कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर के अंदर कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित होती हैं। सामान्य परिस्थितियों में हेल्दी कोशिकाएं शरीर की आवश्यकताओं के अनुसार बढ़ती और विभाजित होती हैं लेकिन कैंसर की स्थिति में कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ती और विभाजित होती हैं। कोशिकाएं अपनी उम्र के अनुसार मर जाती हैं या फिर क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और हेल्दी कोशिकाएं उनकी जगह ले लेती हैं।
ब्लड कैंसर को ल्यूकेमिया भी कहा जाता है, जो रक्त में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। इसका प्रमुख कारण रक्त कोशिकाओं के जीन में होने वाले कुछ असामान्य बदलाव हैं, जिनसे सफेद रक्त कोशिकाएं असाधारण रूप से बढ़ने लग जाती है। रक्त में कैंसरग्रस्त कोशिकाओं की संख्या अत्यधिक बढ़ने के कारण स्वस्थ लाल व सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स को विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। रक्त में हेल्दी ब्लड सेल्स की कमी के कारण शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता है और अनेक स्वास्थ्य समस्याएं विकसित होने लगती हैं। ब्लड कैंसर के कई अलग-अलग प्रकार हैं, जिनके अनुसार लक्षण भी भिन्न हो सकते हैं। हालांकि, इस रोग में होने वाले प्रमुख लक्षणों में आमतौर पर बुखार, कमजोरी, थकान आदि शामिल हैं। ब्लड कैंसर में सफेद रक्त कोशिकाएं प्रभावित हो जाने के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य रूप से काम नहीं कर पाती है, जिस कारण से कई संक्रमण व रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
ब्लड कैंसर के कितने प्रकार हैं?
रक्त कैंसर के तीन प्रमुख प्रकार हैं:
ल्यूकेमिया- इस प्रकार के रक्त कैंसर को सफेद रक्त कोशिकाओं के अत्यधिक उत्पादन का कारण माना जाता है, जो संक्रमण से लड़ने में असमर्थ होता हैं। ल्यूकेमिया को चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। जो इस प्रकार हैं:
पहलाः एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (यह बोन मैनो की श्वेत रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है और बहुत तेजी से फैलता है)।
दूसराः एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (यह माइलॉयड कोशिकाओं में उत्पन्न होता है, जो श्वेत रक्त कोशिकाओं, लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स में पाया जाता है। ये भी बहुत तेजी से फैलता है)।
तीसराः क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (यह आपके बोन मैरो में स्थित लिम्फोसाइटों में शुरू होता है लेकिन धीरे-धीरे फैलता है)।
चौथाः क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया (यह माइलॉयड कोशिकाओं को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे विकसित होता है)।
लिम्फोमा- रक्त कैंसर का यह रूप आपकी लिम्फ सिस्टम को प्रभावित करता है। यह आपके लिम्फ नोड्स, स्पलीन और थाइमस ग्लैंड में मौजूद नसों का एक नेटवर्क है। लिम्फोमा दो प्रकार के लिम्फोसाइटों में उत्पन्न होता है:
पहलाः बी कोशिकाएं (हॉजकिन लिंफोमा)
दूसराः टी कोशिकाएं (नॉन-हॉजकिन लिंफोमा)
यह आपकी इम्यून गतिविधियों को बाधित करता है और लिम्फ नोड्स में सूजन का कारण बनता है।
मायलोमा- यह कैंसर आपके बोन मैरो की प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है। ये सफेद रक्त कोशिकाएं संक्रमण को रोकने के लिए एंटीबॉडी बनाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। मायलोमा आपकी हड्डी, रक्त और गुर्दे (किडनी) को नुकसान पहुंचाता है, जिसके परिणामस्वरूप हड्डी में दर्द, हड्डी का कमजोर होना/ फ्रैक्चर, रक्त में कैल्शियम की अधिकता (हाइपरलकसीमिया), एनीमिया, रक्तस्राव, किडनी फेल्योर आदि जैसी बीमारियां होती हैं।
ब्लड कैंसर के पीछे जोखिम कारक
ब्लड कैंसर के सटीक कारण वास्तव में अज्ञात है, लेकिन कुछ कारक आपमें ब्लड कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं, जिसमें शामिल है:
परिवार में किसी का ब्लड कैंसर से पीड़ित होना
परमाणु रिएक्टर में काम करने या फिर पहले कभी कैंसर के इलाज के कारण हाई फ्रिक्वेंसी के संपर्क में आना
आनुवंशिक विकार जैसे डाउन सिंड्रोम
बेंजीन जैसे हानिकारक रसायनों के संपर्क में आना
वायरल संक्रमण जैसे एचआईवी (मानव प्रतिरक्षा विकार) या ईबीवी (एपस्टीन बर वायरस) से ग्रस्त होना
धूम्रपान और तंबाकू का उपयोग करना
मोटापा
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
ब्लड कैंसर के प्रमुख लक्षण
ब्लड कैंसर के प्रमुख लक्षण नहीं हैं। इसके अलावा आपके शारीरिक संकेत आपके रक्त कैंसर के प्रकार के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। ब्लड कैंसर के कॉमन लक्षण निम्न हैं-
अत्यधिक थकान और कमजोरी
सांस लेने में कठिनाई
सिर चकराना
त्वचा का पीला पड़ना
छाती में दर्द
चोट लगना
मसूड़ों में रक्तस्राव
