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बच्चे को जन्म के बाद से 12 साल तक कौन-कौन सी वैक्सीन दी जाती हैं? जानें वैक्सीनेशन छूट जाए तो क्या करें
vaccination schedule for baby : जब किसी घर में किलकारियां गूंजती हैं तो उसके साथ ही बच्चे की सही देखभाल का सिलसिला शुरू हो जाता है। एक बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित और सम्पूर्ण टीकाकरण बेहद जरूरी है। बच्चों को सही उम्र में टीके यानि वैक्सीन देना बहुत जरूरी है, इससे उन्हें कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है। हालांकि बहुत से लोगों को बच्चों के वैक्सीनेशन के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती है। नोएडा के जेपी हॉसिप्टल में Neonatology & Paediatrics डिपार्टमेंट डॉ. आशु साहनी का कहना है कि अगर आपके घर में भी हाल-फिलहाल में बच्चा हुआ है तो आपको उसके वैक्सीनेशन के बारे में पता होना चाहिए। आइए आपको बताते हैं किस उम्र में बच्चे को कौन सी वैक्सीन देनी चाहिए।
1-बैसिलस कैलमेटे गुएरिन (बीसीजी)
इस टीके की एक खुराक बच्चे को ट्युबरकुलोसिस के गंभीर रूपों से सुरक्षित रखती है।
2- ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी)
यह जन्म के समय दी जाती है। इसके बाद 6, 10 और 14 सप्ताह की उम्र पर इंजेक्शन के रूप में पोलियो खुराक दी जाती है। यह वैक्सीन बच्चे को पोलियो वायरस से सुरक्षित रखती है, जो बेहद गंभीर बीमारी है और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इसके कारण बच्चा पूर्ण अपंगता/ पैरालिसिस का शिकार हो सकता है। यह वायरस आमतौर पर 5 साल या इससे कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है।
3-जन्म से समय दी जाने वाली हेपेटाइटिस बी
यह पहली खुराक जन्म के समय दी जाती है ओर इसके बाद 6, 10 और 14 सप्ताह पर बूस्टर डोज़ दी जाती है। यह वैक्सीन बच्चे को हेपेटाइटिस बी से सुरक्षित रखती है। यह एक वायरल इन्फेक्शन है, जो लिवर को प्रभावित करता है। यह एक्यूट एवं क्रोनिक बीमारी दोनों का कारण बन सकता है।
1-ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी)
यह ओपीवी की दूसरी खुराक है जो 6 सप्ताह पर दी जाती है। अगली खुराक 10 सप्ताह और 14 सप्ताह की उम्र में दी जाती है।
2-पैंटावेंलेंट-
यह पहली खुराक 6 सप्ताह की उम्र में दी जाती है। अगली खुराक 10 सप्ताह पर और अंतिम खुराक 14 सप्ताह की उम्र पर दी जाती है। इसे इंजेक्शन के ज़रिए दिया जाता है। यह वैक्सीन बच्चे को डिफ्थिरिया, परट्युसिस, टेटनस, हेपेटाइसि बी और एचआईबी से सुरक्षा प्रदान करती है।
3-रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी)
6 सप्ताह पर पहली खुराक दी जाती है। इसके बाद दूसरी खुराक तब दी जाती है जब आपका बच्चा 10 सप्ताह का होता है। तीसरी और आखरी खुराक 14 सप्ताह पर दी जाती है। इसे मुंह से दिया जाता है। यह वैक्सीन रोटावायरस से सुरक्षा देती है, जो नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में डायरिया का सबसे गंभीर रूप है।
4- न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी)
इसकी कुल दो खुराकें दी जाती हैं इसमें से पहली खुराक छह सप्ताह पर और दूसरी खुराक 14 सप्ताह पर दी जाती है। इसे इंजेक्शन से दिया जाता है। यह वैक्सीन बच्चे को मेनिन्जाइटिस, सेप्टिसेमिया और निमोनिया तथा हल्के इन्फेक्शन जैसे साइनुसाइटिस और ओटिटिस मीडिया से सुरक्षित रखती है।
5-इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (एफआईपीवी)
पहली खुराक 6 सप्ताह पर दी जाती है। और दूसरी खुराक 14 सप्ताह पर दी जाती है। इसे इंजेक्शन से दिया जाता है।
