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Written By: Anshumala | Updated : June 12, 2020 5:52 PM IST
पॉटी में खून आने के कारण।© Shutterstock.
Blood in Stool: क्या आपके स्टूल यानी मल में कुछ दिनों से हल्का-हल्का खून आ रहा है? यदि हां, तो यह स्थिति नजरअंदाज करने वाली नहीं है। इसे अनदेखा करना आपके लिए खतरनाक भी हो सकता है। कई बार गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में समस्या होने के कारण भी मल में खून (mal me khoon aane ke karan)आने लगता है। मल त्याग करने के दौरान खून आने (Blood in Stool) के कई कारण हो सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति में इसके कारण अलग-अलग नजर आते हैं।
हालांकि, कई बार पॉटी से खून (blood with latrine) किसी सामान्य शारीरिक समस्या के कारण भी आता है, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी गंभीर रोग की तरफ इशारा करता है। जब मल (Stool) से खून आता है, तो उसका रंग कई बार काला हो सकता है। यदि आपकी पॉटी का रंग भी बदला हुआ है, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। हम आपको कुछ संभावित कारणों के बारे यहां बता रहे हैं, जो मल यानी स्टूल में खून (Causes of blood in stool) आने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
कई बार इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज होने के कारण भी मल से खून (Lettering mein khoon nikalna) आने लगता है। जब डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में क्रोनिक इंफ्लेमेशन होता है, तो इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज होता है। इससे मल में खून आने के साथ ही डायरिया भी हो सकता है। कई बार इन समस्याओं के कारण आपके पॉटी में पस या म्यूकस भी दिख सकता है।
पेट में अल्सर होने से मल त्याग करते समय आपको दर्द महसूस हो सकता है। डायरिया की समस्या हो सकती हैं। पेट में अल्सर को पेप्टिक अल्सर भी कहते हैं, जो आंतों में घाव या छाला होने के कारण होता है। इसमें काफी दर्द होता है। यह मुख्य रूप से पाचन तंत्र की लाइनिंग में होता है। पेट के साथ ही कई बार यह छोटी आंत में हो जाता है। पेट में अल्सर होना भी मल में खून आने का एक कारण (Blood in Stool and its causes) हो सकता है। इसके साथ ही पॉटी का रंग गाढ़ा, डायरिया, पेट में जलन, भूख कम लगना जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।
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एनल फिशर यानी गुदा में दरार आना, जो पॉटी में खून आने की वजह बन सकती है। कई बार गुदा के अंदरूनी भाग में कब्ज होने से दबाव पड़ने के कारण एनल फिशर की समस्या होती है। एनल फिशर एनस की लाइनिंग के टूटने के कारण होता है।
मल से कई बार आंतों में इंफेक्शन होने के कारण भी खून आने लगता है। आंतों में होने वाली इस समस्या को गैस्ट्रोएंटेरिटिस (Gastroenteritis) कहते हैं। यह बीमारी बैक्टीरिया, वायरस या फिर फूड प्वॉइजनिंग के कारण भी हो सकती है।
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