रक्त वाहिकाओं के फटने के कारण त्वचा पर छोटे लाल धब्बे पड़ना
भारी मासिक धर्म
काला मल या शौच के वक्त खून आना
बुखार और रात को बहुत तेज पसीना आना
बेवजह वजन कम होना
हड्डी में दर्द
पेट दर्द के साथ मतली
बहुत ज्यादा प्यास लगना
कब्ज
भूख में कमी
टखनों में सूजन
त्वचा में खुजली
हाथ-पैर का सुन्न होना और उनमें दर्द होना
ब्लड कैंसर का निदान
अगर आप ऊपर दिए गए लक्षणों का अनुभव करते हैं तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करने की जरूरत है। ब्लड कैंसर का पता लगाने के लिए आपका डॉक्टर कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकता है। ब्लड कैंसर के लिए सामान्य क्लीनिकल टेस्ट किए जा सकते हैंः
कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट: यह ब्लड टेस्ट आपके डॉक्टर को सैंपल में एक विशेष प्रकार की रक्त कोशिका की मात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी देता है। अगर रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से अधिक या कम है, तो यह रक्त कैंसर का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में आपका डॉक्टर कैंसर की पुष्टि के लिए दूसरे टेस्ट की भी सलाह दे सकता है।
ब्लड प्रोटीन टेस्ट: रक्त कोशिकाओं में इम्यूनोग्लोबुलिन भी होते हैं, जो इम्यून सेल प्रोटीन होते हैं और संक्रमण से लड़ने में आपकी सहायता करते हैं। मायलोमा कैंसर के मामले में, इन कोशिकाओं का असामान्य उत्पादन होता है। इसलिए, यह निर्धारित करने के लिए कि आप रक्त कैंसर से पीड़ित हैं या नहीं, आपका डॉक्टर ब्लड प्रोटीन टेस्ट की सलाह दे सकता है।
बायोप्सी: अगर CBC की रिपोर्ट में रक्त कोशिका की संख्या बढ़ी हुई या कम हुई दिखाई देती है या फिर ब्लड प्रोटीन टेस्ट में इम्यूनोग्लोबुलिन का असामान्य स्तर दिखाई पड़ता है तो ब्लड कैंसर की पुष्टि करने के लिए बोन मैरो बायोप्सी की जाती है।
विशिष्ट प्रकार के रक्त कैंसर और उनसे जुड़े रोगों का पता लगाने के लिए फ्लो साइटोमेट्री (flow cytometry) और साइटोजेनेटिक्स (cytogenetics) जैसे अतिरिक्त टेस्ट भी किए जाते हैं।
ब्लड कैंसर का उपचार
ब्लड कैंसर का उपचार 3 प्रमुख कारकों पर निर्भर करता है:
कैंसर का प्रकार
कैंसर की स्टेज
रोगी की आयु
यहां ब्लड कैंसर के विभिन्न उपचार विकल्पों के बारे में बताया गया है:
स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन: इस प्रक्रिया में, बोन मैरो से स्टेम सेल, पेरिफेरेल ब्लड (peripheral blood) या उम्बिकल कार्ड को इकट्ठा किया जाता है और स्वस्थ रक्त बनाने वाली कोशिकाओं के साथ इंफ्यूज किया जाता है।
कीमोथेरेपी: इसमें कैंसर रोधी दवाओं का उपयोग शामिल है, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकती हैं। इन दवाओं को एक इंजेक्शन के माध्यम से या फिर ओरल तरीके से रोगी को दिया जाता है। कुछ मामलों में, कीमोथेरेपी में एक समय पर कई दवाएं लेने की आवश्यकता हो सकती है। ब्लड कैंसर के रोगी को कुछ मामलों में पहले कीमोथेरेपी और फिर स्टेम सेल ट्रांसप्लाटेशन से गुजरना पड़ सकता है।
रेडिएशन थेरेपी: इसमें कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडिएशन का उपयोग शामिल है और इसलिए स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से पहले रेडिएशन थेरेपी की सलाह दी जा सकती है।
ब्लड कैंसर के जोखिम को कैसे करें कम
जैसा कि हम बता चुके हैं कि ब्लड कैंसर का सटीक कारण अज्ञात है, इसलिए इसकी रोकथाम का कोई विशेष उपाय नहीं हैं। हालांकि, आप एक स्वस्थ जीवन शैली का पालन करके कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। यहां कुछ टिप्स की मदद से आप इसके जोखिम को कम कर सकते हैंः
कम से कम 30 मिनट तक रोजाना व्यायाम करने की आदत बनाएं
एंटीऑक्सिडेंट और पोषक तत्वों से भरपूर अच्छी तरह से संतुलित डाइट का पालन करें
अगर संभव हो तो कीटनाशक से दूर रहें
रेडिएशन के अत्यधिक संपर्क से बचें
बहुत सारा पानी पिएं (हर दिन कम से कम तीन लीटर)
अगर आप कैंसर से संबंधित किसी भी अस्पष्ट लक्षण का अनुभव करते हैं, तो अपने डॉक्टर के साथ उन पर चर्चा करें और तुरंत इलाज कराएं।
हिंदी फिल्मों के निर्माता विजय गलानी का लंदन में ब्लड कैंसर के कारण निधन हो गया। खबरों के अनुसार, वे पिछले कुछ महीनों से लंदन में रहकर अपना इलाज करवा रहे थे।
ब्लड कैंसर (Blood Cancer 2021) को ल्यूकेमिया के नाम से जाना जाता है. ल्यूकेमिया दो तरह का होता है. ब्लड कैंसर का पता अगर समय पर लग जाये तो इसका इलाज भी संभव है. लेकिन इसके लिए जरूरी सतर्कता के साथ ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण जानना बेहद जरूरी होता है.
कैंसर के इलाज में अब कीमोथेरेपी बीती बात हो जाएगी। कैंसर का इलाज महज एक टेबलेट से ही संभव हो गया है। इससे मरीज को बाल गिरने व अत्यधिक कमजोरी जैसी स्थिति से दो-चार नहीं होना पड़ेगा और न ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ेगी।
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