1- पैंटावैलेंट
यह दूसरी खुराक है जो 10 सप्ताह पर दी जाती है और आखरी खुराक 14 सप्ताह पर दी जाती है।
2-ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी)
यह ओपीवी की तीसरी खुराक है जो 10 सप्ताह पर दी जाती है। आखरी खुराक 14 सप्ताह पर दी जाती है।
3-रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी)- यह दूसरी खुराक है जो 10 सप्ताह पर दी जाती है। आखरी खुराक 14 सप्ताह पर दी जाती है। इसे इंजेक्शन के ज़रिए या मुंह से दिया जाता है।
1-पैंटावेंलेंट
यह तीसरी खुराक है जो 14 सप्ताह पर दी जाती है।
2-ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी)
यह आखरी खुराक है जो 14 सप्ताह पर दी जाती है।
3-रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी)
यह 14 सप्ताह पर दी जाती है। इसे इंजेक्शन से या मुंह से दिया जा सकता है।
4-न्युमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी)
यह दूसरी खुराक है जिसे 14 सप्ताह पर दिया जाता है। इसे इंजेक्शन के ज़रिए दिया जाता है।
6-7 माह में दी जाने वाली वैक्सीन
1. इन्फ्लुएंज़ा वैक्सीन- इसकी दो खुराक 6 माह और 7 माह पर दी जाती है। कॉमन फ्लु और स्वाइन फ्लु से सुरक्षा देती है।
2. टायफॉइड वैक्सीन -यह 6 महीने पर दी जाती है। यह टायफॉइड बुखार से सुरक्षित रखती है।
1-मीज़ल्स और रूबेला (एमआर)
एमआर की पहली खुराक 9 माह पर दी जाती है और इसके बाद बूस्टर खुराक 15 माह पर दी जाती है। यह वैक्सीन मीज़ल्स और रूबेला से सुरक्षा देती है।
2-जापानी एनसेफेलाइटिस (जेई-1)
इसकी एक खुराक 12 महीने पर दी जाती है। यह वैक्सीन जापानी एनसेफेलाइटिस से सुरक्षा देती है जो एशिया में वायरल एनसेफेलाइटिस का मुख्य कारण है।
3-हेपेटाइटिस ए
पहली खुराक 12 माह पर दी जाती है और हेपेटाइटिस ए वायरस से सुरक्षा देती है जो पीलिया यानि जॉन्डिस का मुख्य कारण है।
16-24 माह में दी जाने वाली वैक्सीन
1-न्युमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन-
इसकी तीन खुराक 6, 10 और 14 सप्ताह पर दी जाती है। यह मेनिन्जाइटिस, निमोनिया और हल्के इन्फेक्शन जैसे साइनुसाइटिस से सुरक्षा देती है।
2- डिफ्थीरिया परट्युसिस और टिटेनस (डीपीटी)
बूस्टर 3- इसकी दूसरी खुराक 5-6 साल के उम्र के बीच दी जाती है। इसे इंजेक्शन से दिया जाता है।
3-ओरल पोलियो वैक्सीन (आईपीवी)
बूस्टर- इसकी एक ही खुराक दी जाती है। इसे मुंह से या इंजेक्शन से दिया जाता है।
1-डिफ्थीरिया परट्युसिस और टिटेनस (डीपीटी)
बूस्टर 5- यह दो में से दूसरी खुराक है। डीपीटी वैक्सीन आपके बच्चे को 5-6 साल की उम्र के बीच दी जाती है। इसे इंजेक्शन से दियाज ाता है। यह वैक्सीन डिफ्थीरिया, परट्युसिस और टिटेनस से सुरक्षा देती है।
2- एमएमआर- दूसरा बूस्टर
10 साल में दी जाने वाली वैक्सीन
टिटेनस और एडल्ट डिफ्थीरिया (टीडी)
यह एक मात्र खुराक है जिसे इंजेक्शन से दिया जाता है। यह वैक्सीन टिटेनस और डिफ्थीरिया से सुरक्षा देती है।
1-एचपीवी वैक्सीन लड़कियों को 10 साल की उम्र में दी जाती है। यह सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा देती है।
2-मेनिंजोकोकल वैक्सीन इंजेक्शन के द्वारा 9-23 माह की उम्र के बीच दी जाती है। इसकी 2 दो खुराक 3 माह के अंतर पर दी जाती हैं। यह मेनिन्जाइटिस से सुरक्षा देती है।
ऐसे मामलों में कैच-अप वैक्सीनेशन प्रक्रिया को अपनाया जाता है। अगर कोई वैक्सीन चूक गई है, तो उसे देकर पूरा किया जाता है। समय पर टीके लगवाना/ वैक्सीन देना बच्चों को वैक्सीन से सुरक्षित रखी जाने वाली बीमारियों से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है।