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Medically Verified By: Dr Sanjeev Kumar Sharma
Blood Clot in Veins
Causes of thrombosis : रक्त आमतौर पर रक्त वाहिकाओं में स्वतंत्र रूप से बहता है। डॉ संजीव कुमार शर्मा, एमडी, डीएम (क्लिनिकल हेमेटोलॉजी), BLK-MAX Hospital का कहना है कि हमारे शरीर में दो प्रकार की रक्त वाहिकाएं होती हैं- वेन्स और आर्टरीज। कुछ लोगों के ब्लड वेसेल्स में खून के थक्के जमने लगते हैं। यह परेशानी बार-बार हो सकती है। ब्लड वेसेल्स में बार-बार खून जमने की स्थिति को ही थ्रोम्बोसिस (What is thrombosis) कहा जाता है। इस स्थिति में यह जानना जरूरी हो जाता है कि रक्त के थक्के जमने के जोखिम को कौन से कारक प्रभावित कर रहे हैं। आइए डॉक्टर संजीव कुमार से जानते हैं थ्रोम्बोसिस होने के 5 प्रमुख कारण कौन से हैं?
कुछ लोगों में थ्रोम्बोसिस का कारण वंशानुगत हो सकता है, जैसे आनुवंशिक दोष या उत्परिवर्तन। ये कारक कुछ परिवारों में आम हैं। ऐसे में अगर आपके परिवार में किसी को खून जमने की परेशानी है, तो आपको अधिक सतर्क और सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसके साथ ही आपको अन्य अनुवांशिक दोषों से बचने की जरूरत होती है। इसमें प्रोटीन सी, प्रोटीन एस की कमी, फैक्टर वी लेडेन म्यूटेशन इत्यादि शामिल हैं।
इसके अलावा नसों में खून जमने के कई अन्य सामान्य कारक हो सकते हैं, जिसमें धूम्रपान करना, अधिक वजन होना, लंबे समय तक स्थिर अवस्था में रहना, कुछ हार्मोनल ट्रीटमेंट, सर्जरी के बाद का उपचार, कैंसर और कुछ ऑटो इम्यून डिजीज थ्रोम्बोसिस का कारण हो सकता है।
डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) एक प्रकार का थक्का है, जो पैर की मुख्य नसों में बनता है। कुछ मामलों में यह थक्का हार्ट से होते हुए फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जहां जाकर यह फंस सकता है। इसे पल्मोनरी (फेफड़े) एम्बोलिज्म कहा जाता है। यह स्थिति काफी घातक हो सकती है।
धमनियों में होने वाला थक्का आमतौर पर एथेरोस्क्लेरोसिस से जुड़ा होता है। धमनी में ब्लड का थक्का बनने की वजह से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर का कहना है कि नसों में खून जमने की स्थिति का निदान डॉप्लर अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन की मदद से की जा सकती है। वहीं, आर्टरी में थक्कों का निदान एंजियोग्राफी या एमआरआई या सीटी स्कैन के द्वारा किया जाता है।
नसों में खून जमने का इलाज कई तरह से की जा सकती है, आइए डॉक्टर से जानते हैं
एंटीकोएगुलंट्स - ऐसी दवाएं जो थक्के बनने से रोकती हैं
थ्रोम्बोलाइटिक्स - ऐसी दवा जो रक्त के थक्कों को ब्लड में घोलती है।
कैथेटर-निर्देशित थ्रोम्बोलिसिस - यह एक प्रक्रिया है, जिसमें कैथेटर नामक एक लंबी ट्यूब डाली जाती है और रक्त के थक्के की ओर निर्देशित की जाती है, जहां थक्कों में घुलनशील दवा पहुंचती है।
थ्रोम्बेक्टोमी - ब्लड के थक्कों को सर्जरी के जरिए हटाई जाती है।
एंटीप्लेटलेट्स - एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल, इत्यादि।
ब्लड के थक्के बनने की संभावना को कम करने के कई तरीके हैं। डॉक्टर का कहना है कि आप सही इलाज और अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करके स्थिति में काफी हद तक सुधार ला सकते हैं।
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