिवार्य हो जाते हैं। यहां जांच के अनुसार इलाज व परहेज का सवाल आता है। अक्सर ब्लड शुगर व यूरिन शुगर को लेकर आम जनता में भ्रान्ति होती है कि आखिर शुगर के बढ़ते जोखिम का अंदेशा किसकी माप के अनुसार लगाया जा सके? अक्सर लोग ब्लड शुगर और पेशाब में शुगर को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना करते हैं। ये दोनों ही अलग-अलग तरीके से मापी जाती है। आइए जानते हैं दोनों में कौन ज्यादा खतरनाक है।
ब्लड शुगर और यूरिन शुगर के विषय पर और प्रकाश डाल रहे हैं डॉक्टर अरविन्द अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एट श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट :-
पेशाब में शुगर होने के आमतौर पर हाई ब्लड शुगर लेवल का एक संकेत माना जाता है। आपके रक्तप्रवाह में मौजूद अतिरिक्त शुगर सिर्फ किडनी के माध्यम से ही शरीर से बाहर निकलती है। ऐसा तब होता है जह आपके रक्त में शुगर की सघनता 180mg/dl से ज्यादा हो जाती है। पेशाब में शुगर की मात्रा की जांच के लिए आपको यूरिन टेस्ट स्ट्रिप की जरूरत होती है, जिसके साथ ही एक कंटेनर चाहिए होता है।
डॉ. अरविंद के मुताबिक, दरअसल जानकारी के अभाव में अक्सर आम लोगों में ब्लड शुगर और यूरिन शुगर दोनों को लेकर भ्रान्ति की स्थिति होती है, ऐसे में दोनों के अलग अलग खतरे मान लिए जाते हैं और तुलनात्मक रूप से किसी एक को जोखिम भरा मान लिया जाता है। ऐसे में कई बार देखा गया है कि दोनों को अलग अलग बीमारियों की तरह न केवल देखा जाता है बल्कि बहुत से लोग यूरिन में शुगर की मात्रा बढ़ती मात्र मिलने पर अचानक घबरा जाते हैं, जबकि मुमकिन है ब्लड शुगर उतनी न हो या मामूली यूरिन शुगर किसी तरह का खतरा न दिखाए लेकिन ब्लड शुगर ज्यादा हो। दरअसल यहाँ माप की गलत पहचान से केस गंभीर या जोखिम भरा हो सकता है। यह बात निम्नलिखित 2 बिन्दुओं से समझी जा सकती है :-
पेशाब में शुगर का सही माप जानने के लिए आपको जरूरत होती है कि डॉक्टर से ये पता करें कि किस वक्त का यूरिन चाहिए होगा। इसके अलावा खाना खाने से पहले या बाद किस वक्त का सैंपल बेस्ट रहेगा। जब आप खुद से पेशाब में शुगर की जांच करते हैं तो आपका यूरिप सैंपल ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए। अगर आपको यूरिन टेस्ट कराना है तो आपको उसी वक्त का पेशाब चाहिए होगा ये नहीं कि आपने रात को पेशाब एक कंटेनर में रख दिया और सुबह उसका टेस्ट कराने जा रहे हैं। इस टेस्ट के लिए आपको स्ट्रिप सैंपल में डुबोनी है और दो मिनट देखना है कि उसका रंग कितनी तेजी से बदलता है।
डायबिटीज के कारण ब्लड में बढ़ी हुई शुगर की मात्रा का असर किडनी के फ़िल्टर और उसके संचालन पर पड़ता है जिसके परिणामस्वरुप समय बीतते बीतते यूरिन के ज़रिये शुगर निकलने लगती है, और अक्सर शुगर का पहला संकेत पेशाब गाढ़ा आना, बार बार आना या अधिक मात्रा में आने के लक्षणों में देखा जाता है। लेकिन यूरिन शुगर के ज़रिये व्यक्ति के शरीर में शुगर की सही माप अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि ब्लड में शुगर की मात्रा के मुकाबले यूरिन में आने वाली शुगर कम या ज्यादा हो सकती है। इसलिए केवल यूरिन में पाई जाने वाली शुगर के अनुसार ब्लड शुगर की स्थिति मान लिया जाना सही नहीं है।
केवल ब्लड शुगर टेस्ट को ही तवज्जो दें क्योंकि इसकी माप से ही व्यक्ति को ब्लड शुगर की सही माप पता चलती है।
अब क्योंकि यूरिन शुगर के ज़रिये सही माप का पता नहीं चलता, ऐसे में गलत माप के अनुसार इलाज की दिशा तय करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए ब्लड शुगर की माप को तवज्जो देनी चाहिए। ताकि सही माप के साथ इलाज की सही दिशा भी तय की जा सके और सही जानकारी भी प्राप्त हो, साथ ही इस दौरान यूरिन से संब धित समस्याओं को नहीं नज़रंदाज़ करना चाहिए बल्कि इलाज करवाना चाहिए, लेकिन केवल यूरिन में होने वाली परेशानियों और शुगर की माप से रोग का अंदाज़ा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
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