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कोरोना संक्रमित ना होने के बावजूद 4 मरीजों में मिला ब्लैक फंगस, सभी पेशेंट हैं फुली वैक्सीनेटेड

Black fungus cases in india: बेंगलुरु के एक अस्पताल में ब्लैक फंगस के 4 मरीज मिले हैं। इस खबर के बाद एक्सपर्ट परेशान हैं कि कहीं ब्लैक फंगस की वापसी तो नहीं हो रही।

कोरोना संक्रमित ना होने के बावजूद 4 मरीजों में मिला ब्लैक फंगस, सभी पेशेंट हैं फुली वैक्सीनेटेड

Written by Pallavi Kumari |Published : April 27, 2022 3:47 PM IST

Black fungus cases in india: पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर के बाद ब्लैक फंगस बड़ी तेजी से फैला था। उस दौरान कोरोना (COVID-19) से ठीक हुए मरीजों में ये समस्या देखी गई थी। लेकिन अब बेंगलुरु के एक अस्पताल से एक खबर आ रही है कि यहां के एक अस्पताल में 4 मरीजों में ब्लैक फंगस का केस मिला है। ताजुब कि बात ये है कि इन मरीजों में कोई भी कोराना पॉजिटिव नहीं है और ये सभी लोगों को कोविड के दोनों ही टीके लग चुके हैं। दरअसल, मामला बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल (Manipal Hospital in Hebbal, Bengaluru) का है। मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर के अनुसार, वर्तमान में ब्लैड फंगस के 4 मरीज मिले हैं। चारों मरीजों में से एक पुरुष है जिसकी उम्र 60 से ऊपर है और तीन महिलाएं हैं, जिनमें दो 60 से ऊपर हैं और एक की उम्र महज 30 साल है।

सभी पेशेंट हैं फुली वैक्सीनेटेड

डॉक्टर का कहना है कि इन सभी का पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका और इनमें से किसी को भी हाल ही में कोरोना नहीं हुआ है। लेकिन कुछ डॉक्टरों का संदेह है कि उन्हें हाल ही में कोविड संक्रमण था लेकिन आरटीपीसीआर टेस्ट में कोई भी पॉजिटिव नहीं पाया गया। इस पूरी खबर को अच्छी तरह से जानने के लिए और समझने के लिए TheHealthSite.com ने डॉ. संतोष एस (Dr. Santosh S), कंसल्टेंट- इयर नोज़ एंड थ्रोट, मणिपाल अस्पताल हेब्बल से संपर्क किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि वर्तमान स्थिति क्या है और मरीजों में क्या लक्षण हैं।

मरीजों में अस्पष्ट हैं ब्लैक फंगस के लक्षण

डॉ संतोष एस (Dr Santosh S) का कहना है कि ज्यादातर लक्षण अस्पष्ट हैं। रिपोर्ट किए गए लक्षण काफी अस्पष्ट हैं। सभी में वायरस के संक्रमण के लक्षण समान नहीं थे। हालांकि, ब्लैक फंगस के लक्षण सामान्य लक्षण (black fungus symptoms) हैं जिनके बारे में लोगों को जानना, वो है

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क्या फिर से फैल रहा है ब्लैक फंगस?

इस बात पर हमने डॉ संतोष एस जानना चाहा कि क्या ये ब्लैक फंगसकी फिर से शुरुआत है? तो, डॉ संतोष बताया कि फिलहाल जिन लोगों में ब्लैक फंगस के ये मामले मिले हैं उनमें पहले से ही साइनस की बीमारी है। हालांकि, ब्लैक फंगस डायबिटीज या हाई शुगर वाले लोगों में पाया गया था लेकिन अब जो मरीज मिले हैं उन्हें डायबिटीज भी नहीं है।

क्या बढ़ते कोरोना मामलों से इसका कोई संबंध है?

डॉ. संतोष बताते हैं 2021 में, जब दूसरी लहर भारत में तबाही मचा रही थी, भारत में सबसे पहले म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस संक्रमण के मामले सामने आए। इसका मतलब यह है कि दोनों आपस में जुड़े हुए हैं? कोविड संक्रमण एक संभावना और ब्लैक फंगस इससे जुड़ा हुआ है। हो सकता है कि नाक और साइनस की पारिस्थितिकी में बदलाव और ब्लैक फंगस का विकास इसका संकेत हो। हालांकि, ध्यान देने वाली बात ये है कि ब्लैक फंगस किसी भी उम्र में किसी को भी संक्रमित कर सकता है। हालांकि, एक निश्चित समूह के लोगों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

किन लोगों में ज्यादा है ब्लैक फंगल का खतरा?

डॉ. संतोष के अनुसार, अगर आपकी इम्यूनिटी कमजोर है, तो आपको ब्लैक फंगस होने की अधिक संभावना है। यह दवाओं के उपयोग का परिणाम हो सकता है। इसके अलावा कुछ रोगियों में ये अन्य कारणों से ये ट्रिगर कर सकता है। जैसे कि

-अनियंत्रित मधुमेह

-एचआईवी या एड्स

- स्टेरॉयड लेने वाले में

-शरीर में एसिड का अनियंत्रित स्तर

-कैंसर

-अंग प्रत्यारोपण

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-समय से पहले जन्म या जन्म के समय कम वजन

क्या यह भारत के लिए एक नया खतरा है?

जी हां, डॉक्टर संतोष एस का कहना है कि देश में हाल ही में ब्लैक फंगस का प्रकोप एक खतरा है। इसे ध्यान में रखना होगा क्योंकि भारत में भूगोल के कारण फंगल साइनसिसिटिस अधिक आम है। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अन्य देशों में यह नहीं है, उनके पास भी है लेकिन यह भारतीयों को हो सकता है। ऐसे में

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ब्लैक फंगस से बचाव का तरीका

साइनसाइटिस का इलाज ब्लैक फंगस को रोकने में मदद कर सकता है। इसके अलावा डायबिटीज के रोगियों को इसे लेकर खौसतौर पर सर्तक रहना चाहिए। इस दौरान ध्यान रखें कि डायबिटीज कंट्रोल में रहे। इसके साथ ही सतर्क रहें, लक्षणों को नजरअंदाज ना करें और अपनी सेहत का अतिरिक्त ख्याल रखें।

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