
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr Brij Vallabh Sharma
Blood Clot During Travel
लंबी दूरी की फ्लाइट, बस या ट्रेन से ट्रैवल करना, काफी कॉमन हो चुका है। हालांकि, लगातार कई घंटों तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से शरीर में कुछ परेशानियां भी होने लगती हैं, जिसमें खून के थक्के बनने के जोखिम भी शामिल हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस या डीवीटी कहा जाता है।
जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन डॉ. बृज वल्लभ शर्मा का कहना है कि डीवीटी तब पैदा होती है, जब पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। अगर यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक यात्रा करने वाले लोगों को इस खतरे के बारे में जानकारी होना जरूरी माना जाता है।
सामान्य परिस्थितियों में पैरों की मांसपेशियां चलने-फिरने के दौरान खून को दिल की ओर वापस भेजने में मदद करती हैं। लेकिन जब कोई व्यक्ति कई घंटों तक लगातार बैठा रहता है, तो पैरों में ब्लड फ्लो धीमा पड़ जाता है।
Blood Clot
ब्लड का यह धीमा फ्लो नसों में जमाव पैदा करता है, जिससे थक्का बनने की संभावना बढ़ जाती है। विशेष रूप से फ्लाइट में कम जगह, सीमित गतिविधि और कुछ मामलों में शरीर में पानी की कमी भी इस जोखिम को बढ़ा सकती है।
डॉक्टर का कहना है कि हर यात्री में डीवीटी नहीं बनती, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है, जैसे-
इन समूहों में यात्रा से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतना महत्वपूर्ण माना जाता है।
डीवीटी के लक्षण हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देते। फिर भी कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसमें कुछ लक्षण शामिल हैं-
Feet Pain
अगर थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या अचानक चक्कर आने जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता ली जानी चाहिए।
अच्छी बात यह है कि कुछ आसान उपाय अपनाकर डीवीटी के खतरे को काफी हद तक कम किया जाता है।
कुछ उच्च जोखिम वाले लोगों को कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनने की सलाह भी दी जाती है, जिससे पैरों में रक्त प्रवाह बेहतर बनाए रखा जाता है।
Disclaimer : ध्यान रखें कि ट्रैवल के दौरान थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी का सेवन और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद करता है। सुरक्षित यात्रा का मतलब सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि पूरे सफर के दौरान स्वास्थ्य की रक्षा करना भी माना जाता है।